ब्रिटेन के इमाम को बहादुरी और मानवीयता के लिए सर्वोच्च ब्रिटिश सम्मान से नवाज़ा गया।

पूर्वी ब्रिटेन के व्हाइट चेपल इलाक़े की मस्जिद से नमाज़ पढ़ कर बाहर निकल रहे नमाज़ियों पर गाडी चढ़ाकर कुचलने के आरोपी श्वेत दक्षिणपंथी को नाराज़ भीड़ से बचने वाले इमाम मोहम्मद महमूद को उनके बहादुरी और मानवीयता भरे कारनामें की वजह से प्रिंस विलियम ने ब्रिटेन के दूसरे सर्वोच्च सम्मान, ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर, Officer of the Order of the British Empire (OBE) से सम्मानित किया था।

ब्रिटिश न्यूज़ चैनल ITV के अनुसार उन्हें ये सम्मान जून’ 2017 को ब्रिटेन के फिन्सबरी पार्क मस्जिद में हुए आतंकी हमले में बहादुरी और सूझबूझ की वजह से मार्च’ 2019 को दिया गया था, जून 2017 को एक श्वेत दक्षिणपंथी हमलावर डैरेन ओसबोर्न ने फिन्सबरी पार्क मस्जिद से नमाज़ पढ़कर बाहर निकल रहे नमाज़ियों पर अपनी गाड़ी चढ़ा दी थी जिससे एक व्यक्ति मुकर्रम अली की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी थे और 9 लोग घायल हुए थे।

इस आतंकी घटना के तुरंत बात हमलावर को भीड़ ने पकड़ लिया था, मस्जिद के इमाम मोहम्मद महमूद ने बाहर आकर नाराज़ भीड़ से हमलावर डैरेन ओसबोर्न को बचाया था, जब तक कि मेट्रोपोलिटन पुलिस अधिकारी नहीं पहुंचे, तब तक वो ओस्बोर्न और भीड़ के बीच दीवार बन कर डटे रहे।

प्रिंस विलियम, जिनकी पदवी ड्यूक ऑफ कैम्ब्रिज है , बकिंघम पैलेस में इमाम मोहम्मद महमूद को सम्मानित किया था, और इसकी सूचना एक वीडियो के ज़रिये ट्वीट कर भी दी गयी थी।

ब्रिटिश न्यूज़ चैनल ITV से बात करते हुए इमाम मोहम्मद महमूद ने कहा कि वो एक ‘हीरो’ नहीं हैं लेकिन इस ब्रिटिश सम्मान को ख़ुलूस के साथ मंज़ूर करते हैं।


इमाम मोहम्मद महमूद ने कहा, “हीरो वो होते हैं असाधारण काम करते हैं, वो कर्तव्य सीमा से परे जाते हैं, जबकि मैंने उस रात जो किया, वह हमारी मस्जिद, इंसानियत और सामाजिक समरसता के लिए साधारण ही था।”

“उस वक़्त ये हमारा कर्तव्य था कि जो भी हुआ हम उस स्थिति को काबू करें, लोगों को शांत करें, एक कायराना हमले की प्रतिक्रिया में हमला करना ठीक नहीं।”

इमाम मोहम्मद महमूद ने कहा कि “मैंने जो किया वह एक साधारण काम था, एक मुसलमान के लिए सामान्य और एक इंसान के लिए सामान्य जो देश के कानून और व्यवस्था का सम्मान करता है।”

उन्होंने कहा: “मुझे लगता है कि मुसलमानों के बारे में ब्रिटिश जनता अभी भी अनजान है कि हम मुसलमान भी आम नागरिकों की तरह ही सामान्य हैं, हमारे हित लगभग सभी के हितों की तरह ही समान हैं।”

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