IIT खड़गपुर के पुण्यजॉय साहा, बिन्नी मैथ्यू, अनिमेष मुखर्जी और MIT इंस्टीट्यूट ऑफ डेटा, सिस्टम्स एंड सोसाइटी (USA) किरण गरिमेला द्वारा किये गए एक अध्ययन रिपोर्ट ‘Short is the Road that Leads from Fear to Hate: Fear Speech in Indian WhatsApp Groups.’,में पाया गया है कि भारत में व्हाट्सएप्प मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच और डराने धमकाने का सस्ता, सुलभ और शक्तिशाली टूल साबित हो रहा है।

टेलीग्राम बहुत छोटा है और फेसबुक तथा ट्विटर भी खुला है, ट्विटर और फेसबुक जैसे प्लेटफार्मों पर फियर स्पीच और हेट स्पीच वाली सामग्री की निगरानी हो सकती और यूज़र को ब्लॉक करने और हानिकारक / घृणित भाषा के उपयोग को सीमित करने के लिए पोस्ट को हाईड करने जैसी सामग्री मॉडरेशन टूल और काउंटरिंग तंत्र प्रदान करता है। लेकिन व्हाट्सएप एक एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म है, जहां संदेश केवल अंतिम उपयोगकर्ताओं द्वारा देखा जा सकता है। यही विशेषता व्हाट्सएप्प पर हानिकारक सामग्री के किसी भी रूप के प्रसार को बहुत आसान बनाता है।

Times of India की खबर के अनुसार रिसर्चर्स ने उक्त अध्ययन रिपोर्ट 5000 व्हाट्सएप्प ग्रुप्स के 2,000,000 संदेशों के अन्वेषण के बाद पेश की है। खासतौर पर राजनीतिक व्हाट्सएप समूह भारत में इस्लामोफोबिक माहौल बनाने में जुटे हैं। जैसा कि विदित है कि सोशल मीडिया सांप्रदायिक उन्माद फ़ैलाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है, भारत उन 14 देशों में से एक है, जहां धार्मिक अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले हो रहे हैं, खासकर मुस्लिमों के नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) के अधिनियमन के बाद।

वेब कॉन्फ्रेंस 2021 में प्रस्तुत किए गए पेपर में कहा गया कि “हमने व्हाट्सएप्प ग्रुप्स की 27,000 पोस्ट्स के डेटासेट को मैन्युअल रूप से क्यूरेट किया, जिसमें से लगभग 8,000 पोस्ट्स fear speech थी। और ये पोस्ट भारत के मुस्लिम समुदाय को टारगेट कर की गईं थीं। यह इन सभी व्हाट्सएप्प ग्रुप्स द्वारा उपयोग की जाने वाली एक समान रणनीति है।

भय और नफरत को मनोवैज्ञानिक तरीके से उकसाने और भड़काने के कई कपटी तरीके हैं। उदाहरण के लिए, उनके डेटासेट में एक पोस्ट होती है कि “मॉब लिंचिंग की शुरुआत मुस्लिम इलाकों से हुई है … इससे हिंदुओं में यह भावना पैदा होती है कि जब उन्हें मौका मिलेगा, तो वे उन्हें (मुसलमानों) घेर लेंगे, उन्हें पीटेंगे और मार देंगे।”

रिसर्चर्स ने देखा कि डराने वाली पोस्ट्स (fear speech) मेसेजेज को अधिक से अधिक ग्रुप्स द्वारा अधिक से अधिक ग्रुप्स में फिर से पोस्ट किया जाता है क्योंकि ऐसे संदेश लोगों में उत्सुकता जगाते हैं। Fear Speech मेसेज स्पष्ट रूप से आक्रामकता, अपराध, और हिंसा से संबंधित विषयों के एक समूह में फिट होते हैं, जो मुसलमानों को अपराधियों के रूप में दिखाते हैं।

अध्ययन में मुसलमानों के प्रति नकारात्मकता को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न साधनों और उपकरणों के बारे में बताया गया है, जिसमें कहा गया है कि वे (मुस्लमान) देश की अखंडता को ख़त्म और हिंदू धर्म को “नष्ट” कर सकते हैं।

जब TOI डेटासेट पर गया तो हिंदुओं में डर फैलाने के लिए कई तरह की गलत सूचनाएँ पाई गईं। वायनाड, जहां राहुल गांधी चुनाव लड़ रहे थे, 2019 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले एक ऐसी जगह बन गई, जहां “हर शुक्रवार गैर मुस्लिमों को मारने के लिए फरमान सुनाया जाता है।”

गोरखपुर के डॉ. कफील खान के हवाले से मुस्लिम डॉक्टरों पर “मेडिकल जिहाद” का आरोप लगाया गया था कि वे एक नकली इलाज के ज़रिये हिंदुओं को मारते हैं। और “लव जिहाद”, संदेशों में कहा गया कि ये मानव अंगों के व्यापार के ब्लैक मार्केट के लिए था, जहाँ एक हिन्दू लड़की 5 करोड़ में बेचीं जाती थी।

यही नहीं व्हाट्सएप्प पर फेक मेसेजेज और सूचनाओं की भी भरमार है जैसे एक मेसेज कि “1378 में, भारत का एक हिस्सा अलग हो गया, एक इस्लामिक राष्ट्र बन गया, नाम है ईरान, 1761 में, एक हिस्सा भारत से अलग हो गया, एक इस्लामिक राष्ट्र बन गया। नाम अफगानिस्तान है … और अब उत्तर प्रदेश, असम और केरल एक इस्लामिक राज्य बनने की कगार पर हैं!”

भारत जैसे देश में व्हाट्सएप्प के 45 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ताओं के साथ यह मामला इसे और अधिक गंभीर और महत्वपूर्ण बनाता है। एक कारण यह है कि व्हाट्सएप महत्वपूर्ण है क्योंकि कोई मॉडरेशन नहीं है। व्हाट्सएप के पास 80% इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, इस पैमाने से एक धर्म निरपेक्ष लोकतान्त्रिक देश में इस तरह के मामलों का बड़ा फर्क पड़ता है।

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