योजना आयोग की पूर्व सदस्य एवं प्रसिद्ध शिक्षाविद् सईदा हमीद के नेतृत्व में गये पांच महिला कार्यकर्ताओं की टीम ने दावा किया है कि “जम्मू-कश्मीर में संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने के बाद वहां 51 दिन बीतने पर भी हालात बहुत बुरे हैं और लोग सेना के खौफ के साये में जी रहे हैं तथा 13 हज़ार बच्चे गायब हो गये हैं और कई वकील विभिन्न जेलों में बंद कर दिए गये हैं।”

Mumbai Mirror की खबर के अनुसार पांच महिला कार्यकर्ताओं की टीम ने 17 सितम्बर से 21 दिनों तक कश्मीर के तीन जिलों में 17 गांवों का दौरा करने के बाद अपनी जांच रिपोर्ट जारी करते हुए यह दावा किया। इस टीम में नेशनल फेडरेशन ऑफ़ इंडियन वीमेन की महासचिव अन्नी राजा, प्रगतिशील महिला संगठन की महासचिव पूनम कौशिक, पंजाब विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त प्रोफेसर कँवल जीत कौर तथा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की शोध छात्र पंखुड़ी जहीर ने पत्रकारों से बातचीत में जम्मू-कश्मीर की स्थिति का आँखों देखा हाल बयान किया और कहा कि गत 51 दिन बीत जाने के बाद स्थिति सामान्य होने के कोई आसार नहीं है और सरकार के सब दावे झूठे हैं क्योंकि मीडिया पर सेंसरशिप जैसी स्थिति है, इसलिए सच सामने नहीं आ रहा है।

शोपियां, पुलवामा और बांदीपुरा जिले का दौरा कर लौटी इन महिलाओं ने बताया कि लोग सेना के खौफ में जी रहे हैं क्योंकि सेना के लोग उन पर अत्याचार कर रहे हैं और उनका दमन कर रहे हैं। रात आठ बजते ही सबको अपने घरों की रोशनी बुझा देनी पड़ती है और दुकान, कालेज से लेकर पूरा शहर बंद पड़ा है। परिवहन एवं संचार व्यवस्था जिससे लोगों के आर्थिक हालत बहुत ख़राब हो गये हैं।

मुस्लिम विमेंस फोरम के सईदा हमीद ने कहा कि वे लोग वहां से दुखी दिल से लौटे हैं और दिल खून के आंसू रोता है,पूरा शहर खामोश है, दुकानें खुलती नहीं फसलें बर्बाद हो गयी हैं, सेब भी खत्म हो गये हैं और 10-12 वर्ष से लेकर 22-24 साल के 13 हज़ार लड़के गायब हो गए हैं और उनके घर वालों को पता नहीं कि सेना के जवान उनके बच्चों को कहाँ ले गये हैं।

पेशे से वकील पूनम कौशिक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन के दफ्तर पर ताला लगा हुआ है और वकीलों को पीपुल्स सिक्यूरिटी कानून में गिरफ्तार कर आगरा, जालंधर, फरीदाबाद की जेलों में कैद कर रखा गया है और उनके घर वालों को बताया नहीं जा रहा कि वे किस जेल में हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की महिला संगठन से जुड़ी श्रीमती अन्नी राजा ने कहा कि उनकी टीम ने किसानों, वकीलों, डाक्टरों, नर्सों, स्कूल-कालेज के छात्रों तथा प्रोफेसरों और गृहणियों से भी मुलाकात की। सबका कहना है कि उन्हें केंद्र सरकार ने छल किया है और सेना उन पर अत्याचार तथा दमन कर रही है। लोगों के मन में सेना को लेकर काफी क्रोध है।

इन महिला कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तार लोगों को तत्काल रिहा करने की झूठी प्राथमिकी रद्द करने स्थिति सामान्य करने संचार व्यवस्था बहाल करने और सेना के दमन की जांच कराने तथा अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग की है।

इससे पहले सुरक्षा बलों द्वारा कश्मीर में बच्चों को उठाये जाने पर The Quint ने 3 सितम्बर ‘2019 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें बताया गया था कि कैसे कश्मीर में रात को छापे मार कर बच्चों को उठाया जा रहा है।