UAE के धनी प्रवासी उद्द्योगपति साजी चेरियन एक ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन हैं 49 साल के साजी चेरियन केरल के कायमकुलम से हैं, साजी चेरियन ने अपने मुस्लिम कर्मचारियों के लिए यूएई में 1.3m Dh, (3 लाख US डॉलर्स) यानी 2,03,58,750.00 करोड़ रुपए की मस्जिद बनवाकर दी है, उन्होंने मस्जिद का नाम ‘मरियम, उम ईसा’ रखा है।

गल्फ न्यूज़ की खबर  के अनुसार उन्होंने ये मस्जिद बनाने का फैसला तब लिया जब उन्होंने देखा कि उनके यहां काम करने वाले टैक्सी लेकर पास के चर्च में नमाज पढ़ने जाते हैं। उन्होंने कहा कि नमाज पढ़ने जाने के लिए उनके यहां काम करने वालों को कम से कम 20 दिरहम खर्च करने पड़ते हैं, ऐसे में उन्हें लगा कि उनके यहां काम करने वालों की सोसायटी के पास एक मस्जिद बनवा देने से उन लोगों को बहुत खुशी होगी।

ये मस्जिद अल हाइल इंडस्ट्रियल एरिया में है, इसके अंदर एक बार में कम से कम 250 लोग नमाज अदा कर सकते हैं, वहीं इसके साथ लगे आंगन में भी 700 से ज़्यादा लोग नमाज पढ़ सकते हैं, रिपोर्ट के मुताबिक चेरियन जब यूएई पहुंचे थे तब वो बहुत साधारण व्यक्ति थे. लेकिन जीवन में संघर्ष करके उन्होंने वो मकाम हासिल किया जिसकी वजह से आज वो इतनी महंगी मस्जिद अपने कर्मचारियों को गिफ्ट करने की स्थिति में है।

साजी चेरियन कहते हैं कि जब औकाफ वालों को पता चला कि एक क्रिश्चियन होते हुए भी मैं मस्जिद बनवा रहा हूँ तो वो खुश हुए और उन्हें विभाग की ओर से हर तरह की सहायता की पेशकश की, औकाफ की ओर से मुफ्त बिजली, पानी और अन्य सुविधाएँ देने का आदेश भी हुआ।

साजी चेरियन ने औकाफ की ओर से मस्जिद के लिए कालीन और साउंड सिस्टम देने के प्रस्ताव को मंज़ूर कर लिया, मगर उन्होंने अन्य लोगों द्वारा पेश की गयी नक़द मदद, चंदे आदि के लिए इंकार कर दिया था, उनका कहना था कि वो इस मस्जिद को अपने खर्च से ही बनवाना चाहते हैं।

साजी चेरियन ने इससे पहला डिब्बा में एक चर्च भी बनवाया था, इन सबके चलते मीडिया में सुर्खियां बने साजी चेरियन कहते हैं कि उन्होंने कोई बड़ा काम नहीं किया है, उनका कहना है कि “मैं समुदायों को सौहार्द के साथ रहते देखता बड़ा हुआ हूँ, हम हर धर्म के त्योहारों, पर्वो को पर मनाते हैं, मैं किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म, जाति, रंग या राष्ट्रीयता के आधार पर बर्ताव नहीं करता। साजी चेरियन का कहना है कि संयुक्त अरब अमीरात सांप्रदायिक सद्भाव और सहिष्णुता का एक बेहतरीन उदाहरण है।

“I have grown up seeing communities living together in utmost harmony. We celebrate all religions’ festivals and I don’t judge or treat people based on religion, caste, colour or nationality. The UAE is another example of communal harmony and tolerance.”

हालांकि अभी मस्जिद के आंगन के हिस्से की छत बनना बाकी है, लेकिन बताया गया है कि इसके शुरू होने से पहले इसके ऊपर भी छत बन जाएगी. इसे बनाने का काम एक साल पहले ही शुरू हो गया था, जल्द ही इसे नमाजियों के हवाले कर दिया जाएगा।