कभी इसी सरकार ने श्री श्री रविशंकर के निजी आयोजन में सेना को पुल बनाने पर लगा दिया था, जिसका देश में विरोध हुआ था।

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देश की सेना किसी भी नागरिक के लिए गर्व और सम्मान का विषय है, सेना का नाम आते ही गौरव और सुरक्षा की अनुभूति होती है, हम चैन से सोएं इसके लिए जवान सरहद पर जागते हैं, चौकस रहते हैं, मगर कुछ महीनों से सेना को लेकर देश में विवाद खड़े किये जा रहे हैं, इसके पीछे जो भी राजनैतिक कारण है वो दुखद हैं।

राजनीति कब पलटी मार जाये कह नहीं सकते, कुछ साल पीछे चलते हैं जब 11 से 13 मार्च 2016 को यमुना किनारे आयोजित हुए भाजपा सरकार के प्रिय गुरु श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ़ लिविंग के निजी आयोजन में सेना को लगा दिया गया था, सेना ने वहां दो पोन्टून पुल बनाये थे, निजी सांस्कृतिक आयोजन में सेना के इस्तेमाल को लेकर देश में बवाल मच गया था।

निजी सांस्कृतिक आयोजन के लिए सेना के उपयोग को लेकर सरकार की खिंचाई करते हुए राज्यसभा में विभिन्न विपक्षी दलों ने  संसद में हंगामा किया था , जिसे भाजपा सरकार के मंत्रियों ने ख़ारिज कर दिया था, और इस विरोध को हिन्दुओ का विरोध बता दिया था।

उस समय केंद्रीय मंत्री एम. वैंकेया नायडू ने आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा यमुना किनारे आयोजित किए जा रहे वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल का समर्थन किया था और इस आयोजन से जुड़े विवादों को खारिज करते हुए कहा था कि इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने ये भी कहा था कि फिलहाल हिंदुओं की आलोचना का फैशन चल रहा है। उन्होंने इस निजी आयोजन की तुलना कुम्भ मेले तक से कर डाली थी।

निजी आयोजन में सेना के उपयोग पर तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का तर्क था  कि लाखों लोगों की जानमाल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेना से पुल बनाने के लिए कहा गया है, सेना पहले भी लोगों की सुरक्षा के लिए कुंभ मेले और दूसरे मौकों पर ऐसा काम करती रही है।

Business Standard की खबर के अनुसार तब देश में सेना के जवानों को इस कार्यक्रम की तैयारी में लगाए जाने को लेकर घमासान मच गया था, कई सेवा निवृत सैन्य अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सेना द्वारा यमुना नदी पर दो पोंटून पुलों के निर्माण के लिए सेना के इंजीनियरों और सैन्य उपकरणों के उपयोग पर विरोध जताया था।

उस समय इस विवाद पर मचे घमासान के बाद भी सरकार ने सेना से दो पोन्टून पुल बनवाये थे, इस विवाद पर श्री श्री के आयोजन के समर्थन में सरकार के बयान सर्च करके पढ़ सकते हैं।

और हाँ इन्ही बाबा श्री श्री पर उस आयोजन के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति के लिए 5 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था, जिसे चुकाने में बाबा ने बड़ी ना नुकुर की थी।

राजनीती के रंग निराले !!

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