मुस्लिम देशों में बलात्कारियों के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस, जानिये दुनिया के अन्य देशों में बलात्कारियों को दी जानी वाली सज़ाएँ।

निर्भया काण्ड के बाद देश में बलात्कार के खिलाफ कड़े क़ानूनों की वकालत की गई थी, और इसी के चलते 2018 में केंद्रीय कैबिनेट ने क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस-2018 को मंजूरी दी थी जिसके तहत महिलाओं के साथ बलात्कार की 7 साल की सजा को बढ़ाकर 10 साल तक की कठोर कारावास की सजा का प्रावधान किया गया था और 12 साल से कम उम्र की मासूमों से रेप के दोषियों को मौत की सजा का प्रावधान किया गया था।

मगर ऐसे संशोधन होने के बाद आजतक उस काण्ड के आरोपी क़ानूनी दांव पेंचों की वजह से कड़ी सजा से बचे हुए हैं। पिछले दिनों हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या जैसी हैवानियत के बाद देश में फिर से बलात्कारियों को कड़ी सजा के क़ानूनों के लिए हज़ारों लोग विरोध प्रदर्शन हेतु सड़कों पर हैं। प्रदर्शनकरियों का कहना है कि यदि सरकार ऐसे अमानवीय कृत्यों के लिए कड़े क़ानून बनाकर सज़ाएँ दे तो ऐसे मामलों में ज़रूर कमी आ सकती है।

विश्व में कई ऐसे देश हैं जहाँ बलात्कारियों के साथ कोई रियायत नहीं की जाती, उन्हें भीषण दंड दिया जाता है, इसमें मुस्लिम देशों का नाम सबसे ऊपर है जहाँ बलात्कार के लिए आरोपी के लिए कोई रियायत नहीं है।

आइये जानते हैं कि बलात्कारियों को किस देश में कैसी सज़ाएं देने के क़ानून हैं।

सऊदी अरब :

सऊदी अरब में बलात्कारियों को शरिया क़ानूनों के अनुसार कड़ी सजा दी जाती है, अगर आरोप साबित हो जाता है तो सार्वजनिक तौर पर जनता के सामने दोषी का सर क़लम किया जाता है, या फिर सार्वजानिक तौर पर फांसी पर लटकाया जाता है।

उत्तरी कोरिया :

उत्तरी कोरिया में भी बलात्कारियों के साथ कोई रियायत नहीं की जाती, फायरिंग स्क्वाड द्वारा आरोपी को गोली से उड़ा दिया जाता है।

चीन :

चीन में भी बलात्कारियों को कड़ी सजा दी जाती है, आरोप साबित होने पर बलात्कारी को सीधे मौत की सज़ा दे दी जाती है कुछ केसों में उनके गुप्तांग को विकृत करने की सज़ा का भी प्रावधान है।

ईरान :

ईरान में भी बलकारियों को सख्त सजा दी जाती है, आरोप सिद्ध होने पर आरोपी को सार्वजानिक तौर पर फांसी दी जाती या फिर संगसार (एक प्रकार का भयंकर दंड जिसमें अपराधी को ज़मीन में कमर तक गाड़कर उसके सिर पर पत्थर मार मार कर मार दिया जाता है) किया जाता है।

इराक़ :

इराक में भी ईरान की तरह बलात्कार के लिए सख्त सजा है, फांसी या संगसार कर मार दिया जाता है।

यूएई :

UAE में भी बलात्कार के लिए सख्त क़ानून हैं, आरोप सिद्ध होने पर यहाँ बलात्कारियों को सात दिन के भीतर फांसी पर लटका दिया जाता है।

अफगानिस्तान :

अफगानिस्तान में भी रेप के खिलाफ कड़े क़ानून हैं, आरोप साबित होने पर बलात्कारी के सर में गोली मार दी जाती है। या फिर संगसार कर मारा जाता है।

मिस्त्र :

मिस्त्र में भी बलात्कारियों को आरोप साबित होने पर सार्वजानिक तौर पर फांसी पर लटकाया जाता है।

सूडान और यमन जैसे देशों में भी रेप के आरोपियों को शरिया कानून के तहत सज़ा दी जाती है।

रूस :

रूस में बलात्कारी को 3 साल से अधिक की सज़ा दी जाती है, अपराध के हिसाब से यह 30 साल की भी हो सकती है। इसका फैसला पीड़ित को पहुंचे नुकसान के आधार पर किया जाता है।

USA :

अमरीका में बलात्कार के लिए दो तरह के कानून हैं। State Law और Federal Law, अगर बलात्कार का केस संघीय यानी फेडरल लॉ के अंतर्गत है तो बलात्कारी को 30 साल की सज़ा दी जाती है। वही स्टेट यानी राज्य के कानून और सज़ाएं हर राज्य में अलग अलग हैं।

चेक रिपब्लिक :
चेक रिपब्लिक में भी बलात्कारियों के लिए क़ानून कड़े हैं, उम्रकैद दी जाती है, मगर एक प्रावधान दिया गया है कि यदि कोई दोषी उम्रकैद जैसी मुश्किल सजा से बचना चाहते हैं, उन्हें नपुंसक बनकर जेल से बाहर जाने का विकल्प भी दिया जाता है।

दक्षिण कोरिया :

यहां बलात्कार की सजा अधिकतम 15 साल है, दक्षिण कोरिया में बलात्कारियों को नपुंसक बनाए जाने का विधेयक भी लंबित है।

मुस्लिम देशों में बलात्कार बहुत ही कम होते हैं, हर साल जारी होने वाले रेप इंडेक्स में टॉप दस देशों में अमरीका और यूरोप के कुछ देशों सहित दक्षिण अफ्रीका उत्तरी अमरीका के देशों को देखा जा सकता है, मगर मुस्लिम देश कभी टॉप 20 देशों में भी नहीं आये हैं।

इस वर्ष जारी होने वाले रेप इंडेक्स में भी दक्षिणी अफ्रीका पहले नंबर पर है, 2019 के रेप इंडेक्स को यहाँ पढ़ सकते हैं। उपरोक्त आंकड़ों और इंडेक्स आदि को देखकर ये निष्कर्ष निकलता है कि यदि क़ानून कड़े हों और देश की सरकारें सजा देने को प्रतिबद्ध हों तो बलात्कारों की संख्या में निश्चय ही कमी आएगी।

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