हम कल्पना भी नहीं कर सकते कि भारत के किसी राज्य में 30,000 प्रदर्शनकारी इकठ्ठे होकर Bye Bye India जैसे भारत विरोधी नारे लगाएं और दुश्मन देश चीन को Hello China कहे, देश के प्रधानमंत्री के पुतले जलाये, गणतंत्र दिवस के बहिष्कार का आह्वान करे ? मगर ये सच है।

Indian Express के अनुसार मिजोरम में (MZP) मिजो जिरलई पाअल या मिजो छात्र संगठन, यंग मिज़ो असोसिएशन (YMA) के बैनर तले नागरिकता (संशोधन) विधेयक – 2016 के खिलाफ बुधवार को मिजोरम में विभिन्न जगहों पर हजारों लोग प्रदर्शन के लिए निकले।

इसके साथ ही सात जिला मुख्यालयों और 50 अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पुतले जलाए।

हाथों में Hello China और Bye Bye India तख्तियां लिए हुए नारेबाजी करते हुए 30,000 प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग की और आरोप लगाया कि विवादास्पद विधेयक से मिजो लोगों के अस्तित्व को खतरा होगा।

कई बड़े छात्र नेताओं ने इसके खिलाफ हथियार उठाने तक कि चेतावनी दे डाली है, साथ ही कल (MZP) मिजो जिरलई पाअल या मिजो छात्र संगठन और यंग मिज़ो असोसिएशन (YMA) ने गणतंत्र दिवस के बहिष्कार का भी आह्वान किया है।

मिजोरम में कल 30,000 लोगों ने एक विरोध प्रदर्शन में ये सब किया है। ये सब देश विरोधी हरकतें उस स्वयंभू राष्ट्रवादी सरकार के कार्यकाल में हुई हैं जहाँ एक अभिनेता नसरुद्दीन शाह देश के माहौल पर अपनी राय देकर कुछ कहता है तो उसे देशद्रोही बताकर पाकिस्तान भेजने का राष्ट्रवादी फरमान जारी हो जाता है, और उन्हें पाकिस्तान का टिकट भेज दिया जाता है।

जहाँ राष्ट्रगान पर खड़े न होने पर दिव्यांगों तक की पिटाई कर दी जाती है, वंदेमातरम न गाने वाले को देशद्रोही घोषित कर दिया जाता है, पत्थर बाज़ों पर पैलेट गन इस्तेमाल की जाती है, उन्हें आतंकी तक घोषित किया जाता है, फ़ारुक़ डार को ह्यूमन शील्ड बनाकर जीप पर बांधकर शहर में घुमाया जाता है, सरकार से असहमतों को पाकिस्तान परस्त घोषित कर पाकिस्तान भेजने का आह्वान किया जाता है।

राहुल गाँधी के चीन के मंत्रियों से मिलने पर एक दलाल चैनल पूरा एक प्रोग्राम करके इस मीटिंग की वजह पर एक घंटे तक चीखता है।

अब कहाँ गया इन छद्म राष्ट्रवादियों का राष्ट्रवाद या देश प्रेम, जाइये मिजोरम और इन 30,000 प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही घोषित कीजिये या इनमें से किसी छात्र नेता को पकड़ कर ह्यूमन शील्ड बनाकर जीप पर बांधकर शहर में घुमाकर बताइये, ये इन 30,000 प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन इस्तेमाल करिये।

ये फिर गोदी मीडिया जो सुपारी लेकर दिन रात हिन्दू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद के नाम पर प्रायोजित वैचारिक आतंकवाद परोस रही है, और या फिर राष्ट्रवाद के नाम पर नथुने फुलाकर मुंह से झाग निकालते एंकर्स में है हिम्मत कि इतने बड़े राष्ट्रविरोधी आंदोलन का DNA करने की हिम्मत दिखाए ?

नहीं बिलकुल भी नहीं है इसकी वजह है कि ये राष्ट्रवादी है ही नहीं ये व्यक्ति वादी गुलाम हैं, सुपारी पर काम करने वाले, टाई सूट में स्मार्ट फ़ोन्स और माइक लिए स्टूडियोज़ में बैठे ये बौद्धिक आतंकी हैं जिन्हे देश से रत्ती भर भी लगाव नहीं है, निष्पक्ष्ता नहीं है, ऐसे समय जब एक राज्य में इतना बड़ा देशविरोधी आंदोलन चरम पर है, यदि इन दलों के मुंह नहीं खुल रहे तो सोच लीजिये कि ये किसके गुलाम हैं, और इनके मुंह किसके कहने से कब और क्यों खुलते हैं।

और हाँ …. अगर मिजोरम में तीस हज़ार छोड़िये अगर 300 मुस्लमान भी मिलकर इस तरह की हरकत कर डालते तो शायद इनमें से दस बीस तो अभी तक पुलिस गोली से मार दिए गए होते, कड़वा है मगर सच भी यही है।

इसलिए तुम्हारे इस छद्म राष्ट्रवाद की बत्ती बनाकर कान साफ़ करके सुनो, तुम्हारा इस छद्म राष्ट्रवाद का ये नफरती रेपर कभी का फट चुका है और उसके अंदर का ज़हर साफ़ नज़र आ रहा है, इसलिए कभी किसी को पाकिस्तान भेजने का आह्वान करो तो एक मिनट रुक कर एमपी के उस पाकिस्तानी दलाल भाजपा आईटी सेल के संयोजक ध्रुव सक्सेना को याद कर लेना जो भाड़े पर पाकिस्तना को देश की सेना की ख़ुफ़िया सूचनाएँ देता था, या फिर भारत को बाय बाय और चाइना को हेलो चाइना कहती 30,000 प्रदर्शनकारियों की ये देशद्रोही भीड़ याद कर लेना।

जय हिन्द !!