2014 के जून – जुलाई से उठाकर देख लीजिये घर वापसी, लव जिहाद, बीफ बैन, लाउड स्पीकर बैन, मदरसों में कैमरे, गौरक्षकों द्वारा घेर कर मार डालना, तीन तलाक़ और हलाला जैसे मुद्दों पर ही भाजपा समर्थित हिन्दूवादी संगठनों और सरकार का पूरा ज़ोर रहा है।

दादरी के अख़लाक़ की मौत से शुरू हुआ गौरक्षा के बहाने मुसलामनों के क़त्ले आम का सिलसिला लगातार जारी है, अलवर में अकबर खान का क़त्ल और अलवर में हुई मॉब लिंचिंग इसका ताज़ा उदाहरण है।

आखिर इस देश के मुसलमानों ने किसी का क्या बिगाड़ा है ? देश की आबादी का केवल 14 प्रतिशत हिस्से से ही इतना खौफ और नफरत की वजह तो बताओ भाई।

मुसलमानों का वो 14 प्रतिशत हिस्सा जिसे हर सरकार ने ठगा और दोहन किया है, जिनके लिए मुसलमान मात्र वोटर लिस्ट में मौजूद संख्या से ज़्यादा कुछ नहीं, वो 14 प्रतिशत हिस्सा जो अपनी रोज़ी रोटी के लिए, तालीम के लिए जद्दो जहद करने में मसरूफ है, वो हिस्सा जिसके कल्याण के लिए योजनाएं तो बनी मगर अमल में नहीं लाई गयीं, सच्चर कमेटी की रिपोर्ट हो या फिर श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट सभी डस्ट बिन में डाल दी गयीं।

वो 14 प्रतिशत हिस्सा जो अपने ही दम पर देश की मुख्य धारा में आने के लिए हर चंद कोशिश कर रहा है, वो 14 प्रतिशत हिस्सा जिसके माथे पर पंचर जोड़ने वाला शब्द चिपका दिया है, वो 14 प्रतिशत हिस्सा जिसकी हिस्सेदारी भारतीय पुलिस सेवा में 4 प्रतिशत, प्रशासनिक सेवा में 3 फीसदी और विदेश सेवा में मात्र 1.8 प्रतिशत हैं, यही नहीं देश के सबसे बड़े नियोक्ता के तौर पर मशहूर रेलवे के कुल कर्मचारियों में से सिर्फ 4.5 फीसदी है।

ऐसे में मुसलमानों से तकलीफ क्यों और किसलिए ? काला धन लेकर स्विस बैंकों में तो मुसलमानों ने पैसा जमा नहीं कराया, माल्या, नीरव मोदी या मेहुल चौकसी की तरह घोटाले कर विदेशी नागरिकताएँ तो नहीं लीं, या फिर उन्होंने तुम्हारी जायदादें तो नहीं दबायीं, तुम्हारी नौकरियां तो नहीं छीनी ?

देश की आर्थिक रीढ़ तोड़ने वाले, अर्थ व्यवस्था और बैंकों को हज़ारों करोड़ का चूना लगाकर विदेश भागने वाले कितने मुसलमान हैं, बताइये ?

विदेश मंत्रालय ने 4 अगस्त 2018 को ही देश के वांछित 28 बड़े आर्थिक अपराधियों की LIST जारी की है, इसमें मुसलमान नाम ढूंढकर दिखाईये तो ज़रा : –

Pushpesh Baid
Ashish Jobanputra
Vijay Mallya
Sunny Kalra
Sanjay Kalra
Sudhir Kumar Kalra
Aarti Kalra
Varsha Kalra
Jatin Mehta
Umesh Parekh
Kamlesh Parekh
Nilesh Parekh
Eklavya Garg
Vinay Mittal
Chetan Jayantilal Sandesara
Nitin Jayantilal Sandesara
Diptiben Chetankumar Sandesara
Nirav Modi
Neeshal Modi
Mehul Choksi
Sabya Seth
Rajiv Goyal
Alka Goyal
Lalit Modi
Ritesh Jain
Hitesh Narendrabhai Patel
Mayuriben Patel
Priti Ashish Jobanputra

तुम्हारे पास इस नफरत की शायद सिर्फ एक ही वजह है जो एक प्रोपगंडे के तहत परोसी गयी है, वो है मुसलमान का आतंकी या जेहादी होना, आप ISIS का उदाहरण देंगे, IM का देंगे, लश्कर का देंगे, कश्मीर के पत्थर बाज़ों का देंगे।

ISIS की बात करते हैं, अगर इस संगठन के मूल में जाओगे तो पता चल जायेगा कि इसने किसके गर्भ से जन्म लिया, और क्यों लिया, बताइये ज़रा कि ISIS ने कितने हिन्दू भाई मारे ? इस संगठन ने सबसे ज़्यादा क़त्ल मुसलमानों का ही किया है, पढ़ सकते हो तो पढ़िए कि IM की उत्पत्ति किसलिए की गयी थी और इसमें आरोपी बनाये गए लोग दस पंद्रह सालों बाद क्यों बरी हुए ज़रा सोचिये।

फिर से बात करते हैं सबसे बड़े आतंकी संगठन ISIS की तो बताइये कि भारत के 19 करोड़ के लगभग आबादी से कितने मुसलमान इस संगठन में जाकर भर्ती हुए या लड़े ?

इंडोनेशिया के बाद विश्व की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में रहती है, जिस हिसाब से विश्व के देशों से ISIS में भर्ती होने की लहर चली थी उस हिसाब से तो उस संगठन में भारत के मुसलमानों का सबसे बड़ा प्रतिशत होना चाहिए था, मगर बिलकुल नहीं है, लाख कोशिशों के बाद भी आप दहाई की संख्या भी पार नहीं कर पाएंगे।

इसकी वजह ? इसकी वजह साफ़ है कि भारत के मुसलमानों में और आइसिस टाइप मुसलमानों में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है, सरकारों की बेरुखी और अपनी कैसी भी हालत के बावजूद देश का मुसलमान मुल्क से गद्दारी नहीं कर सकता, यही वजह है कि यहाँ बार बार मुसलमानों ने आइसिस के खिलाफ सड़कों पर एकजुट होकर प्रदर्शन किये हैं। अख़बारों के या वेब साइट्स के पन्ने पलट कर देख सकते हैं।

ये वही तुम्हारे अनुसार पत्थरबाजों का कश्मीर है जहाँ से शाह फैसल, अतहर आमिर, फ़ज़लुल हसीब जैसे लोगों ने सिविल सेवा आदि परीक्षाओं में टॉप में नाम दर्ज कराया था, ये इस देश के वही मुसलमान है जिसे सुविधाएँ मिलें तो वो अब्दुल कलाम बन कर खड़े हो सकते हैं, देश के लिए जवान औरंगज़ेब की तरह जान क़ुर्बान कर सकते हैं।

कभी सोचा है कि इन चार सालों में सैंकड़ों बार मुसलमानों को उकसाने के बावजूद वो आपे से बाहर क्यों नहीं हुआ ? दादरी के अख़लाक़ की बीभत्स हत्या से लेकर क़ासिम की हत्या और अकबर खान की हत्या तक, मस्जिदों के सामने त्रिशूल भाले लेकर नारे लगाने के बावजूद, किसी भी मुसलमान को पकड़ कर धार्मिक नारे लगाने के वीडियो शेयर करने के बावजूद, खांडसा मंडी के पास मुस्लिम युवक जफरूद्दीन को पाकिस्तानी कहकर उससे मारपीट करने और दाढ़ी काटने के बावजूद भी मुसलमान खामोश क्यों है ?

वो अमन और शांति चाहता है उसे देश के संविधान और क़ानून व्यवस्था पर पूरा यक़ीन है, वो जानता है कि उसे बार बार क्यों उकसाया जा रहा है, उसकी प्राथमिकता मुल्क में अमन और सौहार्द बनाये रखना है, हज़ार चोटों के बावजूद सेक्युलरिज़्म का झंडा थामकर खड़े रहना है चाहे सरकार कोई भी आये या जाए।

इसलिए सात दशक से विरासत में मिली इस सांझी संस्कृति को दीमक की तरह चाटने से तुम्हारा क्षणिक फायदा ज़रूर हो सकता है, तुम अपनी कुटिलताओं, दुष्प्रचार और प्रोपगंडे से कुछ दिनों, महीनों और सालों के लिए भले ही हैरान परेशान कर सकते हो मगर इस विशाल देश की विरासत के धागों को तोड़ नहीं सकते।=

बहुत मज़बूत जोड़ है, ये आपस में बहुत ही गुंथा हुआ है, हमारे पुरखों ने इसे सहेजा है और हमें विरासत के तौर पर इसे आगे बढ़ाना है, सियासत द्वारा प्रायोजित ये नफरत थूकिये कभी हमें दीपावली पर बुला कर देखिये और कभी हमारे घर गले मिलकर सेवइयां खाने आइये, उसके बाद शायद फिर आप कभी हम एक दूसरे से शिकायत करते नज़र ही न आएं।

चाहे हिन्दू हो, मुस्लिम हो, सिख ईसाई हो सभी अपनी नेक्स्ट जनरेशन को बेहतर हिंदुस्तान देना चाहते हैं, न कि नफरत में उबलता, जलता बदहाल हिंदुस्तान।

हम ‘हिन्दुस्तानियों’ को हिन्दू – मुस्लिम में बांटने वाली इसी सियासत पर मुनव्वर राना साहब के ये अशआर पेश हैं :-

डरा -धमका के तुम हमसे वफ़ा करने को कहते हो
कहीं तलवार से भी पाँव का काँटा निकलता है ?

फ़ज़ा में घोल दीं हैं नफ़रतें अहले-सियासत ने,
मगर पानी कुएँ से आज तक मीठा निकलता है।

जिसे भी जुर्मे-ग़द्दारी में तुम सब क़त्ल करते हो,
उसी की जेब से क्यों मुल्क का झंडा निकलता है ??

सोचियेगा ज़रूर।।