कर्नाटक के स्कूल में CAA विरोधी नाटक के कारण एक बच्ची की माँ की गिरफ़्तारी के बाद बच्ची का रो-रो कर बुरा हाल।

कर्नाटक के स्कूल में CAA विरोधी नाटक के कारण एक बच्ची की माँ की गिरफ़्तारी के बाद बच्ची का रो-रो कर बुरा हाल।
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कर्नाटक के बीदर की एक 11 वर्षीय छात्रा आयशा* (बदला हुआ नाम, जो अपने पडोसी के पास रह रही है) से पुलिस ने तीन बार पूछताछ की है, क्योंकि उसकी विधवा माँ को उसके स्कूल में खेले गये CAA विरोधी नाटक के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और वो जेल में है।

THE NEWS MINUTE की खबर के अनुसार आयशा अपनी माँ को याद करके रोने लगती है और कहती है कि उन्हें वापस ला दो।

आयशा कर्नाटक के बीदर जिले के शाहीन प्राइमरी और हाई स्कूल में पुलिस द्वारा बनाये गए अस्थाई ‘पूछताछ’ के कमरे से निकलती है। स्कूल के प्रवेश द्वार के पास एक छोटे से कमरे पर एक सप्ताह पहले क़ब्ज़ा कर पूछताछ केंद्र बना लिया गया है जहाँ पुलिस अधिकारियों द्वारा क्लास में छात्रों और शिक्षकों से दो सप्ताह पहले CAA विरोधी मंचित नाटक में उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की जा रही है।

“मैंने उनके (पुलिस) सवालों के जवाब दिए लेकिन फिर भी मेरी माँ को गिरफ्तार कर लिया गया। मुझे नहीं पता कि वह कब वापस आएगी।” कहते हुए 11 साल की आयशा की आँखों से आंसू बहने लगे। पुलिस ने उसकी माँ, नज़बुन्निसां , और स्कूल में एक हेड-टीचर, फरीदा बेगम को 30 जनवरी को CAA विरोधी मंचित नाटक की वजह से देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था। आयशा तब से अपने पड़ोसी के पास रह रही है क्योंकि उसकी माँ विधवा है और उसके कोई भी करीबी रिश्तेदार बीदर में नहीं रहते हैं।

आयशा कहती है कि “मैं अपनी माँ के जेल जाने के बाद से अपने पड़ोसी के साथ रह रही हूं। मेरे पास वह सब कुछ है जिसकी मुझे जरूरत है लेकिन मैं सिर्फ यही चाहती हूं कि मेरी माँ वापस आ जाए।”

स्कूल में छात्रों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के बारे में पढ़ने के लिए कहा गया था और 21 जनवरी को दर्शकों के सामने इसे एक नाटक के रूप में दर्शकों के सामने पेश करने को कहा गया था। इस नाटक में कक्षा 4, 5, और 6 के छात्रों के एक समूह ने प्रस्तुति दी थी।

लेकिन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के एक कार्यकर्ता द्वारा कथित रूप से प्रधानमंत्री मोदी का अपमान करने के लिए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, इसके बाद 26 जनवरी को बीदर में पुलिस ने स्कूल प्रबंधन पर बीदर न्यू टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी में देशद्रोह का आरोप लगाया।

इस नाटक में शामिल छात्रों से सवाल करने के लिए बीदर के पुलिस अधीक्षक बसवेश्वरा हीरा के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों ने चार बार शाहीन स्कूल का दौरा भी किया।

आयशा कहती हैं, “हमसे पूछा गया कि हमने कैसे अभ्यास किया, और मैंने जवाब दिया कि हमें ज्यादा अभ्यास करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हमें सिर्फ पॉइंट्स ही याद रखने थे।” “तब पुलिस ने हमसे पूछा कि CAA के लिए कागज़ात मांगने वालों को चप्पल से पीटना सही है ग़लत ? हमने जवाब दिया कि यह गलत था। अंत में मुझसे पूछा गया कि क्या मैं नाटक में कहा गया दोहराती हूं ? मैंने कहा कि नहीं। भले ही मैंने उनके सवालों का सच्चाई से जवाब दिया, लेकिन फिर भी मेरी माँ को गिरफ्तार कर लिया गया।”

दो गिरफ्तारियों की दायर रिमांड रिपोर्ट में पुलिस ने स्कूल और दो महिलाओं पर “CAA और NRC के बारे में गलत जानकारी फैलाने” की कोशिश के आरोप के साथ ही “नाबालिग बच्चों को यह बताने के लिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चप्पल से मारना चाहिए” के आरोप लगाए गए हैं।

रिमांड एप्लिकेशन में दावा किया गया है कि लड़की ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि उसकी मां नज़बुन्निसां ने आयशा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयान देने के लिए कहा था, जब वह घर पर नाटक के लिए अभ्यास कर रही थी। हालांकि बच्ची साफ कहती है कि ऐसा नहीं है।

पिछले दो हफ्तों में सामने आई घटनाओं के क्रम को याद करते हुए स्कूल में छात्रों और कर्मचारियों को यह बताने के लिए संकोच हो रहा है कि पुलिस अधिकारी लगातार छात्रों से सवाल करने के लिए स्कूल में क्यों घूम रहे हैं। ”स्कूल के CEO तौसीफ मदिकेरी कहते हैं “नज़बुन्निसां ने नाटक में उस विशेष पंक्ति ‘CAA के लिए कागज़ात मांगने वालों को चप्पल से पीटने’ के लिए पहले ही एक टेलीविजन चैनल पर माफी मांगी। लेकिन पुलिस स्कूल में लगातार हंगामा कर रही है और छात्रों को कक्षा में नहीं आने दे रही है। यह किसी भी तरह से उचित नहीं है।

तौसीफ का कहना है कि पुलिस स्कूल में कर्मचारियों और छात्रों से एक ही सवाल पूछ रही है – “नाटक की स्क्रिप्ट किसने बनाई ? इन संवादों को कहने के लिए आपको किसने कहा ? क्या किसी शिक्षक ने यह सिखाया ?”

“यह उन 9 या 10 साल के छात्रों और उनके माता-पिता का मानसिक उत्पीड़न है। नाटक में हिस्सा लेने वाले कुछ छात्रों ने इस वजह से स्कूल आना ही बंद कर दिया है। क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारा ये अल्पसंख्यक संस्थान हैं ? ”

तौसीफ आगे कहते हैं कि यह संस्थान 31 साल पहले स्थापित किया गया था और कर्नाटक में अच्छी तरह से जाना जाता है। इसमें 8 राज्यों में 40 केंद्र हैं, जिनमें 16,000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं। पिछले साल MBBS पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संस्थान के 327 छात्रों ने NEET परीक्षा उत्तीर्ण की थी। संस्था को शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए 2013 में राज्योत्सव पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

जब बीदर के पुलिस अधीक्षक बसवेश्वरा हीरा से पूछा गया कि चौथी बार स्कूल वापस आना क्यों जरूरी हो गया ?, तो उन्होंने कहा, “हम प्रक्रिया के अनुसार जांच कर रहे हैं और हम अभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। हम सबूत इकट्ठा कर रहे हैं कि उस नाटक के बारे में जानकारी और कर्मचारियों और छात्रों की भूमिका क्या थी।”

यह पूछे जाने पर कि क्या इस तरह के मामले में भी देशद्रोह लागू होता है, डीएसपी ने कहा, “मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता, जांच जारी है।

तौसीफ कहते हैं कि पुलिस गिरफ्तारी और बार-बार छात्रों से पूछताछ कर हमारे बीच डर पैदा कर रही है लेकिन हम स्कूल के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के आरोप के खिलाफ क़ानूनी लड़ाई लड़ेंगे। ”

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