2006 में प्रतिबंधित संगठन ‘सिमि’ की एक ‘‘गुप्त’’ बैठक से संबंधित मामले में विशेष NIA अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए पांच लोगों को केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को बरी कर दिया है।

The Hindu की खबर के अनुसार मामला तब का है जब 2006 में एर्नाकुलम जिले में बिनानीपुरम के एक उपनिरीक्षक को सूचना मिली थी कि आरोपी पनाईकुलम के एक हॉल में गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा हुए थे और भड़काऊ भाषण दिये गये। अभियोजन पक्ष ने कहा था कि इडुक्की, कोट्टायम, त्रिशूर और पलक्कड़ जिलों से आरोपी ‘गुप्त’ बैठक के लिए पनाईकुलम में इकट्ठे हुए थे।

केरल पुलिस ने पहले मामले की जांच की थी और इसके बाद यह मामला NIA को सौंप दिया गया था, जिसने दिसम्बर 2011 में एक आरोपपत्र दायर किया था। जून 2014 में अदालत ने आरोप तय किए और जुलाई 2014 में सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने मार्च 2015 में दलीलें पूरी की थी।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों में से दो को 14 साल सश्रम कारावास (आरआई) और तीन अन्य को 12 साल की आरआई की सजा सुनाई थी, उन्हें आईपीसी और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया था। NIA अदालत ने दो आरोपियों पर 60-60 हजार रुपये का जबकि तीन अन्य पर 55-55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।

इन लोगों ने NIA अदालत के नवम्बर 2015 के उस निर्णय को चुनौती दी थी जिनमें उन्हें अलग-अलग अवधि के कारावास की सजा सुनाई गई थी। न्यायमूर्ति ए एम शफ़ीक और न्यायमूर्ति अशोक मेनन की एक खंडपीठ ने पांच दोषियों की अपील को स्वीकार कर लिया।

जिन लोगों को बरी किया गया है उनमें पी ए शादुल, अब्दुल रसिक, अंसार नदवी, निजामुद्दीन और शामी शामिल हैं। केरल उच्च न्यायालय ने पाया कि NIA की विशेष अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराने में गंभीर त्रुटि की है।

ऐसे ही एक मामले में मार्च 2019 को ही नासिक की विशेष अदालत ने TADA के तहत गिरफ्तार 11 मुसलमानों को 25 साल बाद बरी किया था।

 

जिन 11 लोगों को बरी किया गया है उनके नाम थे : जमील अहमद अब्दुल्लाह खान, यूनुस मोहम्मद इस्हाक़, फ़ारूक़ नज़ीर खान, युसूफ गुलाब खान, अय्यूब इस्माइल खान, वसीमउद्दीन शम्सुद्दीन, शेखा शफी शैख़ अज़ीज़, अशफ़ाक़ सईद मुर्तुज़ा मीर, मुमताज़ सईद मुर्तुज़ा मीर, हारून मोहम्मद बफाती और मौलाना अब्दुल क़दीर हबीबी।