पिछले सप्ताह सूचना प्रसारण मंत्रालय के बैनर तले गोवा में संपन्न हुए इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) के नेशनल फिल्म डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) के फिल्म बाजार समारोह में राजस्थान में हुई पहलू खान की मॉब लिंचिंग पर बनी एक डाक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसे लेकर संघ और VHP आदि संगठन आग बबूला हो गए हैं।

Economic Times की खबर के अनुसार इस डाक्यूमेंट्री फिल्म का शीर्षक था ‘अल-वार’ और इसकी टैग लाइन थी “धर्म मांस नहीं खाता, बल्कि इंसानों को खाता है।” जहाँ इस फिल्म ने उस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के दर्शकों से प्रशंसा बटोरी है वहीँ इसके प्रदर्शन पर संघ परिवार की भृकुटियां तन गयी हैं।

फिल्म के डायरेक्टर जयदीप यादव हैं और फिल्म को रैपचिक फिल्म्स द्वारा प्रोड्यूस किया गया है। ये फिल्म 55 वर्षीय पहलू खान पर बनी है, जिसे भीड़ ने गौ तस्करी का आरोप लगा कर घेर कर मार डाला था, इस फिल्म को रोहतक (हरियाणा) में फिलमाया गया है। ये फिल्म पहलू खान और उन जैसी कुछ और घटनाओं को लेकर बनाई है।

निर्देशक जयदीप यादव का कहना है कि इस फिल्म में बताया गया है कि किस तरह से कुछ गरीब मुस्लिम परिवार अपने जीवन यापन के लिए मवेशी पालते हैं उनका ध्यान रखते हैं, उन्हें प्यार करते हैं और लोग उन्हें गौ तस्कर घोषित कर मॉब लिंचिंग कर डालते हैं।

जयदीप यादव का कहना है कि मैंने अमेठी में भी कई ऐसे मुस्लिम परिवार देखे हैं जो मवेशियों की अपने बच्चों की तरह देखभाल करते हैं, यादव का कहना है कि उन्हें अपनी फिल्म का क्लाइमेक्स फिल्माने के लिए पुलिस सुरक्षा लेना पड़ी, क्योंकि कट्टर हिन्दू संगठनों ने दो बार इसमें विघ्न डाला था।

वहीँ इस डाक्यूमेंट्री फिल्म के प्रदर्शन से नाराज़ VHP के प्रवक्ता का कहना है कि ये फिल्म इस मुद्दे का एक ही पक्ष दिखाती है जो कि हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के अलावा कुछ भी नहीं है, पहलू खान मामले की जाँच चल रही है, और मामला अदालत में लंबित है ऐसे में सरकारी विभाग (सूचना प्रसारण मंत्रालय) के आयोजन में ऐसी फिल्म दिखाना दुर्भाग्य पूर्ण है।

संघ के एक पदाधिकारी ने भी इस पर आपत्ति जतायी और कहा कि “फिल्म को ऐसे फोरम पर प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए था, जहां अन्तरराष्ट्रीय मेहमान मौजूद थे, इससे देश की गलत छवि बनती है।”

नौजवान निर्देशक जयदीप यादव ने सोशल मीडिया पर इस मामले में सहयोग के लिए सभी को धन्यवाद देते हुए लिखा है कि मुझे अपनी इस फिल्म के लिए CBFC से प्रमाणपत्र मिलना बहुत मुश्किल था, इसी लिए मैंने इसे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) के मुख्य सेक्शन में नहीं रख कर ‘वीविंग सेक्शन’ में रखा था, क्योंकि मुख्य सेक्शन में CBFC प्रमाणपत्र की ज़रुरत होती है, वीविंग सेक्शन में इस फिल्म को काफी दर्शकों ने देखा और सराहना की।