सियासी गिद्धों ने सत्ता के लिए रामभक्त गोपाल जैसे लाखों आवारा, दिशाहीन, ब्रेन वॉश ज़ोम्बी तैयार कर दिए हैं।

कुछ ज़्यादा ही डिजिटल हो चुके न्यू इंडिया में सुलभ इंटरनेट, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी पर दुष्प्रचार और नफ़रतें परोसती वायरल होती लाखों ज़हरीली पोस्ट्स ने देश में हज़ारों लाखों रामभक्त गोपाल जैसे आवारा, दिशाहीन, ब्रेन वॉश ज़ोम्बी तैयार कर दिए हैं, ये अनजाने में ही सियासी गिद्धों के औज़ार बन रहे हैं। ये शिकार हुआ है शाहीन बाग़ के खिलाफ किये जा रहे दुष्प्रचार और नफरत का, अभी चार दिन पहले ही अनुराग ठाकुर ने भीड़ से नारा लगवाया था कि ‘देश के गद्दारों को ? ….. भीड़ ने नारा लगाया था ‘गोली मारो सालों को।’ और एक ज़ोम्बी पिस्तौल लेकर ‘तय कर दिए गए’ दुश्मनों को गोली मारने आ खड़ा हुआ।

सोशल मीडिया पर लाइव आकर एक बेक़ुसूर मज़दूर अफ़राज़ुल को सरे आम क़त्ल करने देने वाला शम्भुलाल रैगर किसे याद नहीं है, वो भी इसी गिरोह की नफरती मुहिम का मोहरा बना था, उस वक़्त ‘लव जिहाद’ प्रोपेगंडा चरम पर था। पकडे जाने पर उसके समर्थन में खूब रैलियां निकाली गयीं, चंदे किये गए और उसे एक ‘एंटी लव जिहाद’ हीरो की तरह पेश किया गया। रामनवमी पर उसकी झांकियां तक निकाली गईं।

सियासी भेड़ियों को अपने राजनैतिक हितों को साधने के लिए रामभक्त गोपाल और शंभूलाल रैगर जैसे ही ब्रेन वॉश, आवारा-बेरोज़गारों का झुण्ड चाहिए होता है, नेता लोग भीड़ से क्यों नारा लगवाते हैं कि गोली मारो सालों को ? खुद क्यों नहीं गए गोली मारने ? है हिम्मत तो पिस्तौल लेकर पहुंचिए अपने तय कर दिए दुश्मनो तक और दो चार को गोली मार कर उदाहरण पेश तो कीजिये। ये सभी जानते हैं कि नेता जी ये कभी भी नहीं करेंगे क्योंकि उनके लिए औज़ार के तौर पर काम आने वाले हज़ारों लाखों बेरोज़गार, आवारा ब्रेन वॉश गुंडों की भीड़ है जो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में इन्ही कामों के लिए तैयार किये गए हैं।

इन रामभक्त गोपालों और शंभूलाल रैगरों ने कभी ये क्यों नहीं सोचा कि जो काम ये कर रहे हैं वही काम इन्हे उकसाने और भड़काने वाले नेताओं की औलादों ने क्यों नहीं किया ? क्यों कोई किसी भी नेता का लड़का, भांजा, भतीजा सड़कों पर तांडव करने नहीं निकलते ? ये सब इसलिए नहीं सोच सकते कि इन्हे सोशल मीडिया और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी द्वारा परोसे गए गए ज़हर ने मानसिक रूप से अपाहिज बना दिया और ब्रेन वॉश कर दिया है कि इन्हे ये सब सोचने का मौक़ा ही नहीं दिया जाता।

थोड़ा और पीछे चलते हैं गुजरात दंगों और अशोक मोची उर्फ़ अशोक परमार का नाम याद कीजिये, ये उस समय कट्टर हिंदुत्व का पोस्टर बॉय बना हुआ था, आज उसकी हालत गुजरात के लोग अच्छी तरह से जानते हैं। CPM के सहयोग से अशोक ने अहमदाबाद के दिल्ली दरवाज़ा BRTS बस स्टॉप के पास “एकता चप्पल घर” नाम से दुकान खोली है।

मज़े की बात यह है कि अशोक ने दुकान का उद्घाटन करने के लिए 2002 दंगे में पीड़ितों का चेहरा बने कुतुबुद्दीन अंसारी और हसन शहीद दरगाह मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल क़दीर पठान को आमंत्रित किया था।

उन्हें कभी भी विश्व हिन्दू परिषद या किसी अन्य संगठन का कोई सहयोग नहीं मिला। वह आर्थिक तंगी के चलते विवाह नहीं कर पाए और सोने के लिए उन्हें घर की जगह फुटपाथ नसीब हुआ। फुटपाथ पर सोते हुए देखने के बाद डी देसाई स्कूल के प्रिंसिपल ने रात को स्कूल में सोने की उन्हें जगह दे दी। अशोक के रात का वही ठिकाना है।

कभी सरकार के लिए इस्तेमाल हो जाने वाले अशोक को एकाएक उससे इतनी नाराज़गी हो गयी कि 2002 के बाद उन्होंने कभी वोट ही नहीं किया।

आज जिस रामभक्त गोपाल को पकड़ा गया है वो शायद इन्ही सियासी भेड़ियों द्वारा इस्तेमाल कर फेंक दिए गए अशोक मोची के बारे में नहीं जानता होगा, अगर जानता होता तो ये क़दम कभी नहीं उठाता।

मगर ये अंत नहीं है, इन सियासी भेड़ियों की नफरती फैक्ट्रियों ने ऐसे हज़ारों लाखों रामभक्त गोपाल जैसे आवारा, दिशाहीन, ब्रेन वॉश ज़ोम्बी तैयार कर दिए हैं, नहीं माने तो आज अभी रामभक्त गोपाल वाली खबर के पोर्टल्स पर जाकर इन ज़ोम्बियों के कमेंट्स देख सकते हैं और कमेंट्स करने वालों के प्रोफाइल्स देखकर तय कर सकते हैं कि ये ब्रेन वॉश झुण्ड कितनी तेज़ी से वायरस की तरह बढ़ रहा है।

जब तक भीड़ इन शातिर सियासी गिद्धों का औज़ार बनती रहेगी खून के प्यासे ऐसे हज़ारों आवारा, दिशाहीन, ब्रेन वॉश ज़ोम्बी रोज़ तैयार होते रहेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close