देश में किसी दंगे या उपद्रव में, मंदिर मस्जिद के झगडे में, यूनिवर्सिटीज में फीस कम करने वाले आंदोलनों में घायल होने या मारे जाने वालों में कभी भी किसी भी नेता के बच्चे का नाम क्यों नहीं आता है, सोचा है कभी ?

आपको हमें, और आपके हमारे बच्चों को आपस में लड़ाने वाले अधिकांश नेताओं के बच्चे देश में पढ़ते ही कहाँ हैं, नेताओं को यहाँ के कालेज और यूनिवर्सिटीज पसंद ही कहाँ हैं, वो तो विदेशों की सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटीज में पढ़ते हैं, ऐसी यूनिवर्सिटीज जिनके दरवाज़े पर जाकर केवल खड़े होने की ही कल्पना एक मध्यमवर्गीय भारतीय बिलकुल भी नहीं कर सकता, वो जिन यूनिवर्सिटीज में पढ़ते हैं वहां से पढाई करने के बाद विदेशों में उनके लिए वैसी ही शानदार नौकरियां भी मिलती हैं।

विश्व में सबसे ज़्याद बेरोज़गारों का देश घोषित होने वाला भारत 45 साल की सबसे बड़ी बेरोज़गारी झेल रहा है, हर साल करोड़ों नौकरियां खत्म हो रही हैं, आज की ही खबर है कि कार पार्किंग अटेंडेंट की पोस्ट के लिए 700 इंजीनियर और MBA किये हुए युवाओं ने आवेदन किया है, जबकि इसके लिए योग्यता 10 वीं पास थी, इससे देश की भीषण बेरोज़गारी का अंदाज़ा लगा सकते हैं।

मोदी राज में देश के कालेजों और यूनिवर्सिटीज में लगातार फीस बढ़ाये जाने के कारण शिक्षा दिन ब दिन महँगी होती जा रही है, पिछले महीनों JNU में स्टूडेंट्स फीस कम कराने के लिए जारी आंदोलन के चलते वहां ABVP के लोगों ने मारपीट की थी, हंगामा हुआ था।

मगर देश की दशा, दिशा और नीति निर्धारण करने वाले नेताओं को इन सबसे कोई मतलब नहीं है, वैसे भी नेताओं के बच्चे प्रारंभिक शिक्षा से लेकर स्कूली और कालेज स्तर की शिक्षा महंगे स्कूल कालेजों में कराते आये हैं। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए ये नेता अपने बच्चों को दुनिया की महँगी और सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटीज में भेजते हैं।

The Print ने इसी विषय पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें बताया गया है कि मोदी सरकार के 56 मंत्रियों में से 12 ने अपने बच्चों को विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए भेजा हुआ है।

द प्रिंट के अनुसार मोदी सरकार के मंत्रियों को अपने बच्चों के लिए ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटीज पसंद है न कि IIT, IIM, इन मंत्रियों में राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, एस जयशंकर, रविशंकर प्रसाद शामिल हैं।

रेल और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की बेटी राधिका ने मई 2019 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की, जबकि उनके बेटे ध्रुव ने भी वहीँ से अर्थशास्त्र में BA किया है और अब MBA कर रहे हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के बेटे अपूर्व ने बोस्टन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में PhD पूरी की है।

कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के तीनों प्रमुख मंत्रियों – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस। जयशंकर के बच्चों को विदेशी विश्वविद्यालयों से डिग्री मिली है।

सिंह के छोटे बेटे, नीरज ने ब्रिटैन में लीड्स विश्वविद्यालय से MBA पूरा किया, जबकि सीतारमण की बेटी वांगमयी परकला ने मंत्रियों के कार्यालयों में कर्मचारियों के अनुसार, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी की।

जयशंकर के बेटे ध्रुव ने यूएस ‘जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से MA पूरा किया और बेटी मेधा ने डेनिसन यूनिवर्सिटी से सिनेमा में BA किया ।

हालांकि, इन तीनों मंत्रियों ने भारतीय विश्वविद्यालयों से अपनी डिग्री हासिल की।

सिंह ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी किया, जबकि जयशंकर और सीतारमण दोनों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की।

भारत में कानून की प्रैक्टिस करने वाले कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के बेटे आदित्य शंकर ने अपना एलएलएम कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से किया, जबकि स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के छोटे बेटे सचिन ने आस्ट्रेलिया के मेलबर्न की मोनाश यूनिवर्सिटी से फाइनेंस और अकाउंटेंसी का कोर्स किया है ।

खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल की बेटी ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है और अब वह पारिवारिक व्यवसाय देख रही है। उसकी बेटी का नाम पता नहीं चल सका है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की बेटी सुहासिनी, जो पेशे से निशानेबाज हैं, ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से लीडरशिप में अपना एडवांस डिप्लोमा पाठ्यक्रम पूरा किया है।

राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह (उत्तर पूर्वी क्षेत्र का विकास) के बेटे अरुणोदय ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से आर्थिक विकास में सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया है।

संचार राज्य मंत्री संजय धोत्रे के बेटे नकुल ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी तिलोत्तमा ने वारविक यूनिवर्सिटी से BA किया और उसके बाद यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) से LLM किया। वह अब अमेरिका में बस गई है।

भाजपा के एक मंत्री ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि “ऐसा नहीं है कि भारतीय शिक्षा का स्टैण्डर्ड सही नहीं है या गिरा हुआ है, लेकिन अगर किसी के बच्चों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलता है, तो हर कोई वहीँ से अपनी शिक्षा पूरी करना पसंद करेगा।”

काश इन नेताओं द्वारा मंदिर-मस्जिद, हिन्दू-मुस्लिम के झगड़ों और राष्ट्रवाद की अफीम चटाकर हाँके हुई देश की युवा पीढ़ी दो पल ठहर कर ये सोचे कि दिन रात मेक इन इंडिया, स्वदेशी, भारतीयता, राष्ट्रीयता का ढोल बजाने वाले ये नेता इन सबका कितना अनुसरण कर रहे हैं अपने घरों से इसकी शुरुआत कर रहे हैं या नहीं तो इनकी आँखों से पर्दा हटेगा और इन्हे ठगे जाने का भान होगा।