डॉक्टर बिना बेहोश किये ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन करते रहे, मरीज़ दीनी किताब पढता रहा.

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राजस्थान के अजमेर में एक ऐसा ऑपरेशन हुआ है जिसकी चर्चा विश्व में हो रही है, Follow News के मुताबिक राजस्थान जिले के अजमेर के रहने वाले 40 साल के अब्दुल को पिछले कुछ दिनों से अक्सर सिर में दर्द की शिकायत थी, सर में तेज दर्द से परेशान अब्दुल ने इसे लेकर डॉक्टर्स को दिखाया.

न्यूरोसर्जन डॉक्टर सूर्या चौधरी ने जाँच कर पता लगाया कि मरीज अब्दुल को सिर के बिल्कुल केंद्र में (जिसे मेडिकल की भाषा में Broca’s Area कहा जाता है) ट्यूमर था और उसकी वजह से उसको सुनाई देना भी कम होता जा रहा था और इसी ट्यूमर की वजह से ही अब्दुल को सिर में तेज दर्द की शिकायत रहती थी.

डॉक्टर्स ने अब्दुल को ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन की सलाह दी, उसके राज़ी हो जाने के बाद 7 फरवरी को अजमेर के एक अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉक्टर सूर्य प्रकाश चौधरी और उनकी टीम ने अब्दुल का ऑपरेशन किया. और इस ऑपरेशन के लिए उसे बेहोश नहीं किया गया बल्कि सबसे अहम् बात ये रही कि इस ऑपरेशन के दौरान अब्दुल ‘आसान नमाज़ और तरीक़ा-ए-फातिहा’ नाम की किताब को पढ़ता रहा, और बीच बीच में डॉक्टर्स उससे बातें भी करते रहे.

हालाँकि कई इंग्लिश और हिंदी वेब साइट्स ने उस किताब को क़ुरआन बताते हुए हेड लाइन दी है कि ‘मरीज़ को बेहोश किये बिना ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन किया गया और मरीज़ क़ुरआन पढ़ता रहा’, जबकि ये गलत है अब्दुल के हाथ में क़ुरआने पाक न होकर ‘आसान नमाज़ और तरीक़ा-ए-फातिहा’ नाम की किताब थी, जिसमें से शायद अब्दुल ऑपरेशन के वक़्त किसी आयत को पढ़ रहा था.

ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर डॉ सूर्या भी कहते हैं कि साइंस में इस तरह की घटना को ज्यादा गंभीर नहीं माना जाता लेकिन कहीं ना कहीं लोगों के मन में आस्था रहती है और उससे ही इंसान को ऐसे मुश्किल वक़्त में मजबूती मिलती है. बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के बाद मरीज अब्दुल एकदम स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है.

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