एक कलेक्टर जो अपनी पहचान छुपाकर एक आम वालंटियर की तरह केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहा है।

एक कलेक्टर जो अपनी पहचान छुपाकर एक आम वालंटियर की तरह केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहा है।
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केरल के बाढ़ पीड़ितों के लिए दुनिया भर से लोग आगे आये हैं, कई स्वयं सेवी संस्थाएं और राहत एजेंसियां वहां काम कर रही हैं, MEEM और MMS भी वहां दूर दराज़ इलाक़ों में राहत कार्यों में जुटी हुई है।

The News Minute  में एक ऐसी खबर आयी है कि उसे जो भी सुन रहा है, दिल से तारीफ कर रहा है, ये खबर है केंद्र शासित प्रदेश दादरा नगर हवेली के कलेक्टर कन्नन गोपीनाथ की जो कि किसी को भी अपनी पहचान बताये बिना, पर्सनल लीव लेकर केरल के बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे हैं।

अपने राज्य के लोगों का दुःख उनसे नहीं देखा गया और वो उनकी मदद करने चुपचाप ही छुट्टी लेकर लोगों के साथ बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुट गए, यहाँ तक कि उनके परिवार को भी पता नहीं कि वो छुट्टी लेकर कहाँ और किसलिए गए हैं।

उनकी पहचान तब उजागर हुई जब वहां राहत कार्यों का जायज़ा लेने गए एर्नाकुलम के कलेक्टर सैफुल्लाह की नज़र कन्नन गोपीनाथ पर पड़ी जो राहत सामग्री उठाकर इधर से उधर रख रहे थे, उन्होंने तुरंत ही कन्नन गोपीनाथ को पहचान लिया। और उन्होंने लोगों को बताया कि ये जो नौजवान वालंटियर्स के साथ राहत सामग्री उठा रहा है वो एक IAS है और दादरा नगर हवेली का कलेक्टर है।

इस बात की खबर फ़ौरन ही चारों ओर फ़ैल गयी, इसके बाद कन्नन गोपीनाथ ने TNM से बात करते हुए बताया कि “ये बहुत ही डरवाना और दुखद था कि उस बाढ़ त्रासदी के समय मैं अपने राज्य अपने लोगों के बीच नहीं था, मैं इस दुखद घडी में अपने राज्य के लोगों की मदद करना चाहता था, मैंने इसके लिए छुट्टी लेकर केरल बाढ़ पीड़ितों की मदद करने जाने का फैसला किया, और इस बात को अपने उच्च अधिकारियों को बताया तो वो खुश हुए और उन्होंने फ़ौरन ही इसकी इजाज़त दे दी, पर एक शर्त पर कि वो छुट्टी पर नहीं बल्कि ड्यूटी पर जा रहे हैं।

कन्नन गोपीनाथ कोट्टायम से हैं और 2012 बैच के IAS हैं, वो इससे पहले भी केरल 26 अगस्त को आये थे और उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रूपये की राशि का चेक दिया था और साथ ही दस ट्रक राहत सामग्री भी पहुंचाई थी।

एक कलक्टर होकर अपनी पहचान उजागर न करके आम वालंटियर की तरह चुपचाप बाढ़ पीड़ितों की मदद करने वाले इस अफसर की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है, जिस राज्य के ऐसे नागरिक और ऐसे अफसर हों, वो राज्य किसी भी आपदा और त्रासदी से से जूझकर फिर से खड़ा होने में देर नहीं करेगा।

इंसानियत की चुपचाप खिदमत करने वाले कन्नन गोपीनाथ के जज़्बे को सलाम।

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