यूरोप में मुस्लिम विरोधी नफरती प्रोपगंडे ‘इस्लामोफोबिया’ की उधड़ती परतों के बाद जानते हैं एक और हेट कैम्पेन ‘पेगिडा’ के बारे में, जर्मनी में जन्म लेने वाले इस Pegida संगठन के फाउंडर हैं लुज बैकमैन, इस संगठन के बारे में आप विकिपीडिया पर पढ़ सकते हैं।

लुज बैकमैन ने अक्टुबर 2014 में एक फेसबुक ग्रुप से पेगिडा की शुरूआत की थी, और जल्दी ही इससे बड़ी तादाद में मुस्लिम और शरणार्थी विरोधी लोग जुड़ना शुरू हो गए। ये नव नाज़ी संगठन अपने आपको खालिस राष्ट्रवादी कहता है, और यूरोप में इस्लामीकरण का डर दिखाकर सोशल मीडिया और उससे बाहर मुस्लिम विरोधी गतिविधियां चलाता है।

मार्च 2018 को ‘पेगिडा’ के संस्थापक लुज बैकमैन को ब्रिटैन में घुसने नहीं दिया गया था और वापस जर्मनी रवाना कर दिया गया था, मार्च 2018 में ब्रिटैन में दक्षिणपंथियों, मुस्लिम और शरणार्थी विरोधी संगठनों द्वारा सोशल मीडिया और देश में नफरत और हेट क्राइम्स के बढे के विरोध में लोगों में आक्रोश था और वहां इस नफरती मुहीम के खिलाफ जंगी प्रदर्शन हुआ था।

ब्रिटैन में ये लुज बैकमैन इसलिए जाना चाहते थे कि ब्रिटिश सरकार ने वहां के Britain First संगठन के दो उग्र राष्ट्रवादियों को मुस्लिम विरोधी गतिविधियों के चलते जेल भेज दिया था, और उनके तथा उनके अधिकारीयों के फेसबुक प्रोफाइल्स बैन कर दिए थे, लुज बैकमैन ब्रिटैन में दम तोड़ रहे मुस्लिम विरोध, ख़त्म होते दक्षिणपंथ को हवा देने तशरीफ़ लाये थे, जिनकी उम्मीदों पर ब्रिटिश सरकार ने पानी फेर कर वापस भेज दिया, इसके बारे में आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

पेडिगा का संस्थापक लुज बैकमैन खुद हिटलर का बड़ा प्रशंसक है, एक बार उसने हिटलर का हुलिया बनाकर और ड्रेस पहन कर फोटो सेशन कराया था जो अखबारों में छपने के बाद बवाल हो गया था।

शुरू में लोग इस संगठन से जुड़े मगर बाद में अलग होने लगे, यहाँ तक कि खुद जर्मनी में इसके दुष्प्रचार के खिलाफ लोग उठ खड़े हुआ, जब भी पेडिगा वाले कोई मुस्लिम विरोधी या शरणार्थी विरोधी रैली करते उसके विरोध में लोग खुद रैली निकाल कर उसका प्रतिरोध करते।

यहाँ तक कि कोलोन में अधिकारियों ने शहर के प्रमुख गिरजाघर की लाइटें बंद रखकर एक तरह से पेडिगा समर्थकों को चेतावनी दी थी कि वह ‘अतिवादियों’ का समर्थन कर रहे हैं, ड्रेसडेन में कार निर्माता फॉक्सवॉगन ने कहा कि वह भी अपने प्लांट को अंधेरे में रखकर जताएगी कि कंपनी “एक खुले, मुक्त और लोकतांत्रिक समाज के पक्ष में खड़ी है।”

दरअसल जर्मनी में किसी भी दूसरे यूरोपीय देश के मुकाबले बड़ी संख्या में लोगों ने शरण ले रखी है, और यहां के शरणार्थियों में अधिकांश युद्ध से जूझ रहे सीरिया से आए हुए लोग हैं।

इस तरह हम देख सकते हैं कि यूरोप और अमरीका के मुसलमान नफरती एजेंडे ‘इस्लामोफोबिया’ के साथ साथ पेडिगा जैसे और मुस्लिम विरोधी संगठनों और विचारधाराओं से भी न सिर्फ जूझ रहे हैं बल्कि उन्हें बार बार बैकफुट पर धकेल रहे हैं, और इसमें उन्हें स्थानीय नागरिकों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है, ये सब वहां के मुसलमानों के बर्ताव और आमाल के चलते ही मुमकिन हो पाया है।