दो दिन पहले हरियाणा के सिंगार गांव के ड्राइवर यासीन का मृत और लहू-लुहान शरीर मिला था, पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार मेवात ज़िले के सिंगार गांव निवासी यासीन पुत्र सुलेमान की बेरहमी से हत्या की गयी है, उसके शरीर पर चाकू के निशान और नोची हुई आँखों से लग रहा है यासीन को कई लोगों ने मिलकर तड़पा तड़पा कर क़त्ल किया है।

हरियाणा पुलिस मामले की जाँच कर रही है, मगर परिवार वालों का आरोप है कि यासीन की हत्या की वजह मॉब लिंचिंग है, यासीन ट्रक ड्राइवर था, उसके 3 बेटे और 3 बेटियां हैं, लगभग बीस सालों से यासीन ट्रक ड्राइवरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करता था।

पिछले शनिवार को यासीन हर बार की तरह अपना ट्रक ट्रांसपोर्टर के यहाँ खड़ा कर अपने घर जल्दी ही पहुँचने का फोन कर अपने गांव सिंगार के लिए निकला था, मगर जब रविवार की सुबह तक भी यासीन घर नहीं पहुंचा तो परिवार वालों ने उसकी तलाश शुरू की, परिजन जब उसे ढूंढते हुए शहर पहुंचे तो उन्हें खबर मिली कि पलवल में एक आदमी की हत्या हुई है और उसकी लाश अभी तक वहीँ पड़ी हुई है।

जब परिजन उस जगह पहुंचे तो उनके दुःख का ठिकाना नहीं रहा, सामने खून से लथ पथ यासीन की लाश पड़ी थी। पलवल पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है, इस घटना के बाद गांव में मातम और आक्रोश का माहौल है, मोदी राज में केवल मेवात क्षेत्र के ही आधा दर्जन लोगों को मॉब लिंचिंग कर जानवरों की तरह पीट पीट कर मार डाला गया है।

यासीन के परिजनों ने इस हत्या की निष्पक्ष जांच और आरोपियों की गिरफ़्तारी और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है, इस क्षेत्र में लगातार हो रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं से मुसलमान भयभीत हैं, भाजपा शासित राज्यों में बेख़ौफ़ बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, और अदालत ने मॉब लिंचिंग प्रभावित राज्यों को सख्त क़ानून बनाने और मॉब लिंचिंग रोकने का आग्रह किया था, मगर राज्य सरकारें शायद इन गुंडा तत्वों पर लगाम लगाने को प्रतिबद्ध बिलकुल भी नज़र नहीं आतीं।

यही वजह है कि भाजपा शासित राज्यों में मॉब लिंचिंग की घटनाये नहीं रुक रही हैं, परसों ही आसाम के बिश्वनाथ चाराली में एक स्थानीय निवासी शौकत अली पर गोमांस ले जाने के आरोप में भीड़ ने हमला कर दिया, उसे बुरी तरह से मारा पीटा गया और उसे सूअर का मांस खाने पर मजबूर किया गया, एक ही सप्ताह में दो अलग अलग भाजपा शासित राज्यों में दो मॉब लिंचिंग की घटनाएं कहती हैं कि ये मॉब लिंचिंग का चरम काल है।