केरल में बाढ़ से हुई मौतों का आंकड़ा 325 से आगे बढ़ता ही जा रहा है, 9 लाख से ज़्यादा लोग राहत शिविरों में हैं, इन मौतों की संख्या और विस्थापितों से आप इस त्रासदी का अंदाज़ा लगा सकते हैं, इसके बावजूद डिज़ास्टर मैनेजमेंट कल हरकत में आया है और साथ ही केंद्र सरकार को भी होश आया है, तथा बाढ़ राहत के नाम पर पहले 100 और फिर बाद में 500 करोड़ अर्थात कुल 600 करोड़ की राशि की घोषणा हुई है. जबकि केरल के मुख्यमंत्री ने 2000 करोड़ की मदद मांगी है.

मौतों के आंकड़ों को देखते हुए केरल में आयी बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के बजाय इस पर राजनैतिक रोटियां सेंकी जाने लगी हैं. केंद्र सरकार की 600 करोड़ की मदद और राज्य सरकारों द्वारा घोषित की गयी राशियां ऊँट के मुंह में जीरा है.

केंद्र सरकार की ही बात करें तो विज्ञापनों पर खर्च हुई विशाल राशि – प्रधान मंत्री मोदी जी की विदेश यात्राओं – विदेशों में ऋण सहायता राशि के रूप में बांटे गए लाखों डॉलर्स – के सामने केरल की बाढ़ के लिए घोषित राशि नगण्य ही कही जा सकती है.

एक नज़र उनके 40 विदेशी दौरों और खर्च पर

  • RTI के तहत खुलासा हुआ है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 48 महीने के अपने शासनकाल में अब तक 50 देशों से ज्यादा 41 विदेश दौरे किये हैं, और इस यात्रा के दौरान कुल 355 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.
  • अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए विज्ञापनों पर खर्च किये 4343 हज़ारो करोड़.
  • 2015 और 2016 में केवल एक दिन मनाये गए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कुल 50 करोड़ रुपये खर्च किये गए, 2017 और 18 के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.
  • इसके बाद अपने विदेशी दौरों के दौरान विदेशों में line Of credit (ऋण सहायता राशि) के नाम पर लाखों डॉलर्स बांटे हैं वो अलग से हैं : ताज़ा मामला रवांडा का ही लीजिये जहाँ वो बीस गायों के साथ साथ रवांडा को औद्योगिक पार्क और कृषि व सिंचाई के लिए करीब 20 करोड़ डॉलर और प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति कार्यक्रम के लिए करीब 40 करोड़ डॉलर की ऋण सहायता राशि देकर आये हैं.

इसके अलावा पहले विदेशी राष्ट्रों को दी गयी ऋण सहायता राशियां जो याद हैं

  • 1 बिलियन डॉलर्स नेपाल को
  • 1 बिलियन डॉलर्स मंगोलिया को
  • 500 मिलियन विएतनाम को
  • 5 बिलियन डॉलर्स बांग्लादेश को
  • 54 मिलियन डॉलर्स भूटान को
  • 318 मिलियन डॉलर्स श्रीलंका को
  • 1 बिलियन डॉलर्स मलेशिया को
  • 10 करोड़ डॉलर्स सेशल्स को दे चुके हैं.

 

बाक़ी दौरों और दी गयी ऋण सहायता राशियों को छोड़ भी दें तो इन उपरोक्त का टोटल करके देखिये कितनी बड़ी राशि निकल कर आती है मेरे ख्याल से अरबों डॉलर्स हो जाएगी. ऐसी राष्ट्रिय आपदा है में अपनी ही जनता, अपने ही देश के राज्य केरल के लिए सिर्फ 500 करोड़ की सहायता राशि दिया जाना बहुत ही अफसोसनाक है