जानिये कि ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से क्या और क्यों छुपा रहे हैं।

राफेल और ज्वलंत मुद्दों पर घिरी सरकार ने लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान होते ही देश के सभी बुनियादी मुद्दों से पीछा छुड़ाने की तिकड़में करना शुरू कर दीं, और पुलवामा हमले के बाद, सर्जिकल स्ट्राइक और पायलट अभिनन्दन के बहाने राष्ट्रवाद और सेना को ढाल बना कर उसके पीछे छुप गए और फिर वहां से एक नारा दिया कि ‘मैं भी चौकीदार’।

प्रचार तंत्र और मीडिया के ज़रिये इस नारे को अभियान का रूप दिया गया, भक्त और समर्थक कैमरों के सामने ‘मैं भी चौकीदार’ के टेटू गुदवाने लगे, इस अभियान को इस तरह से पेश किया जाने लगा जैसे ये सब चौकीदार कोई जादू मंतर कर देश की सभी समस्याएं चुटकियों में सुलझा देंगे, दरअसल ये प्रपंच इसलिए किये जा रहे हैं ताकि देश की जनता मौलिक मुद्दों से भटक जाए।

राष्ट्रवाद और साम्प्रदायिकता इनके दो मुख्य हथियार हैं जिससे ये देश में वोटों की फसल काटते हैं, पुलवामा हमले के बाद प्रचार तंत्र और गोदी मीडिया के सहारे जो लहर पैदा की गयी, वो जल्दी दम तोड़ गयी, राफेल का जिन्न लगातार पीछा करता रहा, ‘चौकीदार चोर है’ का नारा लगता रहा, तो अब उसके काउंटर में जनता को आगे कर सभी को चौकीदार बनाने का खेल खेला गया, ये सब किसलिए ?

क्यों बेरोज़गारी, नारी सुरक्षा, किसानों की आत्महत्याएं, विफल कश्मीर नीति, विफल पाक नीति, बड़े बैंक घोटाले, छात्रों में असंतोष, कुपोषण, गिरता रुपया, गिरती GDP, काले धन, शहीद होते सैनिकों की बढ़ती संख्या, बढ़ते पाकिस्तानी आतंकवाद जैसे मुद्दों पर कोई बात नहीं होती ?

वजह साफ़ है ये लोग राष्ट्रवाद, साम्प्रदायिकता, सैन्य पराक्रम का श्रेय, मंदिर-मस्जिद आदि जैसे मुद्दों के पीछे छुपकर उपरोक्त मुद्दों से या कह सकते हैं कि अपनी पांच साल की उपलब्धियों की विफलता से बचना चाहते हैं, ये लोग मैं भी चौकीदार का लॉलीपॉप देकर जनता को उनसे जुड़े मुद्दों से बहुत दूर ले जा रहे हैं।

आगे जानिए कि ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से क्या क्या छुपा रहे हैं :-

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि इस समय भारत विश्व में सबसे ज़्यादा बेरोज़गारों का देश है

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि 5 साल में 2 करोड़ लोग बेरोजगार हुए

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि मोदी राज में बेरोजगारी ने 45 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है,केवल 2018 में ही नयी नौकरियां देना तो दूर उसके उलट 1.10 करोड़ नौकरियां ख़त्म हो गयीं, नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेश यानी एनएसएसओ की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है, इस रिपोर्ट को मोदी सरकार सार्वजनिक नहीं कर रही है।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ का जुमला उछलने वाली मोदी राज में एशिया के टॉप 5 भ्रष्ट देशों में भारत का स्थान सबसे ऊपर है, जबकि पाकिस्तान हमसे कम भ्रष्ट है।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि वर्ल्ड ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ 2018 की रिपोर्ट में भारत की स्थिति नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से भी खराब है।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि प्रेस की स्वतंत्रता (विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक) के इंडेक्स में भारत की रैंकिंग (138) लगातार खराब होती जा रही है । यहाँ तक कि वो अफगानिस्तान (120), मालद्वीप (117), नेपाल (100) और भूटान (84) से भी पीछे हैं।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि ‘इन्‍क्‍लूसिव डेवलपमेंट इंडेक्‍स’ (समेकित विकास सूचकांक) में भारत को 62वां स्‍थान मिला है, इस मामले में भी भारत पाकिस्तान और चीन से पिछड़ गया है

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि भारत ‘वैश्विक लोकतंत्र सूचकांक’ में पिछड़कर 42वें पायदान पर आ गया है, यानी चार मापदंडों- राजनीतिक संस्कृति, सरकार का कामकाज, राजनीतिक भागीदारी और नागरिक स्वतंत्रता की हालत ख़राब है, इसकी वजह रूढ़िवादी धार्मिक विचारधाराओं के बढ़ने और अल्पसंख्यकों व अन्य असहमत आवाजों के खिलाफ बढ़ती भीड़ की हिंसा बताई गई है

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि 2018 के ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स’2018 में भारत 156 देशों की सूची में 133 वे स्थान पर अपने पडोसी पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों से पिछड़ा हुआ था

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि 2019 के ताज़ा ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग और भी गिरकर 140वे स्थान पर पहुँच गयी है, पाकिस्तान और  बांग्लादेश इस मामले में हमसे बेहतर हैं

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि भारत विश्व में महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश बन गया है, सीरिया दूसरे और अफगानिस्तान तीसरे नंबर पर हैं।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने 2016, 2017 और 2018 के किसानों की आत्महत्या के आंकड़े जारी नहीं किए हैं, केवल 2014-15 के आंकड़े उपलब्ध हैं।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि प्रधान मंत्री मोदी ने साढ़े चार साल में अपनी विदेश यात्राओं पर 2000 करोड़ खर्च कर डाले

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि मोदी सरकार ने अपने प्रचार पर 5,245.73 करोड़ जैसी भारी भरकम राशि उड़ा डाली।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि मोदी सरकार के कार्यकाल में सरकारी बैंकों का NPA 322 फीसदी कैसे और क्यों बढ़ गया

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि सीएजी (CAG report) में मोदी सरकार ने चार लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च और कर्ज यानी उधारी छिपाने का काम किया है।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद किसानों की आत्महत्या की दर 42 फ़ीसदी बढ़ गई है।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि जब ये चौकीदारी कर रहे थे तो विजय माल्या, मेहुल चौकसे और नीरव मोदी जैसे लोग भारतीय बैंकों को अरबों का चूना लगाकर एक के बाद एक कैसे निकलते गए।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि 2014 के बाद मोदी सरकार के सत्ता में आते ही देश के मुस्लिम, दलित और अन्य अल्पसंख्यक समूहों पर स्वघोषित गौरक्षक समूहों की ओर से होने वाले हमले तेजी से बढ़े हैं, 2015 से 2018 के दौरान ऐसे मामलों में 44 लोगों की मौत हुई, जिसमें से 36 मुस्लिम थे।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा द्वारा भाजपा के बड़े नेताओं समेत कई लोगों को 1800 हज़ार करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई।

ये सब चौकीदार मिलकर देश की जनता से ये छुपा रहे हैं कि जनता के सामने ‘घुस कर मारूंगा’ का नारा देने वालों ने पाकिस्तानी पीएम इमरान खान को पाकिस्तान दिवस के अवसर पर बधाई संदेश भेजा है।

इसलिए अब जब भी कभी चुनावी सभाओं में रैलियों में ‘मैं भी चौकीदार’ का नारा, घुस कर मारने का नारा, सैन्य पराक्रम का श्रेय लेने का नारा, सर्जिकल स्ट्राइक का नारा, अभिनन्दन का नारा लगाते देखें तो उपरोक्त बातों को याद रखें कि इन नारों के पीछे देश की जनता से जुड़े, आपसे, जुड़े किसानों, युवाओं, महिलाओं और बेरोज़गारों से जुड़े मुद्दे कुचले जा रहे हैं।

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