कभी भारतीय संविधान को नकारने वाले और पाकिस्तान से आतंकवाद की ट्रेनिंग लेकर आये फारूक अहमद खान बीजेपी के टिकट से निकाय चुनाव लड़ रहे हैं। फारूक अहमद खान उर्फ सैफुल्ला पुराने शहर श्रीनगर सिटी से चुनाव लड़ रहे हैं।

फर्स्ट पोस्ट  की खबर के अनुसार फारूक अहमद खान उन युवाओं में शामिल था, जिसने कश्मीर को भारत से आजाद कराने के लिए 1980 में हथियार थामे थे। उस वक्त खान ने लाइन ऑफ कंट्रोल क्रॉस कर पाकिस्तान से आतंकवाद की ट्रेनिंग लेकर आया और जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) ज्वॉइन किया था।

बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ने वाला खान कभी हिजबुल मुजाहिद्दीन का कमांडर सैयद सलाउद्दीन का करीबी भी रह चुका है।

एक न्यूज चैनल से बात करते हुए खान ने कहा, ‘कॉलेज के दौर में मेरे कई दोस्त बने, जो राजनीति में काफी सक्रिय थे और कई दोस्तों ने राजनीति भी ज्वॉइन की थी। उस वक्त में सैयद सलाउद्दीन का पोलिंग एजेंट हुआ करता था।’ सलाउद्दीन ने 1987 में मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के टिकट से श्रीनगर के अमिरा कादल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गया था।

उसके बाद वह सीमा पार कर पाकिस्तान चला गया और आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया। 1991 में खान को गिरफ्तार कर लिया और साढ़े दस साल तक जेल में सजा काटनी पड़ी। खान बताता है कि उसे सालों से कश्मीर के अलग-अलग टॉर्चर सेंटर में प्रताड़ित किया गया।

बीजेपी ज्वॉइन कर चुका खान ने कहा, ‘मैंने हिंसा का रास्ता अब छोड़ दिया है और मुझे लगता है कि जब तक आप अपने आसपास की राजनीति में शामिल नहीं होंगे, तब कुछ भी हासिल नहीं हो पाएगा।’