दुनिया सहित भारत में अब सार्वजानिक स्थानों, बसों, ट्रेनों और हवाई यात्रा के लिए वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जा चुका है, ऐसे में कई स्थानों पर वैक्सीन के दोनों डोज़ के सर्टिफिकेट्स मोबाइल से निकालने में या उसकी हार्ड कॉपी तलाशने में समय खराब हो जाता है।

इसका आसान हल मलप्पुरम (कोझिकोड) निवासी दो भाइयों यू फैज़ल और यू इरशाद ने निकाल लिया है। उन्हें वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट टी शर्ट पर छापने का आईडिया आया। कोरोना महामारी से लगभग बंद पड़ी उनकी इम्पीरियल प्रिंटिंग प्रेस पर उन्होंने एक टी शर्ट पर आगे और पीछे दोनों डोज़ के वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट छाप कर उसे व्हाट्सएप स्टेटस पर डाल दिया। उसी दिन उन्हें टी-शर्ट के लिए 50 से 60 ऑर्डर मिल गए।

46 वर्षीय फैजल ने कहा, “जब से प्रिंटिंग प्रेस कारोबार के लिए खुली, तब से मेरे पास ऑर्डर की बाढ़ आ गई है।” जो लोग वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट टी-शर्ट प्रिंट कराना चाहते हैं, उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से पीडीएफ फॉर्मेट में अपना वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भेजना होगा।

तिरुपुर से थोक में खरीदी गई हल्के रंग की टी-शर्ट का उपयोग प्रमाण पत्र छापने के लिए किया जाता है। ग्राहक सफेद, हल्के पीले, नीले, नारंगी या हरे रंग की टी-शर्ट में से चुन सकते हैं और टी-शर्ट के आगे, पीछे या आस्तीन पर टीके प्रिंट करवा सकते हैं।

उनका कहना है कि प्रत्येक टी-शर्ट की कीमत ₹250 है और ये कई रंगों में उपलब्ध है। ₹250 केरल के भीतर कूरियर चार्ज ₹60 है जबकि राज्य के बाहर ₹100 है। वो इस बात की भी गारंटी देते हैं कि धोने या सुखाने पर प्रिंट नहीं जाएगा।

वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट टी-शर्ट लोकप्रिय हो जाने के बाद दोनों भाइयों ने सम्बंधित विभाग के अधिकारियों के साथ इस विचार को साझा किया और उनसे पूछा कि कहीं वो दोनों इन वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट टी-शर्ट प्रिंट करते समय कोई कानून नहीं तोड़ रहे हैं ? अधिकारियों ने इस विचार की सराहना की और उन्हें प्रोत्साहित किया।

हालांकि, ऐसा करने वाले ये दोनों भाई पहले व्यक्ति नहीं हैं, कॉमेडियन अतुल खत्री ने 9 अगस्त 2021 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो और तस्वीर साझा की थी, जिसमें उन्हें वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट टी-शर्ट पहने हुए दिखाया गया था, जिस पर वैक्सीन का सर्टिफिकेट छपा हुआ था। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था कि काम और यात्रायें करना पड़ती हैं और हवाई अड्डों, होटलों आदि पर अपना वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट दिखाकर थक गया था इसलिए ये आईडिया अपनाना पड़ा है।

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