ये जो फोटो आप देख रहे हैं जम्मू कश्मीर पुलिस के उन जवानों के हैं जो 1 मार्च को हंदवाड़ा में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए हैं इनके नाम हैं सीनियर कांस्‍टेबल नसीर अहमद कोहली और गुलाम मुस्‍तफा।

जो लोग कश्मीरियों को आतंकी कहते हैं, शहादतों पर सियासत करते हैं, हिन्दू मुस्लिम करते हैं या मुसलमानों से दुराग्रह रखते हैं ये फोटो और इनकी शहादतें उन सांप्रदायिक ज़ोम्बियों के मुंह पर तमाचा है।

इस फोटो को खुद जम्मू जोन पुलिस ने टवीट कर श्रद्धांजलि अर्पित की है, इन दोनों पुलिस कर्मियों के साथ दो CRPF के जवान इंस्‍पेक्‍टर पिंटू और कैप्‍टन विनोद भी शहीद हुए हैं। इन चारों बहादुरों की शहादत को दिल से सलाम।

News 18 के अनुसार, जिला कुपवाड़ा के अंतर्गत बाबगुंड गांव में आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर वीरवार की रात आठ बजे के करीब सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर ली। सुरक्षाबलों ने गांव में आने जाने के सभी रास्ते बंद करते हुए आतंकियों के संभावित ठिकाने का पता लगाने के लिए घर घर तलाशी शुरु की।

आधी रात के बाद करीब एक बजे सुरक्षाबल जब गांव के भीतरी हिस्से में आगे बढ़ रहे थे तो अचानक एक मकान में छिपे आतंकियों ने उन पर फायरिंग कर दी। जवानों ने खुद को बचाते हुए जवाबी फायर किया। इसके बाद वहां मुठभेड़ श़ुरु हो गई।

आंकड़ों के अनुसार 1990 से लेकर दिसंबर 2018 तक 500 स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (SPO) 1,038 पुलिस कर्मी, 131 ग्रामीण सुरक्षा कमेटी मेंबर्स यानी कुल 1,669 अपनी ड्यूटी करते हुए आतंकियों द्वारा शहीद कर दिए गए , इन आतंकी घटनाओं में कई बड़े अधिकारी भी शहीद हुए। जम्मू कश्मीर पुलिस आतंकियों के निशाने पर आने लगी इसका कारण था, इनका स्थानीय होना और इन तक आसान पहुँच।

दिन रात हिन्दू मुस्लिम की नफरत के कीचड में लौटते इन सांप्रदायिक ज़ोम्बियों के लिए मुनव्वर राना साहब ने बहुत पहले ही एक शेर कह दिया था कि :

जिसे भी जुर्म-ए-गद्दारी में तुम सब क़त्ल करते हो !
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उसी के जेब से क्यों मुल्क का झंडा निकलता है ??