इन दिनों भारत में और खासकर सोशल मीडिया में MeToo की धूम मची हुई है, एक के बाद एक बड़े दिग्गजों के नाम सामने आ रहे हैं, इसकी बदौलत देश का सियासी पारा तक चढ़ गया है, जानिये इस मीटू केम्पेन के बारे में।

आज से बारह साल पहले यानी 2006 में इस MeToo शब्द का उपयोग हुआ था, इस की शुरुआत अमेरिका की सामाजिक कार्यकर्ता तराना बर्के ने की थी, उन्होंने सबसे पहले अमेरिका के फेमस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘मायस्पेस’ पर ‘Me Too’ नाम के इस शब्द को दुनिया के सामने रखा था।

दरअसल, बर्के ने उन महिलाओं ( विशेषकर वंचित समुदायों) के लिए ‘सहानुभूति के माध्यम से सशक्तिकरण’ (Empowerment Through Empathy) नाम से एक अभियान की शुरुआत की थी, जिनके साथ कभी यौन उत्पीड़न हुआ हो। बर्के ने Me Too नाम की एक डॉक्युमेंट्री फिल्म भी बनाई थी, बर्के को जब एक 13 साल की बच्ची ने बताया कि वो भी यौन उत्पीड़न का शिकार है. जिसके बाद बर्के ने उस बच्ची से कहा था “Me Too”।

महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने वाली तराना बर्के को भी काफी सालों तक यौन उत्पीड़न सहना पड़ा था, बर्के ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वो 6 साल की थीं तो उनके साथ पड़ोस के एक लड़के ने रेप किया था, वो लड़का उनका काफी सालों तक यौन शोषण करता रहा। तराना बर्के का ये केम्पेन ‘मायस्पेस’ से आगे न बढ़ पाया, मगर दुनिया इस “Me Too” से परिचित हो चुकी थी।

वर्तमान सोशल मीडिया में इस #MeToo शब्द से दुनिया को चौंकाने का काम किया मशहूर हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने, उन्होंने बताया कि हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे विंस्टीन ने उनका रेप किया था। मिलानो ने अपने ट्विटर अकाउंट पर 15 अक्टूबर 2017 को एक टवीट  किया था, इस टवीट में उन्होंने लिखा, ”अगर आप भी कभी यौन शौषण या किसी हमले का शिकार हुए हैं तो मेरे टवीट पर #MeToo के साथ रिप्लाई करें। ”

एलिसा के टवीट के बाद ही सोशल मीडिया पर महिलाओं ने अपने साथ हुए सेक्सुअल असॉल्ट के बारे में बताना शुरू किया। हार्वे विंस्टीन पर मिलानो के आरोप लगाने के बाद कई और अभिनेत्रियों ने इस प्रोड्यूसर पर यौन शोषण के आरोप लगाए. इसमें एंजेलिना जोली, हेदर ग्राहम और एश्ले जद भी थीं।

यहां तक कि इस मुहिम में फेमस सिंगर जेनिफर लोपेज ने भी अपना किस्सा बताया. उन्होंने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें एक फिल्म के डायरेक्टर ने अर्धनग्न होने को कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया था।

इंटरनेट पर मानो ऐसी आप बीती कहानियों का सैलाब आ गया. दुनिया के कोने कोने से महिलाएं अपने दिल के अंधेरे कोने में छिपी पड़ी ऐसी कहानियों को निकाल कर सोशल मीडिया के उजाले में ले आईं। देखते ही देखते यह ट्रैंड इतना तेज हो गया कि पिछले साल दिसंबर और इस साल जनवरी के आतेआते हर मिनट में ऐसी औसतन 10 कहानियां इंटरनेट पर प्रेषित की जाने लगीं।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि #MeToo को दुनिया भर में एलिसा मिलानो ही चर्चा में लाईं,एक अनुमान है कि अभी तक 2 करोड़ से ज्यादा महिलाओं ने जीवन में अपने साथ हुए यौन शोषण की त्रासदी को इंटरनेट पर डाला है, यौन शोषण पर #MeToo एक ऐसी मुहिम है जिसने पूरी दुनिया की महिलाओं को ना केवल यौन शोषण के खिलाफ बोलने की हिम्मत दी है, बल्कि उन्हें एक मंच पर भी खड़ा किया है।

हालांकि इस अभियान को कुछ लोगों ने एक प्रयोजित अभियान भी बताया और यह भी कहा कि इस से महिलाएं ताकतवर नहीं, बल्कि कमजोर होती हैं। बावजूद इस के इस अभियान को रोका नहीं जा सका और यह भी कहा जा सकता है कि इस अभियान में दुनिया भर की महिलाओं को बहुत सजग बनाया है।

एक तरह से इस अभियान का फायदा यौन शिक्षा और सजगताके रूप में भी मिला है. इस अभियान के बाद दुनिया के तमाम देशों के स्कूलों में विशेष रूप से लड़कियों के लिए यौनशिक्षा देना शुरू किया गया, साथ ही इन कहानियों से पुरुष भी महिलाओं के प्रति पहले से कहीं ज्यादा सहयोगी और ईमानदार हुए हैं।

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