नोटबंदी के बाद देश में बढ़ी बेरोज़गारी पर NSC की रिपोर्ट जारी न करने पर दो सदस्यों का इस्तीफ़ा।

नोटबंदी के बाद देश में बढ़ी बेरोज़गारी पर NSC की रिपोर्ट जारी न करने पर दो सदस्यों का इस्तीफ़ा।
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बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि मोदी सरकार ने बेरोज़गारी के आंकड़े जारी करने से परहेज़ किया है, और साथ ही किसानों की मौतों के आंकड़ें भी 2016 और 2017 के बाद जारी नहीं किये हैं।

रोजगारी और बेरोजगारी पर आधारित रिपोर्ट के तैयार होने के बाद भी मोदी सरकार द्वारा इसे जारी न करने के विरोध में एक संस्थान National Statistical Commission (NSC) राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों ने 28 जनवरी 2019 को अपने अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है।

Indian Express के अनुसार नेशनल सैम्पल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (NSSO) की तरफ से बनाई गई रोजगारी और बेरोजगारी पर आधारित रिपोर्ट के तैयार होने के बाद भी मोदी सरकार ने इसे जारी नहीं किया है, इसके विरोध में NSC के कार्यकारी अध्यक्ष पी।सी मोहनन और सदस्य जे।वी मीनाक्षी ने सोमवार को अपना इस्तीफ़ा सरकार को भेज दिया।

NSC 2006 में गठित एक स्वायत्त शासी संसथान है। यह देश की सांख्यिकी सिस्टम के कामकाज की निगरानी और समीक्षा करने का काम करता है, इन दोनों के इस्तीफे के दो मुख्य कारण बताये जा रहे हैं। पहला : नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) के 2017-18 के रोजगार सर्वेक्षण को जारी करने में हो रही देरी और दूसरा : बीते साल आए बैक सीरीज GDP डेटा को जारी करने से पहले आयोग की सलाह न लेना।

इससे पहले श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा लेबर ब्यूरो द्वारा किए गए वार्षिक घरेलू सर्वेक्षण 2016-17 को आवश्यक मंजूरियां मिलने के बावजूद जारी होने से रोक दिया गया था,पिछले दिनों रोजगार पर लेबर ब्यूरो के सर्वे में खुलासा हुआ था कि बेरोजगारी ने पिछले 4 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है, नौकरियों पर नोटबंदी का बुरा असर दिखा है, ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम सेक्टर, एयरलाइंस, कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टर में छंटनी हुई है।

अब आते हैं किसानों की मौतों के आंकड़ों को छुपाये जाने पर, दिसंबर को NDTV में इस बाबत खबर प्रकाशित हुई थी कि किसानों की मौतों के आंकड़े जारी करने वाले संसथान National Crime Records Bureau (NCRB) राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने 2016 और 2017 के किसानों की आत्महत्या के आंकड़े ही जारी नहीं किए हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो हर साल इस डेटा को भारत में दुर्घटनाओं में मौत और आत्महत्या नाम की वार्षिक रिपोर्ट में प्रकाशित करता है।

जब दिसंबर 2018 में तृणमूल कांग्रेस के सांसद दिनेश त्रिवेदी ने 2016 से 2018 तक आत्महत्या करने वाले किसानों के बारे में सरकार से सवाल पूछा तो सरकार की ओर से कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने संसद को बताया था कि ऐसे आंकड़े नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो(NCRB) रखता है। मगर, NCRB ने 2016 से ऐसे आंकड़े जारी ही नहीं किए हैं।

अपनी उपलब्धियों और मार्केटिंग पर 5245।73 करोड़ रूपये खर्च करने वाली मोदी सरकार बेरोज़गारी के विकराल आंकड़ों और प्रतिवर्ष हज़ारों की संख्या में मरते किसानों के आंकड़ें जनता तक नहीं पहुँचने देना चाहती है।

(NSC) राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष पीसी मोहनन और सदस्य जेवी मीनाक्षी के इस्तीफे चीख चीख कर मोदी सरकार की नियत पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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