सफाई कर्मियों के 549 पदों के लिए 7000 इंजीनियर्स और ग्रेजुएट्स ने आवेदन किया।

सफाई कर्मियों के 549 पदों के लिए 7000 इंजीनियर्स और ग्रेजुएट्स ने आवेदन किया।
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हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार का वादा करने वाले प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में साल 2018 में एक करोड़ 10 लाख नौकरियां खत्म हो गईं, आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया के सबसे ज्यादा बेरोजगारों का देश बन गया है, हर रोज 550 नौकरियां खत्म हो रही हैं, 12 करोड़ लोग बेरोजगार हैं और इनकी संख्या हर रोज़, हर माह, हर साल बढ़ती ही जा रही है

आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारों में शिक्षित युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है, जिसमें 25% 20 से 24 आयुवर्ग के हैं, जबकि 25 से 29 वर्ष की उम्र वाले युवकों की तादाद 17% है. 20 साल से ज्यादा उम्र के 14.30 करोड़ युवाओं को नौकरी की तलाश है, विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती बेरोजगारी का यह आंकड़ा गहरी चिंता का विषय है।

देश में बढ़ती भयावह बेरोज़गारी का उदाहरण कोयंबटूर में देखने को मिला जहाँ नगर निगम में सफाई कर्मियों के 549 पदों के लिए 7,000 इंजीनियर्स और ग्रेजुएट्स ने आवेदन किया है।

सूत्रों ने बताया कि निगम ने 549 ग्रेड -1 सेनेटरी के पदों के लिए आवेदन मांगे थे और 7,000 आवेदकों ने तीन दिवसीय साक्षात्कार और प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए आवेदन किया था।

Hindustan Times की खबर के अनुसार डाक्यूमेंट्स सत्यापन में यह पाया गया कि लगभग 70 प्रतिशत उम्मीदवारों में से अधिकांश इंजीनियर, स्नातकोत्तर, स्नातक और डिप्लोमा धारक थे।

कई ग्रेजुएट्स आवेदकों को योग्यता के अनुसार नौकरी नहीं मिली थी और वो लोग निजी फर्मों में घर चलाने के लिए सिर्फ 6,000-7,000 रुपये प्रतिमाह जैसे न्यूनतम वेतन पर के 12 घंटे तक बिना नौकरी की सुरक्षा के काम कर रहे हैं।

दूसरी ओर सफाई कर्मियों की नौकरी सरकारी होती है और उन्हें सुबह के तीन घंटे और शाम के तीन घंटे के काम के समय के साथ लगभग 20,000 रुपये का वेतन मिलता है, इस बीच के अवकाश के दौरान उन्हें दूसरे काम करने के ऑप्शन भी रहते है।

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