“माँ सर का ताज है इसलिए कनवोकेशन कैप उनके लिए और अब्बा ने मुझे पढ़ाने लिखाने के लिए खेतों में बहुत मेहनत की है पसीना बहाया है इसलिए कनवोकेशन गाउन उनके लिए, उनकी मेहनत के बाद मुझे मिली ये डिग्री मेरे लिए शहद की तरह है,” ये कहना है उनके बेटे वलीउल्लाह का जिन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ ढाका से कॉमर्स की डिग्री हासिल की थी। यूनिवर्सिटी ऑफ़ ढाका का 51वां कनवोकेशन समारोह 6 अक्टूबर को संपन्न हुआ था।

बांगला वेब साइट Kaler Kantho online के अनुसार वलीउल्लाह ने डिग्री लेने के बाद अपने माँ को कनवोकेशन कैप और अब्बा को कनवोकेशन गाउन पहना कर रिक्शा में बैठा कर खुद चला कर लाया , वलीउल्लाह ने अपने जज़्बात इस फोटो के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया, इसके बाद यूज़र्स इस फोटो को सोशल मीडिया पर लगातार शेयर कर रहे हैं।

वहीँ कुछ लोग इस फोटो के केप्शन में लिख रहे हैं कि एक रिक्शा चालाक का बेटा ग्रेजुएट हुआ, और उसने अपने माता पिता को रिक्शा में बैठाया खुद रिक्शा चलाई, इस बात का पता चलते ही वलीउल्लाह ने खंडन कर कहा कि उसके पिता रिक्शा चालक नहीं बल्कि एक किसान हैं। उन्होंने जो मुझे दिया है मैं कभी लौटा तो नहीं सकता मगर कनवोकेशन के बाद मैंने उन्हें इस तरह से सम्मान देने की कोशिश की है।

सोशल मीडिया पर लोग एक बेटे के जज़्बात, इस फोटो और इसके पीछे की मर्मस्पर्शी कहानी को शेयर कर रहे हैं और दिल खोल कर तारीफ कर रहे हैं।