नन्ही सी उम्र में बड़ा सोचने और दुनिया को चौंकाने वाले इस बच्चे हाज़िक़ क़ाज़ी की प्रतिभा का लोहा दुनिया मान रही है, पुणे स्थित इंडस इंटरनेशनल स्कूल के छात्र हाज़िक़ क़ाज़ी ने इस छोटी-सी उम्र में सुमद्री जीवों के संरक्षण के बारे में शोध कर एक अविष्कार किया जिसकी दुनिया के समुद्री विज्ञानी प्रशंसा कर रहे हैं।

India Times की खबर के अनुसार हाज़िक़ क़ाज़ी जलीय और पारिस्थितिकी तंत्र के साथ पर्यावरण को बचाने के लिए अनोखे अविष्कार का विचार लेकर आये हैं।

हाज़िक़ क़ाज़ी कहते हैं कि “क्या आप जानते हैं 2050 तक समुद्र में हमारे पास समुद्र जीवों जितनी या उससे भी ज्यादा प्लास्टिक होगा। अगर हम समुद्र का सारा प्लास्टिक जमा करेंगे तो हमें उसे फेंकने के लिए चन्द्रमा जैसे दो बड़े ग्रहों की जरूरत पड़ेंगी।”

सभी को याद होगा कि जुलाई 2013 को उत्तरी निदरलैंड में एक युवा व्हेल मृत अवस्था में पायी गयी थी। उस व्हेल के पेट में असमान्य रूप से सूजन आयी हुई थी। जब उसके पेट को खोला गया तो उसमें दो पाइप, नौ मीटर की रस्सी और 16 किलो प्लास्टिक मिली। इस प्लास्टिक की वजह से व्हेल के आंतो में अवरोध पैदा हो गया और उसकी मौत हो गयी थी।

हाज़िक़ क़ाज़ी ने समुद्री कचरे और अपशिष्ट को संसाधित (Recycle) करने वाला एक मॉडल बनाया है जिसे उन्होंने ERVIS (एर्विस) नाम दिया है, जो एक समुद्री जहाज जैसा है। यह समुद्र की सतह से आसानी से कचरा खींच सकता है। ये ठीक उस बड़े डिब्बे के साथ एक वैकुम क्लीनर की तरह है जो कचरे को संसाधित कर, उसका अपशिष्ट एकत्र करता है। साथ ही विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक का विश्लेषण कर उसे अलग भी कर सकता है।

इससे पहले क़ाज़ी ने अपने अविष्कार का जो मॉडल बनाया था वह सिर्फ 7 सेकंड तक ही काम कर सका। लेकिन फिर भी क़ाज़ी ने हार नहीं मानी और एक लम्बा सफर तय किया। बहुत से शोध और बार-बार के परीक्षण के बाद आखिर इस 12 वर्षीय छात्र ने 3D डिज़ाइन के साथ नया मॉडल बनाया और उसे एक मूर्त रूप दे दिया।

हाज़िक़ क़ाज़ी महासागरों में बढ़ने वाले अपशिष्ट और प्रदूषण को दूसरे तरीके से निपटाने के रास्ते की भी खोज कर रहे हैं, साथ ही वह उन प्रतिभाशाली युवाओं की सूचि में भी शामिल थे जिन्होंने दिसंबर में टेडक्स गेटवे टॉक (TED x Gateway Talk) में दुनिया के सामने अपने इनोवेशंस और अविष्कारों को रखा है।

TED x Gateway Talk एक NGO है जो कि Technology, Entertainment और Design के क्षेत्र में नयी प्रतिभाओं को खासकर बच्चों और युवाओं की नयी खोजों अविष्कारों और आईडियाज़ को प्रोत्साहित करती है, दुनिया के सामने रखती है, और उन्हें मंच देती है।

हाज़िक़ क़ाज़ी के सपने और उनकी उड़ान को आप उनकी इस सोच से समझ सकते हैं वो कहते हैं कि “दुनिया में दो प्रकार के लोग होते हैं एक जो समस्या पैदा करते हैं और दूसरे जो इन समस्याओं का हल खोजते हैं, मैं दूसरी श्रेणी का बनना चाहता हूँ।”