इस्लाम के शुरूआती दौर में मस्जिद मर्कज़ (केंद्र) होती थी, नमाज़ पढ़ने के अलावा भी कई सामाजिक कार्यों में काम में आती थी। लेकिन बाद में आलीशान और बड़ी-बड़ी मस्जिदों का उपयोग सीमित होकर सिर्फ़ नमाज़ तक रह गया। लेकिन हैदराबाद में इस्लाम की पुरानी रिवायत को फिर से जिंदा करने की एक कोशिश सामने आई है।

times of India की खबर के अनुसार हैदराबाद के एनएस कुंटा स्थित मस्जिद-ए-इशाक में एक नायाब पहल की है, उस मस्जिद के दरवाजे लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए खोल दिए गए हैं, इस पहल से उस इलाक़े के आस पास के लगभग डेढ़ लाख लोगों को स्वास्त्य सेवाओं का लाभ मिलेगा वो भी निशुल्क, इसमें गरीब ज़्यादा हैं, और ख़ास बात ये है कि इस हेल्थ सेंटर के दरवाज़े सभी धर्मों के लोगों के लिए खुले हैं।

मस्जिद कमेटी ने हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन (HHF) नाम के NGO से हाथ मिलाया है, इसी महीने की शुरुआत में एनजीओ के साथ मिलकर मस्जिद के प्रागंण में हेल्थ सेंटर खोला गया, एनएस कुंटा के अलावा अचिरेड्डी नगर, वाटापल्ली, चश्मा, मुस्तफानगर, पहाड़ी गुंटाल शाह बाबा, टेकरी बिरयानी शाह, टीगल कुंटा, जहांनुमा, तदबुन और फातिमानगर के लोगों को भी इस हेल्थ सेंटर से बहुत फायदा होगा।

HHF के मैनेजिंग ट्रस्टी मुजतबा हसन अस्करी ने बताया कि यह हेल्थ सेंटर राज्य सरकार के 30 अस्पतालों के लिए रेफरल लिंक के तौर पर काम करेगा। सरकारी अस्पतालों में झुग्गियों के बहुत ही कम लोग जाते हैं, इसलिए यह हेल्थ सेंटर ऐसे लोगों को जानकारी मुहैया कराएगा और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाएगा, साथ ही इसके 100 स्वयंसेवी लोगों के जरिए मुफ्त और त्वरित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके साथ ही यहां नवजातों के लिए टीकाकरण, कमज़ोर गर्भवती महिलाओं के लिए नुट्रिशन किट भी वितरित किया जायेंगे, साथ ही फिजियोथेरेपी, कार्डियोप्लमोनरी डायग्नोसिस जैसी सुविधा भी दी जाएंगी।

मस्जिद-ए-इशाक की और उसकी इंतेज़ामिया कमेटी की ये पहल तारीफ के क़ाबिल है, यूरोप में और भारत में भी कई जगह मस्जिदों को इसी तरह के अतिरिक्त कामों में लिया जाता रहा है, खासकर Visit my Mosque जैसे सोशल एक्सपेरिमेंट्स के लिए जिसे दुनिया भर में सराहा गया है, और इसी के चलते यूरोप और अमरीका में इस्लामोफोबिया जैसे प्रोपगंडे को खाद पानी मिलना बंद हो गया है।