अमरीका ब्रिटैन में कई कंपनियों ने कर्मचारियों के हाथ में माइक्रो चिप इम्पलांट कर उन्हें अर्ध रोबोट बना दिया।

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विभागीय आईडी कार्ड, आधार कार्ड, कार का रिमोट, दफ्तर में बायो मेट्रिक हाज़री जैसे झंझटों को दूर करते हुए अमरीका ब्रिटैन और स्वीडन जैसे देशों में कई कंपनियों ने अब अपने कर्मचारियों के हाथ में चावल के दाने जितनी माइक्रो चिप इम्पलांट कर दुनिया को चौका दिया है।

Daily Mail UK के अनुसार अमरीका की एक कंपनी Three Square Market (थ्री स्केवर मार्केट) ने अपने 250 में से 80 कर्मचारियों के शरीर में एक माइक्रो चिप लगाईं है। चावल के दाने जितनी ये माइक्रो चिप कर्मचारियों के ID कार्ड की तरह ही काम करेगी, ऐसा प्रयोग करने वाली दुनिया की पहली कंपनी बन गयी है।

इस चिप को अंगूठे और अंगूलियों के बीच त्वचा के अंदर लगाया गया, इस चिप में रेडियो फ्रिक्वेंसी इडेंटिफिकेश (RFID) टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है जो इलेक्ट्रोमेगेनेटिक फिल्ड की मदद से इलेक्ट्रॉनिक रूप से एकत्रित जानकरी को पहचानता है।

कंपनी के अनुसार, इस चिप की मदद से कर्मचारी दरवाजे खोलने, अपने कंप्यूटर में लॉग इन करने, फोटो कॉपी मशीन का इस्तेमाल करने जैसे अन्य काम कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि अगर कोई कर्मचारी इस तकनीक में रूचि रखता है लेकिन इंप्लांट नहीं कराना चाहता है तो वह इसे RFID कलाई बैंड या स्मार्ट रिंग में भी लगा सकते हैं।

इस माइक्रो चिप की क़ीमत $300 डॉलर्स है जिसे थ्री स्केवर मार्केट कंपनी ने खुद वहन किया है।

माइक्रो चिप प्रदाता कंपनी के मुताबिक, “यह पूरी तरह सुरक्षित है। इस चिप को ट्रैक नहीं किया जा सकता है और इसमें वहीं जानकारी रहेगी जो कर्मचारी रखना चाहेंगे। इसमें GPS की सुविधा नहीं है। यह चिप NFC (नियर-फिल्ड कम्यूनिकेशन) तकनीक से लैस है।

इस चिप में उस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है जोकि कॉन्टेक्टलेस क्रेडिट कार्ड और मोबाइल पेमेंट सर्विस में इस्तेमाल किया जाता है। आने वाले समय में इसमें और भी कई फीचर्स जोडे़ जाएंगे।” इसके लिए डिवायस और हाथ के बीच का फासला 6 ईंच तक रखा गया है।

कंपनी ने दावा किया कि ये शरीर को नुकसान नहीं पहुचाता है। इस डिवाइस को 2004 में FDA से मंजूरी मिल चुकी है। इस डिवाइस को आसानी से शरीर में लगाया और शरीर से निकाला जा सकता है। इस डिवाइस में मौजूद डेटा इंक्रिप्टेड भाषा में रहेगी जैसा कि क्रेडिट कार्ड में होता है।

हालांकि इस तरह की तकनीक कोई नई नहीं है। ऐसी चिप का इस्तेमाल पालतू जानवरों के लिए वर्चुअल कॉलर के रूप में होता रहा है। इसके अलावा कंपनियां डिलिवरी को ट्रैक करने के लिए भी ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं, ऐसी किसी तकनीक का इस्तेमाल अभी तक किसी कंपनी के द्वारा अपने कर्मचारियों पर नहीं किया गया था।

दूसरी तरफ, इस तरह अपने कर्मचारियों के माइक्रो चिप इम्प्लांट करने को लेकर बहस भी छिड़ गयी है, कुछ लोग इस तकनीक की आलोचना भी कर रहे हैं क्योंकि इससे निजता का हनन हो सकता है। इन लोगों का कहना है कि ऐसी चिप इंप्लांट कराने के बाद कंपनी को आपके आने-जाने, काम करने के घंटों के साथ-साथ यह जानकारी भी होगी कि आपने कहां से क्या खरीदा और आप कहां-कहां गए।

क्योंकि इससे मिलती जुलती टेक्नोलॉजी की ट्रैकिंग सिस्टम वाली चिप पहले डॉग कॉलर में उपयोग में ली जाती रही है, इसलिए लोगों ने सोशल मीडिया पर कर्मचारी को डॉग कॉलर पहने कुत्ते के सामान उसके साथ बैठे हुए फटोज़ भी शेयर कर डाले थे। कुछ लोगों ने ऐसे कर्मचारियों की तुलना अर्ध रोबोट्स से भी की है।

वैसे ये प्रयोग नया नहीं है, स्वीडन में देश में ये तकनीकी प्रयोग 3,000 नागरिकों ने 2017 से अपनाया हुआ है, वहाँ ये इम्प्लांट ऐच्छिक है, वो लोग इस माइक्रोचिप सुविधा से ट्रैन के टिकट खरीदते हैं, वेंडिंग मशीन, कंप्यूटर लॉगिन सुरक्षित आवासों में एंट्री आदि के लिए भी इस्तेमाल करते हैं।

इस माइक्रोचिप में मनचाहा डाटा फीड कराया जा सकता है, आप अपनी आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, गाडी के कागज़ात आदि फीड करा सकते हैं जिसे चाहे गए समय पर स्कैन कर प्राप्त किया जा सकता है।

 

अमरीका में हुए इस प्रयोग के बाद ब्रिटैन में भी एक बड़ी कंपनी Biohax अपने कर्मचारियों को ये माइक्रोचिप इम्प्लांट करने जा रही है, माइक्रोचिप बनाने वाली कंपनियों से इन चिप्स की मांग बढ़ने लगी है, और ब्रिटैन, स्वीडन, जापान आदि कई देशों को ये सप्लाई की जा रही है।

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