इस तरह की नीली आँखें ख़ूबसूरती नहीं बल्कि एक विलक्षण बीमारी की निशानी भी हो सकती हैं।

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इंटरनेट और सोशल मीडिया पर नीली आखों वाले अफ्रीकी बच्चों के कई फोटोज़ सैंकड़ों हज़ारों बार शेयर किये जा चुके हैं, नीली आखों को लोग ख़ूबसूरती की निशानी भी मानते हैं, मगर वैज्ञानिकों ने इस पैमाने का दूसरा पक्ष भी सामने रखा है।

Osun Defender की खबर के अनुसार इथोपिया के इस नीली आखों वाले बच्चे का सोशल मीडिया पर कई बार ज़िक्र आया है, इसका नाम अब्यूश है, वो अपनी दादी मां के साथ एक टूटी झोपड़ी में रहता है। वो स्कूल नहीं जा सकता है क्योंकि उन लोगों के पास पैसे नहीं हैं। इसकी नीली आँखों की वजह से इसे विश्व में जाना जाने लगा है।

जब भी वह बाहर खेलने जाता है तो उसके दोस्त कहते हैं कि प्लास्टिक की आंखों वाला लड़का आ गया। जबकि उसके मांता पिता मानते थे कि उसकी आंखें भगवान से वरदान में मिली हैं। लेकिन उसकी आंखों का रंग नीला होने के पीछे की वजह कुछ और है।

अफ्रीका में कई बच्चे इस ‘वार्डेनबर्ग सिंड्रोम’ से पीड़ित पाए गए हैं ।

वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी वजह ‘Waardenburg syndrome’ ‘वार्डेनबर्ग सिंड्रोम’ नामक एक बीमारी है जिसकी वजह से उसकी आँखों का रंग नीला हो गया है, ये बीमारी 300000 लाख में से किसी एक को होती है, इसमें पिग्मेंट का रंग नीला हो जाता है इसी लिए इस बीमारी को पिग्मेंट डिसऑर्डर भी कहा जाता है, इस बीमारी में आँखों के नीलेपन के साथ किसी किसी को बहरापन भी साथ ही होता है।

अब्यूश जब पैदा हुआ था तो उसके माता पिता ने सोचा था कि शायद वो अँधा पैदा हुआ है, मगर बाद में उन्हें पता लगा कि वो न सिर्फ देख सकता है बल्कि उसकी आँखें एकदम नीली हैं, तभी उनको लगा था कि ये नीली आँखें भगवन की देन हैं।

अब्यूश का प्रिय खेल फुटबॉल है, वो अब्यूश बड़ा होकर फुटबॉल खिलाडी बनना चाहता है मैसी उसका प्रिय खिलाडी है।

‘वार्डेनबर्ग सिंड्रोम’ के बारे में यहाँ  विकिपीडिया पर भी पढ़ सकते हैं।

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