पुलवामा आतंकी हमले के बाद से देश के कई हिस्सों से कश्मीरियों के साथ मार पीट और प्रताड़ित करने की घटनाएं सामने आ रही है, सोशल मीडिया पर भी कई पोस्ट्स और वीडियोज़ शेयर किये गए हैं जिसमें कश्मीरियों के साथ की जाने वाली हिंसा और प्रताड़ना साफ नज़र आ रही है।

NDTV के अनुसार कश्मीरियों के साथ की जाने वाले इस तरह की हिंसा प्रताड़ना रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और 10 राज्यों को नोटिस जारी किया है, कोर्ट ने कहा है कि राज्यों के नोडल अफसर कश्मीरी और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा तथा भेदभाव को रोकें।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के DGP और मुख्य सचिवों को कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र द्वारा जारी की गई सलाह के मद्देनजर त्वरित कार्रवाई करने को कहा है, इसके अलावा कोर्ट ने कहा है कि उसके इस आदेश को हर जगह प्रसारित किया जाए।

बीते गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एलएन राव और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्वेज की इस बात पर ध्यान दिया था कि इस जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है क्योंकि यह छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

कई राज्यों में कश्मीरियों को प्रताड़ित करने की घटनाएं सोशल मीडिया के ज़रिये सामने आ रही हैं, दो दिन पहले सोशल मीडिया पर नोयडा की एक होटल के बाहर ‘Kashmiri not allowed but dogs are’ लिखे कुछ नोटिस बोर्ड के फोटोज़ भी शेयर किये गए हैं जिसमें कश्मीरियों की एंट्री मना की गयी है, हंगामा होने के बाद वो नोटिस बोर्ड हटा लिया गया था, इसके अलावा कोलकाता में भी एक कश्मीरी युवक की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज में भी कश्मीरी युवकों के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ है, वीडियो में कुछ लोग पुलिस जवानों के सामने ही कश्मीरी युवक की पिटाई कर रहे हैं।

कल ही हरियाणा की पैसेंजर ट्रेन में शाल बेचने वाले दो कश्मीरी युवकों की पिटाई करने और गाली गलौज करते हुए उन्हें धक्का देकर स्टेशन पर उतार दिए जाने का मामला भी सामने आया था. चंडीगढ़ के एक कॉलेज में हिमाचली छात्रों के साथ कश्मीरी छात्रों की झड़प हो गई. बाद में कश्मीरी छात्रों को पुलिस सुरक्षा में घाटी के लिए रवाना किया गया था।

यूपी के सहारनपुर में कुछ हिंदू संगठन के लोगों ने शहर के कुछ कश्मीरी लोगों के घरों के बाहर प्रदर्शन किया और शहर छोड़कर जाने की चेतावनी दी थी।

इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष भारत के अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने बताया कि इस मामले में केंद्र पहले ही सभी राज्यों को advisory (सलाह) जारी कर चुका है।