केंद्र सरकार ने कश्मीर से प्रकाशित होने वाले दो प्रमुख अख़बारों ‘ग्रेटर कश्मीर’ और ‘डेली कश्मीर’ को सरकारी विज्ञापन देने पर रोक लगा दी है, इन दोनों अख़बारों पर पुलवामा आतंकी हमले के बाद ये रोक लगाईं गयी है, इसके विरोध में कश्मीर एडिटर गिल्ड (KEG) ने कश्मीर से प्रकाशित होने वाले अखबारों के मुखपृष्ठ खाली छोड़े हैं।

Al Jazeera में प्रकाशित खबर के अनुसार कश्मीर से प्रकाशित होने वाले सभी अखबारों ने विज्ञापनों पर लगाईं इस रोक के विरोध में अपने मुखपृष्ठ खाली छापे हैं, और उन पर केवल “unexplained denial of government advertisements to Greater Kashmir and Kashmir Reader”, ही प्रिंट किया है।

 

साथ ही इसके विरोध में कश्मीर एडिटर्स गिल्ड (केईजी) के नेतृत्व में कई पत्रकारों ने भी प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर श्रीनगर के मुख्य शहर में प्रदर्शन किया। भारत में समाचार पत्र अपने अस्तित्व के लिए सरकारी विज्ञापनों पर बहुत अधिक निर्भर हैं।

विज्ञापन की नाकेबंदी ‘ग्रेटर कश्मीर’ और ‘कश्मीर रीडर’ दोनों पर है । पहले ‘ग्रेटर कश्मीर’ को अपने 20 पेज के संस्करण को 12 पेज तक सीमित करने के लिए मजबूर किया गया था, जबकि दूसरा ‘कश्मीर रीडर’ 16 पेज से से 12 तक कर दिया गया था।

कश्मीर एडिटर्स गिल्ड ने एक बयान में कहा, “इस निर्णय को न तो औपचारिक रूप से अवगत कराया गया है और न ही संबंधित संगठनों को अब तक कोई कारण बताया गया है।”

मोदी पर राजनीतिक प्रतिशोध लेने का आरोप लगाते हुए, KEG के महासचिव बशीर मंजर ने बताया , ” हमने राज्य में मीडिया के संस्थान के जानबूझकर गला घोंटने और कमज़ोर करने के खिलाफ लड़ने का फैसला किया है।”

उन्होंने कहा, “हम सरकार से विज्ञापनों पर टोक का स्पष्टीकरण मांग रहे हैं, लेकिन 15 दिनों में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई है। आज, हम खाली फ्रंट पेजों के साथ आने के लिए मजबूर थे। ” उन्होंने कहा कि सरकार सूचना के प्रवाह को रोककर पाठकों के साथ अन्याय कर रही है।

“ज़मीन पर, जब हमारे रिपोर्टर रिपोर्ट के लिए जाते हैं, कुछ पीटे जाते हैं और कुछ को पैलेट लगते हैं। यह माहौल पिछले 30 सालों से चल रहा है। यह सिर्फ दूत को मार रहा है,” मंजर ने कहा। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट की नवंबर 2017 की रिपोर्ट के अनुसार कश्मीर में जारी संघर्ष में कम से कम 21 पत्रकार मारे गए हैं, इनमें से कुछ तो सीधे गोलीबारी में और कुछ झड़पों में मारे गए।

डिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष शेखर गुप्ता ने सरकार के प्रतिबंध को “निंदनीय” बताया और इसे तत्काल वापस लेने का आह्वान किया। उनका कहना था की “मीडिया के खिलाफ दबाव के रूप में विज्ञापन का उपयोग करना किसी भी सरकार की ओर से एक सस्ती चाल है।”

रविवार को एक बयान में, प्रेस स्वतंत्रता के समूह के रिपोर्टर विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के एशिया-प्रशांत प्रमुख डैनियल बास्टर्ड ने दोनों अखबारों के खिलाफ सरकार के प्रतिबंध की निंदा की।

ये RSF वही संगठन है जो विश्व प्रेस स्वतंत्रता इंडेक्स जारी करता है। जब से नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने हैं,प्रेस की आजादी के मामले में भारत की रैंकिंग गिरी है, 2018 में ये रैंकिंग 136 से गिरकर 138 हो गयी थी, RSF के अनुसार हेट क्राइम इसका एक बड़ा कारण है, हिंदू चरमपंथी पत्रकारों से बहुत हिंसक तरीके से पेश आ रहे हैं।