अति उत्साही गोदी मीडिया की करतूतों ने हमारी वायुसेना के पराक्रम (सर्जिकल स्ट्राइक) को सियासी विवाद का विषय बना डाला।

अति उत्साही गोदी मीडिया की करतूतों ने हमारी वायुसेना के पराक्रम (सर्जिकल स्ट्राइक) को सियासी विवाद का विषय बना डाला।
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26 फ़रवरी को जब पाकिस्तान पर किये गए सर्जिकल स्ट्राइक -2 की खबर सुनकर पूरा देश ख़ुशी और गर्व से झूम रहा था, देश का गोदी मीडिया अपनी TRP के जुगाड़ में लगा हुआ था, दिन चढ़ते चढ़ते ख़बरों और आंकड़ों की मंडी लग गयी, हर न्यूज़ चैनल में इस सर्जिकल स्ट्राइक की अपनी कहानी और आंकड़े पेश करने की होड़ लग गयी।

दिन चढ़ते चढ़ते हर न्यूज़ चैनल्स पर सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए आतंकियों की मौतों की संख्या ब्रेकिंग न्यूज़ होने लगी कोई 200 तो कोई 250 तो कोई 300 तो कोई चैनल 350 तक जा पहुंचा।

आज देश में सर्जिकल स्ट्राइक – 2 पर सियासी उबाल आया हुआ है, आरोप प्रत्यारोप जारी हैं, इसके मूल में जाकर ध्यान से देखें तो देश का यही अति उत्साही गोदी मीडिया पहला ज़िम्मेदार है और उसके बाद उसी मीडिया की ख़बरों का सहारा लेकर राजनैतिक हित साधने वाले नेता लोग।

सर्जिकल स्ट्राइक पर आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश सचिव विजय गोखले ने इस सर्जिकल स्ट्राइक की पुष्टि करते हुए कहा कि इस कार्रवाई में न किसी सिविलियन और न सेना को टारगेट किया गया है बल्कि हमारे निशाने पर आतंकी कैंप थे। गोखले ने कहा कि बालाकोट में इस कैंप को जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर का रिश्तेदार मौलाना यूसुफ अजहर चला रहा था, साथ ही यह एक असैन्य कार्रवाई (non-military pre-emptive action) थी जिसमें सिर्फ आतंकी संगठनों को निशाना बनाया गया है, इस कार्रवाई में किसी नागरिक को नुकसान न हो इसके लिए काफी ऊंचाई से घने जंगलों के बीच इस स्ट्राइक को अंजाम दिया गया है।

हमले वाले दिन 26 फ़रवरी को भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने संख्या के बारे में ये कहा – “इस अभियान में बड़ी संख्या में जैश के चरमपंथियों, प्रशिक्षकों, वरिष्ठ कमांडरों और वहाँ प्रशिक्षण ले रहे जिहादियों को ख़त्म कर दिया गयाबड़ी संख्या में जैश के चरमपंथियों, प्रशिक्षकों, वरिष्ठ कमांडरों और वहाँ प्रशिक्षण ले रहे जिहादियों को ख़त्म कर दिया गया।”

बयान के इस अंश “बड़ी संख्या में जैश के चरमपंथियों, प्रशिक्षकों, वरिष्ठ कमांडरों और वहाँ प्रशिक्षण ले रहे जिहादियों को ख़त्म कर दिया गया।” के बाद गोदी मीडिया का खेल शुरू हुआ।

बिना किसी आधिकारिक आंकड़ों और सूचना के हर न्यूज़ चैनल ने सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए आतंकियों की अनाप शनाप संख्या बताना शुरू किया, जब ये खबरें विदेशी मीडिया तक पहुंची तो इन संख्याओं पर दुनिया के कान खड़े हुए, वैश्विक मीडिया इसकी खोजबीन करने निकल पडी और चौबीस घंटे में ही गोदी मीडिया का झूठ पकड़ा गया।

इसमें संदेह की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं है कि सर्जिकल स्ट्राइक हुआ है, हमारे जांबाज़ों ने LOC पार कर चिन्हित किये गए इलाक़ों पर सफलतापूर्वक बमबारी की आतंकी कैम्प्स पर 1000 किलो बम गिराए और 21 मिनट में अपना मिशन पूरा कर सकुशल लौट आये। इस अभियान में 12 मिराज विमानों ने हिस्सा लिया। हर देश वासी उनके इस पराक्रम को सलाम कर रहा है।

जब पूरा देश इस सर्जिकल स्ट्राइक का जश्न मना रहा था तो अति उत्साही गोदी मीडिया ने अपनी आदत के अनुसार सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए आतंकियों की मौतों के आंकड़ों से खिलवाड़ करना शुरू किया और बात यही से बिगड़ना शुरू हुई, भारतीय मीडिया के इन बड़े बड़े दावों की खोजबीन करने गए विदेशी मीडिया जिसमें अल जज़ीरा, हफिंगटन पोस्ट, बीबीसी, द गार्जियन, वाशिंगटन पोस्ट शामिल थे, को सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत तो मिले मगर इस सर्जिकल स्ट्राइक में गोदी मीडिया द्वारा बताये गए 200 – 350 आतंकियों के मारे जाने के सबूत बिलकुल भी नहीं मिले।

और फिर विवाद शुरू हो गया, गोदी मीडिया के इसी आंकड़े बाज़ी को लेकर Huffington Post ने एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक ही ‘Balakot : Govt Leaves It To Friendly Media To Provide Strike Details’ था, यानी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक के विवरण को अपने तौर पर साबित करने का काम गोदी मीडिया पर छोड़ दिया था।

हफिंगटन पोस्ट ने उस लेख में लिखा है कि ‘पत्रकार बिना किसी आधिकारिक सूचना के सर्जिकल स्ट्राइक का सरकार को राजनीतिक लाभ दे रहे हैं।’ प्रेस कांफ्रेंस में किसी ने मारे गए आतंकियों की संख्या के बारे में सवाल नहीं किये।

आतंकियों के मारे जाने के आंकड़ों की खबरों के बाद सर्जिकल स्ट्राइक वाले स्थान पर विदेशी मीडिया टीमों का पहुंचना जारी रहा BBC ने बालाकोट से अपनी REPORT में इस सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय मीडिया द्वारा मारे गए 200 – 350 आतंकियों की संख्या के बारे में जांच पड़ताल की।

वहीँ क़तर के न्यूज़ चैनल Al Jazeera ने लिखा है कि बुधवार को हमले की जगह जाने के बाद अल जज़ीरा ने पाया कि उत्तरी पाकिस्तान के जाबा शहर के बाहर जंगल और दूर दराज के क्षेत्र में चार बम गिरे थे. विस्फोट से हुए गड्ढे में टूटे हुए पेड़ और जगह-जगह पत्थर पड़े थे, लेकिन, वहां पर किसी भी तरह के मलबे और जान-माल के नुकसान का कोई सबूत नहीं था। स्थानीय अस्पतालों के अधिकारियों और उस जगह पर पहुंचे कई निवासियों ने बताया कि उन्हें भारतीय हमले के बाद वहां कोई शव या घायल लोग नहीं दिखे।”

इसी के साथ प्रतिष्ठित Reuters रायटर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि “वहां हमले से घायल हुआ सिर्फ़ एक ही पीड़ित है, जिसकी दाईं आंख पर हमले के कारण चोट आई हुई है, जाबा में ऊपरी ढालानों की तरफ़ इशारा करते हुए गांवों वालों ने बताया कि यहां चार बमों के गिरने के निशान हैं और चीड़ के पेड़ बिखरे पड़े हैं।”

वैश्विक मीडिया की इन रिपोर्ट्स के बाद ही सर्जिकल स्ट्राइक पर विवाद बढ़ा और इसका मूल कारण था ‘गोदी मीडिया द्वारा अति उत्साह में’ बताये गए मारे गए आतंकियों की संख्या के आंकड़े, गोदी मीडिया इन आंकड़ों का आधार ‘सूत्र’ बताकर बचता रहा मगर उसके पास इन आंकड़ों की पुष्टि के कोई सबूत बिलकुल भी नहीं थे।

1 मार्च, 2019 को जब विदेश सचिव विजय गोखले विदेश मामलों की संसदीय समिति के सामने पेश हुए तो उनसे पूछा गया कि बालाकोट में भारतीय एयर स्ट्राइक में कितने आतंकी मारे गए, तो उनका जवाब था, “बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर 26 फरवरी की सुबह भारतीय वायुसेना के हमले में मारे गए लोगों की संख्या की हम अभी जांच कर रहे हैं। अभी तक हमें पूरी सूचनाएं हासिल नहीं हुई हैं।”

विदेश सचिव का यह बयान उनके उस प्रेस बयान से एकदम विपरीत नजर आता है जो उन्होंने 26 फरवरी को मीडिया के सामने दिया था। उन्होंने कहा था कि, “एयर स्ट्राइक में जैश के आतंकी, उनके ट्रेनर, सीनियर कमांडर और आत्मघाती हमलों के लिए तैयार किए जा रहे जिहादी समूह के काफी संख्या में लोग मारे गए हैं।”

हमारे जवानों के पराक्रम को अपनी TRP का जरिया बनाने के चक्कर में इस गोदी मीडिया ने आतंकियों के मौतों के जो बढ़ा चढ़ा कर आंकड़े दिए है उससे अब सरकार भी बैकफुट पर नज़र आ रही है, सवाल टालने लायक भी नहीं है, अब स्थिति ये है कि कल अमित शाह ने भी सर्जिकल स्ट्राइक में 250 आतंकियों के मारे जाने की बात अपने भाषण में कर डाली तो इससे मामले ने और तूल पकड़ लिया।

अब स्थिति ये है कि सरकार की ओर से आतंकियों की मौतों के आंकड़ों पर रोज़ बयान आ रहे हैं, रोज़ सवाल उठ रहे हैं रोज़ ही डेमेज कंट्रोल किया जा रहा है, मीडिया भी इस डैमेज कण्ट्रोल में लगा है, दो दिन में कुछ इस तरह के ताज़ा बयान आये :-

1. वायुसेना ने सोमवार को मारे गए आतंकियों की संख्या को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था। तब केवल इतना बताया गया कि उनका काम आतंकियों को निशाना बनाना है। वायुसेना का कहना था कि कितने आतंकी मारे गए यह आंकड़ा केवल सरकार ही दे सकती है।

2. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा- बालाकोट में एयर स्ट्राइक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, इसमें नागरिकों को नुकसान नहीं हुआ।

3. सीतारमण का कहना था कि गोखले ने केवल एक बयान दिया था। उन्होंने हमले में मारे गए आतंकियों को लेकर कोई आंकड़ा नहीं दिया था। रक्षा मंत्री का कहना है कि गोखले ने केवल सरकार की स्थिति पर ही वक्तव्य दिया था।

4. पूर्व सेना प्रमुख और विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा कि “250 आतंकियों की मौत आंकड़ा नहीं, बस अनुमान।”

उपरोक्त सभी बिंदुओं से ये बिलकुल स्पष्ट हो जाता है कि यदि गोदी मीडिया आतंकियों की मौतों के आंकड़ों की मंडी न लगाती तो इस सर्जिकल स्ट्राइक पर उठा ये सियासी विवाद इतना न होता जितना इन आंकड़ों के कारण हो रहा है।

और दूसरी बात कि गोदी मीडिया द्वारा परोसे गए आतंकियों की मौतों के इन आंकड़ों की बाजीगरी के पीछे कहीं न कहीं सरकार की मूक सहमति भी रही है, बिना प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सरकारी सहमति के किसी भी देश की मीडिया की इतनी हिम्मत नहीं कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर TRP का खेल खेल जाए, जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर जाए, मीडिया और सरकार के इसी खेल के चलते आज हमारे जांबाज़ वायुसैनिकों के इस पराक्रम (सर्जिकल स्ट्राइक) पर सियासी तूफ़ान उठ खड़ा हुआ है जो कि विचलित करने वाला है।

गोदी मीडिया से करबद्ध निवेदन है कि भविष्य में देश के जवानों के ऐसे पराक्रम को अपनी TRP की हवस का जरिया कभी न बनाये।

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