“सीमा पार आतंकवाद के बीच बातचीत नहीं”, तो फिर पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल वाइब्रेंट गुजरात में भाग लेने क्यों बुलाया गया है ?

“सीमा पार आतंकवाद के बीच बातचीत नहीं”, तो फिर पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल वाइब्रेंट गुजरात में भाग लेने क्यों बुलाया गया है ?
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साल 2019 के पहले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी ने ANI को इंटरव्यू दिया था जिसके सभी भाग और बयान जनता को हर्फ़ ब हर्फ़ याद होंगे, खासकर पाकिस्तान को लेकर बड़ी चेतावनियां और दावे किये गए थे जैसे की :-

सीमा पार आतंकवाद के बीच बातचीत नहीं : मोदी जी.

‘एक लड़ाई से पाकिस्तान सुधर जाएगा, ये सोचना बहुत बड़ी गलती होगी, पाकिस्तान को सुधरने में अभी और समय लगेगा : मोदी जी.

‘उरी में हुए आतंकी हमले में भारतीय सेना के कई जवानों को जिंदा जला दिया गया था। इसकी वजह से मेरे साथ-साथ भारतीय सेना के जवान भी बहुत गुस्से में थे, जिसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई गई : मोदी जी.

भाजपा और भाजपा के बगल बच्चे संगठन दिन रात पाकिस्तान राग अलापते रहते हैं, असहमतों के लिए पाकिस्तान का टिकट और वीज़ा तैयार रखते हैं, इधर मोदी सरकार दिन रात जनता को दिखने के लिए पाकिस्तान को आँखें दिखाती है।

मगर इस ऑंखें दिखाने और असहमतों को पाकिस्तान डिपोर्ट करने के पीछे चल रहा खेल जनता को नज़र नहीं आता,  Times of India में 28 दिसंबर 2018 को प्रकशित खबर के अनुसार 18 से 22 जनवरी 2019 तक गुजरात में आयोजित गुजरात ग्लोबल समिट में इस बार पाकिस्तान के व्यापारिक मंडल को भी न्योता दिया गया है, इसकी पुष्टि आयोजकों ने की है।

इस ग्लोबल समिट में पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों के कम से कम सात प्रतिनिधिमंडलों के भाग लेने की उम्मीद है, जिसके चलते इस शिखर सम्मेलन में सम्मिलित देशों में सबसे बड़े दल के तौर पर पाकिस्तान के शिरकत करने की उम्मीद है। इस शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों के वाणिज्य और व्यापार निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले 52 प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। इन प्रतिनिधि मंडलों ने ग्लोबल कॉन्क्लेव ऑफ इंटरनेशनल चैंबर्स के लिए अपनी भागीदारी की पुष्टि की है।

इससे पहले 2013 में, कराची चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शिखर सम्मेलन में शामिल होने पहुंचा था लेकिन उसी दौरान जम्मू-कश्मीर के पुंछ के मेंढर सेक्टर में संघर्ष विराम के उल्लंघन में दो भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ जाने व भारत के विरोध के चलते पाकिस्तान का प्रतिनिधिमंडल 12-13 जनवरी को होने वाले मुख्य शिखर सम्मेलन में शिरकत किए बिना ही वापस लौट गया था।

2013 के बाद दो शिखर सम्मेलन और आयोजित हुए हैं जिनमें पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं रहा है. गुजरात सरकार द्वारा जनवरी 2019 में होने वाले वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन में अमेरिका के शीर्ष गैर-सरकारी संगठन यूएसआईएसपीएफ की गुजरात सरकार के साथ भागीदारी है. इस बार के वाइब्रेंट गुजरात में कई शीर्ष अमेरिकी कंपनियों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है

ये वही पाकिस्तान है जिसका Most Favoured Nation (MFN) का दर्जा मोदी सरकार ने अभी तक नहीं छीना है, ये वही पाकिस्तान है जो औसतन हर माह भारत के आठ दस सुरक्षा बल के जवान, सैनिक और नागरिकों की जान लेता रहता है, आये दिन घुसपैठ और हमलों से कश्मीर थर्राया हुआ है। ये वही पाकिस्तान है जिसके आतंकी संगठन दिन रात सीमा पर तांडव करते हैं, ये वही पाकिस्तान है जिसके लिए मोदी जी दावे करते हैं कि ये सुधरने वाला नहीं है, या “सीमा पार आतंकवाद के बीच बातचीत नहीं”, ये फिर भाजपा के शूरवीर हुंकार भरते हैं कि पाकिस्तान पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक किया जाये।

सो सब ठीक है मगर पहले तय तो कीजिये कि आपके लिए पाकिस्तान है क्या ? दुश्मन देश या फिर मोस्ट फेवर्ड नेशन ? आपकी पाक नीति है क्या ? क्या आपका गुस्सा केवल इंटरव्यू तक ही था ? क्या इस तरह पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को भारत में बुलाकर मेज़बानी करने से पाकिस्तान के दांत खट्टे किये जायेंगे ?क्या इस तरह से पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को भारत बुलाकर साढ़े चार सालों में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की भेंट चढ़े सैंकड़ों जवानों और नागरिकों की मौतों का बदला लिया जा रहा है ?

कुछ तो धुंध साफ़ कीजिये, जनता को पाकिस्तान नीति खुल कर बताईये।

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