Google,, Uber, Amazon, flipkart, facebook, Microsoft और  Amazon जैसे तकनीकी दिग्गजों के साथ काम करने वाले भारतीय और भारतीय मूल के पेशेवरों ने नए धर्म-आधारित नागरिकता कानून (CAA) और नागरिकों के नियोजित राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) के खिलाफ एक खुला पत्र लिखा है और इसे “फासीवादी” कहा है।

The Week की खबर के अनुसार इन सभी भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों ने सुंदर पिचाई, सत्या नडेला और मुकेश अंबानी जैसे व्यापारिक नेताओं से “भारत सरकार द्वारा फासीवादी कृत्यों को रोकने और सार्वजनिक रूप से निंदा करने” का आग्रह किया।

ऑनलाइन प्रकाशन मंच मीडियम पर ‘TechAgainstFascism’ ‘फासीवाद के खिलाफ प्रौद्योगिकीविद्’ के पत्र में भी नेताओं से “सरकार की सनक” पर इंटरनेट बंद करने से इंकार करने और यह सुनिश्चित करने के लिए आग्रह किया गया है कि सामग्री को संतुलित करने का काम ऐसा न हो कि उसमें सरकार का पक्ष नज़र आये।

सैन फ्रांसिस्को में तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने उस पत्र में लिखा  “हम प्रौद्योगिकी उद्योग के इंजीनियर, शोधकर्ता, विश्लेषक, और डिजाइनर फासिस्ट भारतीय सरकार और नागरिकों पर लागू होने वाली क्रूरता की निंदा करते हैं। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्य प्रायोजित क्रूरता को तुरंत रोकना चाहिए।”

पत्र में कहा गया है, “CAA 2019 को NRC से जोड़े जाना एक गहरी मुस्लिम-विरोधी योजना है जो मुसलमानों के लिए अधिक वैधानिकता और वैश्विक असमानता पैदा करेगी।”

इस विरोध पत्र में तकनीकी विशेषज्ञों ने सुंदर पिचाई (Alphabet Inc’s), सत्य नडेला (Microsoft), मार्क जुकरबर्ग (facebook), जैक डोरसी (twitter), दारा खोस्रोशाही (Uber), मुकेश अंबानी (Jio), गोपाल विट्टल (Bharti Airtel), कल्याण कृष्णमूर्ति (flipkart), और शांतनु नारायण (Adobe) से आग्रह किया है कि भारत सरकार द्वारा लिए जा रहे फासीवादी कृत्यों को रोकने और सार्वजनिक रूप से निंदा करने के लिए आगे आएं।

पत्र में कहा गया है कि चरम बेरोजगारी, चौपट अर्थव्यवस्था, और बढ़ती किसान आत्महत्याओं के साथ देश में सबसे बड़े सामाजिक-आर्थिक संकटों पर अपनी नाकामी को छुपाने के लिए सरकार इस तरह के अति-राष्ट्रवादी और विभाजनकारी रणनीति अपना रही है। इन कर्मचारियों ने यह भी लिखा है कि ये विचार उनके खुद के हैं और उनके नियोक्ताओं से इसका कोई लेना-देना नहीं है।

यह विरोध ऐसे समय में आया है जब देश भर के हजारों भारतीय संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और नियोजित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) का विरोध कर रहे हैं। कई मौकों पर ये विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए और पुलिस के साथ झड़पों में लगभग 20 लोग मारे गए और कई घायल हो गए।