देश में मॉब लिंचिंग रुकने का नाम नहीं ले रही है, गौ रक्षा के नाम पर 26 – 27 मुसलमानों को क़त्ल कर देने के बाद भी गुंडे गौ रक्षकों को सत्ता से मिले संरक्षण और अभयदान की वजह से इस गिरोह के हौंसले दिन प्रतिदिन बुलंद होते जा रहे हैं, यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी राज्य सरकारों खासकर भाजपा शासित सरकारों ने कोई ठोस क़दम नहीं उठाया है। और इसी के चलते हरियाणा में फिर से एक मुसलमान गौ पालक उस्मान मोहम्मद इन गुंडों के खूनी और नफरती एजेंडे की भेंट चढ़ गया, शुक्र ये रहा कि समय रहते सिविल सोसाइटी के एक्टिविस्ट्स के पहुँचने से उसकी जान बच गयी।

First Post के अनुसार 19 जनवरी का वो दिन नौशाद मोहम्मद के लिए आम दिनों की तरह ही था, वो पिक अप जीप में अपनी भैंसों को बेचने लेकर जा रहा था तभी रोहतक के भनौत गाँव के पास एक व्यक्ति जसपाल गुमाना ने स्कूटर से उसका पीछा शुरू किया और उसे रुकवाया, जैसे ही नौशाद ने अपनी पिक अप रोकी जसपाल ने शोर किया कि “गौ तस्कर, गौ तस्कर”, उसका शोर सुनकर गांव के कई युवक लाठियां लेकर दौड़े आये और नौशाद को खम्बे से बांधकर बुरी तरह से पीटा और एक ने अपनी बीड़ी से उसके शरीर को जगह जगह से जलाया भी।

नौशाद मोहम्मद का कहना है कि दो घंटे तक वो गुंडे उसे बुरी तरह से पीटते रहे, वो लहू लुहान हो गया, उसके बाद पुलिस आयी और उसे पकड़ कर थाने ले गयी और वहां चैन से बाँध दिया।

बुरी तरह से घायल और लहू लुहान उस्मान को चैन से बांधकर ज़मीन पर बैठाया गया था, उस्मान के कहने के बाद भी पुलिस वाले उसे किसी डॉक्टर के पास नहीं ले गए। वो उसी घायल अवस्था में चैन से बंधा थाने के फर्श पर रात भर बैठा रहा।

नौशाद मोहम्मद के शरीर पर चोटों और बीड़ी से जलने के निशान.

उसके साथ हुई मारपीट के घटना की खबर एक सिविल सोसाइटी और डेयरी मालिक सुनील कुमार के पास पहुंची तो वो लोग थाने पहुंचे और नौशाद के साथ हुई मारपीट और अन्याय के बाबत पूछताछ की, जब सोसाइटी के लोग वहां पहुंचे तो मारपीट का मुख्य आरोपी जसपाल गुमाना थाने में कुर्सी पर बैठा चाय पी रहा था, और नौशाद चैन से बंधा फर्श पर बैठा था।

वकील राजकुमारी दहिया का कहना है कि जब वो लोग थाने पहुंचे तो नौशाद अर्ध मूर्छित था, सभी एक्टिविस्ट्स नौशाद को डॉक्टर के पास लेकर गया और उसका इलाज कराया।

चरखी दादरी में डेयरी चलाने वाल सुनील कुमार कहते हैं कि नौशाद उनकी डेयरी पर 10 साला से काम कर रहा है, मैंने उसे भैंसें खरीदने और बेचने के लिए ही काम पर रखा था, और जिस दिन उसकी पिक अप रुकवाई गयी उस पिक अप में एक भैंस और उसके दो बच्चे ही थे, कोई गाय या बछड़ा नहीं था।

ये मामला सिविल सोसाइटी के एक्टिविस्ट्स और डेयरी मालिक सुनील कुमार के संज्ञान में आ जाने के बाद आखिर में थाना इंचार्ज मंजीत का कहना है कि उन्होंने जसपाल गुमाना और ग्रामीणों के खिलाफ धरा 323 341 342 और 506 के तहत केस दर्ज कर लिया है मगर साथ ही नौशाद मोहम्मद के खिलाफ भी पशु क्रूरता अधिनियम – 1960 और हरियाणा गौवंश सरंक्षण एवं गौ संवर्धन एक्ट – 2015 के तहत केस दर्ज किया गया है।

सिविल सोसाइटी के एक्टिविस्ट्स

इस घटना से फिर साफ़ हो गया है कि भाजपा शासित राज्यों में गौ रक्षा का ये ढोंग या कह सकते हैं कि नफरती एजेंडा सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश ही है, जिसे सत्ता के साथ पुलिस का भी संरक्षण प्राप्त है, बिना किसी आधार के गौ पालक मुसलमानों को ये गौ रक्षक गुंडे कहीं भी गौ तस्करी या गौ वध का आरोप लगाकर या तो जान से मार देते हैं या फिर पीट पीट कर लहू लुहान कर दते हैं, अलवर में रकबर खान के साथ भी ऐसी मारपीट हुई थी और उसके बाद पुलिस का भी ठीक यही रवैया रहा था, रकबर खान को डॉक्टर के पास ले जाने के बदले पहले गायों को संभाला गया उन्हें गौ शाला पहुँचाया गया तब तक थाने में बैठा घायल रकबर खान दम तोड़ चुका था।