कल 12 दिसंबर को राज्यसभा में भारी विरोध के बाद CAA (Citizenship Amendment Act) नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया, इसे लेकर देश में खासकर पूर्वोत्तर भारत में हंगामा मचा हुआ है, सबसे पहले NRC, CAA और NPR के बारे में जानें :

NRC = (National Register of Citizenship) – या राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर।
CAA = (Citizenship Amendment Act) या – नागरिकता संशोधन क़ानून।
NPR = (National Population Register) या – राष्ट्रिय जनसँख्या रजिस्टर।

1. NRC क्या है ?

80 के दशक में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को लेकर छात्रों ने आंदोलन किया था। इसके बाद असम गण परिषद और तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के बीच समझौता हुआ। समझौते में कहा गया कि 1971 तक जो भी बांग्लादेशी असम में घुसे, उन्हें नागरिकता दी जाएगी और बाकी को निर्वासित किया जाएगा। अब तक सात बार NRC लिस्ट जारी करने की कोशिशें हुईं। 2013 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अंत में अदालती आदेश के बाद ये लिस्ट जारी हुई थी।

* NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) सबसे पहले वर्ष 1951 में तैयार किया गया था ।
* 1979 में अखिल आसाम छात्र संघ (AASU) द्वारा अवैध आप्रवासियों की पहचान और निर्वासन की मांग करते हुए एक 6 वर्षीय आन्दोलन चलाया गया था।
* 15 अगस्त, 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अखिल असम छात्रसंघ का आन्दोलन शान्त हुआ था।
* असम में बांग्लादेशियों की बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर नागरिक सत्यापन की प्रक्रिया दिसंबर, 2013 में शुरू हुई थी। मई, 2015 में असम राज्य के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

* 31 दिसंबर, 2017 को असम सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (NRC) मसौदे का पहला संस्करण जारी किया गया।
* भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता प्रदान किए जाने हेतु 3.29 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 1.9 करोड़ लोगों को वैध भारतीय नागरिक माना गया है। शेष 1.39 करोड़ आवेदनों की विभिन्न स्तरों पर जांच जारी थी।

NRC में असम के सिर्फ ऐसे लोगों को ही भारतीय नागरिक माना गया था, जिनके पूर्वजों के नाम 1951 के NRC में या 24 मार्च 1971 तक के वोटर लिस्ट में मौजूद हों। इसके अलावा 12 दूसरे तरह के सर्टिफिकेट जैसे जन्म प्रमाण पत्र, पासबुक आदि दिए जा सकते हैं। यदि किसी दस्तावेज में उसके किसी पूर्वज का नाम है तो उसे रिश्तेदारी साबित करनी होती है।

30 अगस्त को असम में NRC राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर की आख़िरी सूची जारी की गई जिसमें 19,06,657 के नाम शामिल नहीं थे, और सूत्रों के अनुसार असम में NRC यानी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर की फ़ाइनल लिस्ट से जिन 19,06,657 लाख लोगों को बाहर किया गया है उनमें क़रीब 12 लाख हिंदू बंगाली बताए जा रहे हैं। मामला यही से बिगड़ना शुरू हुआ।

इस मुद्दे को लेकर संघ ने सरकार पर दबाव बनाया कि इन 12 लाख हिंदू बंगालियों को NRC से बाहर न किया जाए और इसके लिए नागरिकता संशोधन बिल लाया जाए। 12 दिसंबर को जो CAA (Citizenship Amendment Act) नागरिकता संशोधन बिल पास हुआ वो इसी कारण विशेष को लेकर हुआ।

असम में रहने वाले लोगों को NRC की नई सूची में शामिल होने के लिए सूची A में दिए गए दस्तावेजों में से किसी एक को जमा करना था, इसके साथ ही सूची B में दिए गए दस्तावेजों में से भी कोई एक दिखाना था। इसकी मदद से असम के लोग अपने पूर्वजों से संबंध को पेश कर सकते हैं, इन शर्तों का उद्देश्य यह साबित करना था कि आपके पूर्वज असम के ही रहने वाले थे।

NRC के लिए वांछित की दो प्रकार की दस्तावेज़ सूची दी गयी थी, जो निम्न प्रकार से थी :

1. सूची  ‘A’ दस्तावेज :

यहां 24 मार्च (मध्यरात्रि), 1971 से पहले जारी किए गए उन दस्तावेजों की सूची A है, जिन्हें NRC के तहत नाम रजिस्टर प्राप्त करने के लिए लोगों को दिखाना आवश्यक था। दस्तावेज़ पर प्रार्थी के खुद के नाम और पूर्वज के नाम की आवश्यकता होती है।

1 -1951 NRC (यदि उपलब्ध हो)
2 -इलेक्टोरल रोल (एस) 24 मार्च (मध्यरात्रि), 1971 तक
3 -भूमि और किरायेदारी रिकॉर्ड्स
4 -नागरिकता प्रमाण पत्र
5 -स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र
6 -शरणार्थी पंजीकरण प्रमाण पत्र
7 -कोई सरकार जारी लाइसेंस / प्रमाण पत्र
8 -सरकार। सेवा / रोजगार प्रमाण पत्र
9 -बैंक / डाकघर खाते
10 -जन्म प्रमाणपत्र
11 -बोर्ड / विश्वविद्यालय शैक्षिक प्रमाण पत्र
12 -कोर्ट रिकॉर्ड / प्रक्रिया
13 -विवाह के बाद पलायन करने वाली विवाहित महिलाओं के संबंध में सर्किल अधिकारी / जीपी सचिव प्रमाणपत्र।
14 -राशन कार्ड सहायक दस्तावेजों के रूप में।

2. सूची  ‘B’ दस्तावेज :-

वो आवेदक जिनके पास स्वयं के नाम पर सूची A में मांगे गए दस्तावेज नहीं थे, लेकिन उनके पूर्वज हैं। अर्थात्, पिता या माता या दादा या दादी या परदादा या परदादा (NRC Document List) को उल्लिखित दस्तावेजों को प्रस्तुत करना होगा।

1 – बैंक / एलआईसी / पोस्ट ऑफिस रिकॉर्ड
2 – जन्म प्रमाणपत्र
3 – बोर्ड / विश्वविद्यालय प्रमाण पत्र
4 – विवाहित महिलाओं के मामले में सर्किल अधिकारी / जीपी सचिव प्रमाणपत्र
5 – निर्वाचक नामावली
6 -जमीन का दस्तावेज
7 – राशन पत्रिका
8 – कोई अन्य कानूनी रूप से स्वीकार्य दस्तावेज

 

2. CAA – नागरिकता संशोधन क़ानून क्या है :

नागरिकता अधिनियम क़ानून (Citizen Amendment Act) 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए मोदी सरकार नागरिकता संशोधन बिल लेकर आई है, जानिये इस क़ानून के विशेष बातें :

1. CAA (Citizen Amendment Act) नागरिक संशोधन बिल के कानून का रूप लेने के बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए अल्पसंख्यक हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को नागरिक संशोधन बिल के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी।

2. ऐसे अवैध शरणार्थियों को जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया है, वे भारतीय नागरिकता के लिए सरकार के पास आवेदन करने के अधिकारी हो जायेंगे।

3. इससे पहले नागरिकता क़ानून के अनुसार भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था। इस नए बिल में प्रावधान है कि पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक अगर पांच साल भी भारत में रहे हों तो उन्हें नागरिकता दी जा सकती है।

4. यह भी व्यवस्था की गयी है कि उनके विस्थापन या देश में अवैध निवास को लेकर उन पर पहले से चल रही कोई भी कानूनी कार्रवाई स्थायी नागरिकता के लिए उनकी पात्रता को प्रभावित नहीं करेगी।

5. OIC कार्डधारक यदि शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो उनका कार्ड रद्द करने का अधिकार केंद्र को मिलेगा, पर उनका पक्ष सुना भी जाएगा।

6. CAA (Citizen Amendment Act) नागरिक संशोधन बिल पर सबसे ज़्यादा विरोध इस बात पर हुआ है कि इस बिल की शर्तों के अनुसार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी।

पूर्वोत्तर राज्यों को CAA में छूट :

CAA को पेश करते समय सरकार ने सदन में मणिपुर को इनरलाइन परमिट (ILP) के दायरे में लाने का ऐलान कर दिया है। अब इस तरह पूर्वोत्‍तर के तीन राज्‍य अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और मणिपुर पूरी तरह से नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के दायरे से बाहर हो गए हैं। बाकी के 3 और राज्यों नागालैंड (दीमापुर को छोड़कर जहां ILP लागू नहीं है), मेघालय (शिलॉन्‍ग को छोड़कर) और त्रिपुरा (गैर आदिवासी इलाकों को छोड़कर जो संविधान की छठी अनुसूची में शामिल नहीं हैं) को नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के प्रावधानों से कमोबेश छूट मिली हुई है।

 

3. NPR (National Population Register) – राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर क्या है :

केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि देशभर में 1 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2020 तक असम को छोड़ पूरे देश में की जनगणना रजिस्ट्रर अपडेट होगा। इसी के लिए सरकार ने देश भर में नागरिकों का व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करने को लेकर उसका बेस तैयार करने के लिए सितंबर 2020 तक एक राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण (NPR) पेश करने का निर्णय किया है। भारत के हर नागरिक को इस NPR में पंजीकृत करवाना अनिवार्य है।

मगर ये NRC (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) से अलग होगा, असम को छोड़ कर देश भर में घर घर जाकर गणना करने के लिए सभी लोगों की सूचना एकत्र करने के लिए फील्ड वर्क एक अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2020 तक किया जाएगा। देश में ये NPR पहले चण्डीगढ़ में प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया था और मार्च 2012 में पूरा कर लिया गया था।

NPR सामान्य निवासियों के लिए एक डिजिटल रजिस्टर है। पांच वर्ष या इससे अधिक उम्र वालों के लिए NPR में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। NPR के शिविर से पहले लोगों को KYR फार्म में सभी जानकारी देनी होगी। 2011 की जनगणना में शामिल हर व्यक्ति के घर प्रगणक फार्म लेकर जाएगा। प्रगणक द्वारा बताए गए समय पर लोगों को शिविर में जाना होगा।

शिविर में रजिस्ट्रेशन के बाद एक रसीद दी जाएगी। इसके अंतर्गत हर उस व्यक्ति को शामिल किया जाएगा जो पिछले छह महीने से किसी स्थानीय जगह पर रह रहा है या वह व्यक्ति जो उस इलाके में अगले छह महीने या उससे अधिक के लिए बसना चाहता है।

इसमें 14 डिजिट की रजिस्ट्रेशन संख्या (जो आधार संख्या नहीं है) और 27 अंकों का NPR रसीद नंबर दर्ज होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद कोई व्यक्ति इसमे संशोधन चाहता है तो 96 घंटे के अंदर उसे सूचना देनी होगी। NPR में रजिस्ट्रेशन के बाद व्यक्ति को विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। रसीद नंबर से दी गई वेबसाइट पर पंजीकरण की प्रगति भी जानी जा सकती है।

NPR – राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ :

Know Your Resident (KYR) फार्म के साथ 18 बिंदुओं की सूचना देनी होगी। इसमें नाम, मुखिया से संबंध, पिता का नाम, मां का नाम, पत्‍‌नी का नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, जन्म स्थान, राष्ट्रीयता, सामान्य निवास का वर्तमान पता, रहने की अवधि, स्थायी आवासीय पता, व्यवसाय, शैक्षिक योग्यता, फोटोग्राफ के साथ बायोमीट्रिक पहचान (दसों अंगुलियों के निशान व दोनों आंखों की आइरिस इमेज) शामिल है।

इसके अलावा मतदाता पहचान पत्र संख्या, राशन कार्ड, तहसील, गणना ब्लाक, गांव, वार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड संख्या, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, पैन कार्ड नंबर, पासपोर्ट संख्या, एलपीजी कनेक्शन नंबर, बिजली कनेक्शन संख्या, बैंक खाता संख्या में से कोई भी एक विवरण शिविर में मूल प्रति के जरिए प्रमाणित कराना होगा। किसी व्यक्ति का आधार कार्ड पहले से बना है या आवेदन किया है तो उसे बायोमीट्रिक पहचान दोबारा नहीं देनी होगी लेकिन अन्य जानकारियां देना उनके लिए भी अनिवार्य है।

इसके लिए आवेदन के कई मौके मिलेंगे, क्षेत्रीय स्तर पर दो बार शिविर लगाने की योजना है। पहला शिविर छूटने पर दूसरे में आवेदन किया जा सकता है। इन दोनों शिविर में नामांकन कराने से चूक गए तो उपनगरीय स्तर पर लगने वाले शिविर में अंतिम मौका मिलेगा।

NPR में एकत्रित आंकड़ों को Duplication (दो बार किए आवेदनों की जांच) की जांच के लिए UIDAI को भेजा जाएगा। रजिस्टर डाटा में तीन तत्व जनसांख्यिकी डाटा (नाम, पता आदि), बायोमीट्रिक डाटा और आधार संख्या होगी। इन्ही आंकड़ों के आधार पर व्यक्ति को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। एनपीआर प्रक्रिया के लिए आधार नंबर अलग से बनवाने की जरूरत नहीं है।

NPR होने के बाद सभी नागरिकों को स्मार्ट कार्ड देने का प्रस्ताव है, जो कि आधार कार्ड से अलग होगा, आधार कार्ड व्यक्ति की अपनी पहचान है जबकि स्मार्ट कार्ड व्यक्ति की अपनी पहचान होने के साथ ही निवासी और नागरिकता की पहचान है। स्मार्ट कार्ड के बाद व्यक्ति को दूसरी पहचान की जरूरत नहीं होगी। मगर सूत्रों के अनुसार ये स्मार्ट कार्ड तुरंत नहीं दिए जायेंगे।

इस तरह से देख सकते हैं कि असम में जारी NRC और भावी देशव्यापी NPR में काफी अंतर है, रही बात CAA की तो ये क़ानून राष्ट्रव्यापी NRC के समय अपना रंग दिखा सकता है, अगर केवल CAA को देखेंगे तो मोदी सरकार की इस एक तीर से दो निशाने लगाने की मंशा है।

जैसा कि विदित है कि असम में NRC यानी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर की फ़ाइनल लिस्ट से जिन 19,06,657 लाख लोगों को बाहर किया गया है उनमें क़रीब 12 लाख हिंदू बंगालियों पर नागरिकता छीने जाने का संकट खड़ा हो गया है, सरकार इस CAA को लागू करके उन सभी 12 लाख हिंदू बंगालियों की नागरिकता बहाल कर देगी, मगर इस क़ानून से NRC में बाहर हुए 7 लाख के लगभग मुसलामानों की नागरिकता छिन जाएगी।

जैसा कि पहले भी लिखा है कि इस मुद्दे को लेकर संघ ने सरकार पर दबाव बनाया कि इन 12 लाख हिंदू बंगालियों को NRC से बाहर न किया जाए और इसके लिए नागरिकता संशोधन बिल लाया जाए। 12 दिसंबर को जो CAA (Citizenship Amendment Act) नागरिकता संशोधन बिल पास हुआ वो इसी कारण विशेष को लेकर हुआ था।

अब आगे यदि पूरे देश में NRC लागू होता है (जैसा कि अमित शाह ने अपने बयान में दावा भी किया था) तो ऐसे में इस CAA को काम में लिया जा सकता है, CAA की शर्तें लागू होने की स्थिति में देश में रह रहे मुसलमानों की नागरिकता पर संकट खड़ा होने का खतरा है, सारा बवाल इसी को लेकर है। NRC और CAA का गठबंधन सिर्फ मुसलामनों के लिए नुक़सानदेह ही साबित होगा। क़ानूनविदों के अनुसार भी CAA की प्रस्तावना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।