डच अन्वेषणकर्ताओं ने वहां की एक स्थानीय कंपनी A Hak, NL के तीन पूर्व कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, इन लोगों पर रिलायंस उद्योग समूह की कंपनी के साथ कथित कारोबार में सेवाओं की ऊंची दर पर फ़र्ज़ी बिल बनाकर 1.2 अरब डॉलर (1,200,000,000 INR) की मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप है।

Bloomberg के अनुसार Fiscal Intelligence and Investigation Service & Economic Investigation Service FIOD – ECD की संयुक्त कार्रवाही के बाद इन तीनों कर्मियों की गिरफ़्तारी की गयी, इन तीनों पर भारत की रिलायंस उद्योग समूह की कंपनी के साथ कथित कारोबार में सेवाओं की ऊंची दर पर बिल बनाकर 1.2 अरब डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग करने का संदेह है। यह मामला मुकेश अंबानी की Reliance Industries Ltd., के नियंत्रण वाली एक कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसने भारत में गैस पाइपलाइन परियोजना का निर्माण किया है।

इधर रिलायंस ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है, ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन लिमिटेड (EWPL) ने भी परियोजना के लिए किसी भी चरण में किसी भी तरह की मनी लॉन्डरिंग से इनकार किया है। EWPL को पहले Reliance Gas Transportation Infrastructure Ltd. (RGTIL) के नाम से जाना जाता था। साथ ही रिलायंस इंडस्ट्री ने कहा है कि 2006 में उसने नीदरलैंड की किसी भी कंपनी को न तो ठेका दियाऔर ना ही कोई कोई पाइपलाइन कंपनी स्थापित की।

इन तीनो पूर्व कर्मियों पर आरोप है कि RGTIL के लिए किए गए काम के ठेकों में बढ़ी हुई राशि का बिल दिखाकर कथित रूप से लगभग 1.2 अरब डॉलर का लाभ कमाया और और इस रक़म को सिंगापुर की कंपनी Biomatrix Marketing Ltd., को भेजा। सिंगापुर की इस कंपनी के कथित तौर पर Reliance Industries Ltd.,से जुड़े होने का दावा किया जा रहा है।

AFP के अनुसार नीदरलैंड के लोक अभियोजक के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्थानीय कंपनी ‘फर्जी बिल’ बनाने वाली फर्म की तरह काम कर रही थी और उसकी मदद से भारतीय कंपनी को गैस ग्राहकों से कथित तौर पर दोगुना लागत वसूल करने में मदद मिली। इस कथित धांधली से की गई कमाई को दुबई, स्विट्जरलैंड तथा कैरेबियाई देशों के रास्ते जटिल लेन-देन के नेटवर्क के माध्यम से सिंगापुर की कंपनी तक पहुंचाया गया। आरोप है कि इस काम के लिए संदिग्ध व्यक्तियों को 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए थे।

AFP के अनुसार इस फर्ज़ीवाड़े में नीदरलैंड की और भी कई कंपनियों के शामिल होने का संदेह है। EWPL ने कहा है कि यह गैसलाइन एक निजी कंपनी ने बनाई है। इसमें पैसा कंपनी के प्रवर्तकों का लगा है। इसमें कोई सार्वजनिक धन नहीं लगाया गया है और बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का कर्ज लौटा दिया गया है।

पिछले महीने ही ब्रुकफील्ड के नेतृत्व वाले कनाडा के निवेशक इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट (इनविट) ने घाटे में चल रही EWPL को 13,000 करोड़ रुपये में खरीदने की सहमति जताई है। EWPL, देश के पूर्वी तट पर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के KG -D 6 गैस क्षेत्र को पश्चिम में गुजरात के ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करती है।