दक्षिण भारत का एक ऐसा मंदिर जहां प्रसाद में मटन और चिकन ‘बिरयानी’ मिलती है।

दक्षिण भारत का एक ऐसा मंदिर जहां  प्रसाद में मटन और चिकन ‘बिरयानी’ मिलती है।
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तमिलनाडु के मदुरै जिले में तिरूमंगलम में स्थित वाड़ाक्कमपट्टी में स्थित एक मंदिर के बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे, जहां भक्तों को गरमा-गरम मटन और चिकन बिरयानी प्रसाद के रूप में परोसी जाती है।

The Hindu के अनुसार इस मंदिर का नाम मूनियाननदी स्वामी मंदिर है जहां साल में एक बार तीन दिनों के लिए एक वार्षिक महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में पिछले 83 सालों से प्रसाद के रूप में मटन और चिकन बिरयानी बांटी जा रही है। इस साल भी 25 जनवरी से इस महोत्सव का आयोजन किया गया है।

3 दिवसीय वार्षिक महोत्सव में लगभग 2 हजार किलो बिरयानी तैयार की जाएगी। बिरयानी बनाने के लिए लगभग 1000 किलो चावल, 250 बकरे 300 मुर्गियों का उपयोग किया जाता है। न केवल भक्तों को बल्कि यहां से गुजरने वाले हर एक व्यक्ति को बिरयानी खाने को दिया जाता है।

इस मंदिर की यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि 83 सालों से ज्यादा समय से यहां के लोग पूरे श्रद्धा-भाव के साथ परंपरा का पालन कर रहे हैं, पिछले साल 1800 किलो बिरयानी बनाने के लिए 200 बकरों और 250 मुर्गों की बलि दी गई थी, खास बात है कि यह बिरयानी सिर्फ मंदिर आने वाले भक्तों को नहीं, बल्कि वडक्कमपट्टी आने वाले किसी भी व्यक्ति को पूरी श्रद्धा के साथ खिलाया जाता है।

एक अनुयायी ने बताया कि हम ही बिरयानी को 50 से ज्यादा बड़े-बड़े बर्तनों में तैयार करते हैं, बिरयानी बनाने का काम देर रात से शुरू होता है और सुबह चार बजे तक बिरयानी बन जाती है। इसके बाद सुबह 5 बजे से बिरयानी बांटी जाती है।

देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले भक्तों के लिए प्रसाद के रूप में बनाई जाने वाली बिरयानी को पकाने में हजार किलो चावल के अलावा बकरे और मुर्गे की बलि दी जाती है।

वडक्कमपट्टी में लगभग हर कोई बिरयानी का फैन है, यहीं से 70 और 80 के दशक में मदुरई श्री मुनियंडी विलास की लोकप्रिय रेस्त्रां श्रृंखला की शुरुआत हुई थी, इस समय इसके पूरे दक्षिण भारत में 1,000 से अधिक आउटलेट हैं।

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