देश में फिर से एक और आर्थिक आपातकाल की आहट तो सुनाई नहीं दे रही ? नोटबंदी के रूप में देश की जनता ने आर्थिक आपातकाल देखा और भुगता है, ATMs और बैंक्स की लाइन्स में 150 के लगभग बेक़ुसूर लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। एक और आर्थिक आपातकाल की ये आहट क्यों और कैसे सुनाई दे रही है, आइये समझते हैं।

देश के सबसे बड़े बैंक और कभी गरीबों का बैंक कहे जाने वाले SBI के नए नियम के चलते अब SBI खाता धारक दूर शहरों में पढ़ रहे अपने ही बच्चों के SBI बचत खातों में नगद पैसे जमा नहीं कर सकते, न सिर्फ बच्चों बल्कि अपने भाई, बहन, माता पिता या पत्नी तक के खाते में 100 रुपया भी नगदी जमा नहीं कर सकते।

इसके लिए अब SBI खाता धारकों को नए नियम के तहत एक ग्रीन रेमिट कार्ड लेना होगा, इस ग्रीन रेमिट कार्ड को लेने के लिए लिए व्यक्ति को पहले बैंक से एक फार्म लेकर फॉर्म में आवेदक का नाम, फोटो, पिता का नाम, पता, जन्म दिनांक और मोबाइल नं एवं जिसे राशि भेजना है, उसका नाम, पिता का नाम, SBI का खाता नं और उसका मोबाइल नं आदि जानकारी देनी होगी।

इसके बाद आवेदक को 20 रूपये जमा करना होंगे, फार्म में दी गयी जानकारियां सही पाए जाने पर आवेदक को ग्रीन रेमिट कार्ड दिया जायेगा, जिसे वो कैश काउंटर पर स्वाइप मशीन में स्वाइप कर केशियर को नगदी जमा कर सकता है, इस ग्रीन कार्ड द्वारा एक दिन में अधिकतम 49000/-और एक माह में एक लाख रूपये तक जमा किये जा सकते हैं।

अब कल्पना कीजिये कि किसी व्यक्ति के तीन बच्चे बाहर पढ़ते हैं, वो व्यक्ति खुद बहार नौकरी पर है, उसे उसे हर माह अपने तीनो बच्चों, पत्नी और माता पिता के खर्चे के लिए उन सभी के खातों में नगदी जमा करना है तो उसे हर बच्चे हर सम्बन्धी के लिए अलग से एक ग्रीन रेमिट कार्ड बनवाना होगा, तीन बच्चे हैं तो तीन रेमिट कार्ड, पत्नी के लिए अलग रेमिट कार्ड, पिता के लिए अलग माता जी के लिए अलग से कार्ड।

हर व्यक्ति ऑनलाइन मनी ट्रांसक्शन नहीं करता, या ऑनलाइन बैंकिंग नहीं करता, आज भी हमारे देश की अधिकांश आबादी गांवों में बसती है, जहाँ डिजिटल इंडिया का जुमला गांव की चौखट पर ही दम तोड़ता नज़र आता है, ऐसे में SBI जैसी बैंक के इस नए नियम से लोगों में हड़कंप है।

लोग इस नगदी जमा के नियमों से हैरान ही थे कि सितम्बर के अंतिम सप्ताह में इसी SBI ने फिर से अपने ग्राहकों पर एक और नियम थोप दिया जो पहले वाले नियम से भी कठोर और अव्यवहारिक है, इसके तहत ग्राहक 31 अक्टूबर के बाद एटीएम से एक दिन में महज 20 हजार रुपए ही निकाल सकेंगे। वर्तमान में यह सीमा 40 हजार रुपए है।

नगदी की निकासी के इस नए और अव्यवहारिक नियम से न सिर्फ ग्राहक बल्कि खुद बैंक कर्मी भी हैरान हैं, मान लीजिये कि किसी व्यक्ति को रात में एमर्जेन्सी में तीस हज़ार की ज़रुरत है और बैंक दो दिन के लिए बंद हैं तो वो ATM से एक दिन में केवल 20,000/- हज़ार ही निकाल सकता है, बाक़ी के दस हज़ार के लिए उसे अगले दिन तक प्रतीक्षा करनी होगी।

इन दोनों नियमों के चलते SBI ग्राहक खासे परेशान हैं, वहीँ SBI इन दोनों नियमों के लिए वाहियात तर्क देती नज़र आती है, नगदी जमा करने के नए नियम के SBI अधिकारी तर्क देते हैं कि नोटबंदी के दौरान बहुत से लोगों के खाते में अधिक पैसा जमा होने पर जब आयकर विभाग ने उनसे इस बाबत जानकारी चाही तो ज्यादातर लोगों का कहना था कि उन्हें मालूम नहीं कि किसने उनके खाते में ये रुपये जमा कर दिए। ये रुपये उनके नहीं हैं, इसलिए नगदी जमा पर नियम बनाये गए हैं।

दूसरे अव्यवहारिक और वाहियात नियम (ATM से एक दिन में 20,000/- रूपये की सीमा) पर तर्क देते हैं कि ATM में स्किमिंग की बढ़ती घटनाओं के चलते बैंक ने इस तरह की धोखाधड़ी के मामलों में काबू करने के लिए यह कदम उठाया है। ये कितना वाहियात और गैर तकनीकी तर्क है आप समझ सकते हैं, कार्ड क्लोनिंग और ATM में स्किमिंग अब भी जारी रहेगी, इस नियम से वो रुकने वाली नहीं है।

बजाय इसके कि अपना डिजिटल सुरक्षा तंत्र मज़बूत किया जाए, उलटे ग्राहकों पर हर बार नए नियम थोपने, निकासी और जमा पेचीदा करने, सीमित करने जैसी हरकतें कर SBI खुद असहाय नज़र आने लगी है। सब कुछ छोड़कर ग्राहकों की जमा और निकासी पर अंकुश लगाना बहुत ही हैरान करने वाला है। इस ‘न्यू इंडिया’ में सबसे बड़ा लुटेरा, निरंकुश और ग्राहकों को चूसने वाला बैंक यदि कोई है तो वो SBI है।

काश ये नियम विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसे और नितिन संदेसरा जैसों के लिए लागू किये गए होते तो आज देश के चरमराते बैंकिंग सिस्टम की ये हालत नहीं होती, सच तो ये है कि अच्छे दिनों के जुमले वाले इस न्यू इंडिया में बैंकों को लूटने और लुटाने की खुली छूट दी हुई है, बैंक निरंकुश होकर जनता की कमाई पर ऐश कर रहे हैं, नित नए नियम थोप रहे हैं, सेवा शुल्क लगाकर हज़ारों करोड़ों कमा रहे हैं, और विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसे और नितिन संदेसरा जैसे जनता और देश का पैसा आराम से लूटकर विदेशों में ऐश कर रहे हैं।

हो न हो देश शायद फिर से एक और आर्थिक आपातकाल की ओर बढ़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *