भारत में निष्पक्ष पत्रकारिता करना अब खतरनाक पेशा बनता जा रहा है, शायद यही कारण है कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2020 में, भारत 180 देशों में से 142वें स्थान पर आ गया है। जबकि बीते वर्ष भारत इस इंडेक्स में 140वें स्थान पर था।

2014 से लेकर 2019 तक लगभग 40 पत्रकारों की हत्याएं हुई जिनमें जिनमें से 21 पत्रकारों की हत्या के कारण उनके पेशे से जुड़े थे, इनमें 36 मामले तो सिर्फ 2019 में ही दर्ज किए गए हैं। वहीँ गत पांच वर्षों में देश की प्रख्यात महिला पत्रकारों पर हमले, धमकियों में बेतहाशा वृद्धि हुई। एक महिला पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या भी हुई।

Thakur Foundation की एक रिपोर्ट के अनुसार इन हत्याओं और हमलों के दोषियों में राजनैतिक दलों के लोग, धर्म गुरु, सरकारी एजेंसियां, सुरक्षाबल, नेता, छात्र संगठनों के नेता, आपराधिक गैंग से जुड़े लोग और स्थानीय माफिया शामिल रहे।

ठाकुर फाउंडेशन की ‘GETTING AWAY WITH MURDER’ नाम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014 के बाद से अब तक भारत में पत्रकारों पर हमले या हत्याओं के मामले में एक भी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया गया है।

वहीँ दिल्ली स्थित Rights and Risks Analysis Group (RRAG) नामक थिंक टैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना के बढ़ते केसेज़ उसके बाद अचानक से घोषित लॉक डाउन और सरकार की असफल नीतियों के खिलाफ रिपोर्टिंग करने पर मार्च 2020 से 55 पत्रकारों की गिरफ्तारियां की गईं।

LA Times की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 55 पत्रकारों ने COVID -19 तथा 25 मार्च से 31 मई, 2020 के बीच लॉक डाउन के दौरान अपने जीवन को खतरे में डालकर दूत के रूप में काम किया तथा अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए विभिन्न कुप्रबंधन, कमियां, भ्रष्टाचार, प्रवासी कामगारों अपर्याप्त पीपीई की कमी आदि के बारे में रिपोर्टिंग की।

यही कारण रहा कि उनके खिलाफ FIR दर्ज हुईं, सम्मन या कारण बताओ नोटिस जारी किये गए, शारीरिक हमले तक हुए।

Rights and Risks Analysis Group ने एक प्रेस नोट में कहा कि इस अवधि के दौरान मीडिया कर्मियों पर सबसे ज्यादा हमले उत्तर प्रदेश (11) से हुए, उसके बाद जम्मू-कश्मीर (6), हिमाचल प्रदेश (5), तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल में चार-चार हमले हुए। ओडिशा और महाराष्ट्र। पंजाब, दिल्ली, मध्य प्रदेश और केरल से दो-दो और असम, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, छत्तीसगढ़, नागालैंड, कर्नाटक, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और तेलंगाना से एक-एक मामले सामने आए हैं।

उन 21 पत्रकारों की सूची जिनकी हत्याएं 2014 से 2019 के बीच हुईं : –

1. नाम : मिथिलेश पांडेय
हत्या का दिन : 25 अक्टूबर 2015
स्थान : गया (बिहार)

2. नाम : तरुण आचार्य
हत्या का दिन : 27 मई 2014
स्थान : गंजम (ओडिसा)

3. नाम : एमएनवी शंकर
हत्या का दिन 26 नवम्बर 2014
स्थान : गुंटूर (आंध्र प्रदेश)

4. नाम : जगेंद्र सिंह
हत्या का दिन 8 जून 2015
स्थान : शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश)

5. नाम : संदीप कोठारी
हत्या का दिन 21 जून 2015
स्थान : बालाघाट MP /वर्धा (महाराष्ट्र)

6. नाम : अक्षय सिंह
हत्या का दिन : 4 जुलाई 2015
स्थान : मेघनगर (मध्यप्रदेश)

7. नाम : राघवेंद्र दुबे
हत्या का दिन 17 जुलाई 2015
स्थान : मुंबई (महाराष्ट्र)

8. नाम : करुण मिश्रा
हत्या का दिन 13 फ़रवरी 2016
स्थान : सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश)

9. नाम : राजदेव रंजन
हत्या का दिन : 13 मई 2016
स्थान : सिवान (बिहार)

10. नाम : धर्मेंद्र सिंह
हत्या का दिन : 12 नवंबर 2016
स्थान : सासाराम (बिहार)

11. नाम : गौरी लंकेश
हत्या का दिन : 5 सितम्बर 2017
स्थान : बैंगलोर (कर्नाटक)

12. नाम : शांतनु भौमिक
हत्या का दिन : 20 सितम्बर 2017
स्थान : मंडवाई (त्रिपुरा)

13. नाम : राजेश मिश्रा
हत्या का दिन : 21 अक्टूबर 2017
स्थान : गाजीपुर (उत्तर प्रदेश)

14. नाम : संदीप दत्ता भौमिक
हत्या का दिन : 21 नवंबर 2017
स्थान : आरके नगर, अगरतला के पास (त्रिपुरा)

15. नाम : संदीप शर्मा
हत्या का दिन : 26 मार्च 2018
स्थान : भिंड (मध्यप्रदेश)

16. नाम : नवीन निश्चल और विजय सिंह
हत्या का दिन 25 मार्च 2018
स्थान : आरा (बिहार)

17. नाम : शुजाअत बुखारी
हत्या का दिन 14 जून 2018
स्थान : श्रीनगर (जम्मू कश्मीर)

18. नाम : अच्युतानंद साहू
हत्या का दिन 30 अक्टूबर 2018
स्थान : दांतेवाड़ा (छत्तीसगढ़)

19. नाम : चन्दन तिवारी
हत्या का दिन : 30 अक्टूबर 2018
स्थान : चतरा (झारखण्ड)

20. नाम : अमित टोपनो
हत्या का दिन : 9 दिसंबर 2018
स्थान : खूँटी (झारखण्ड)

इसी कड़ी में 2014 से 2019 के बीच फील्ड में रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों पर भी हिंसक हमले किये गए , जिनमें कुछ की सूची इस प्रकार है :

1. एम सुचित्रा और वी.एम. दीपा पर 24.05.2014 और दोबारा 22.05.2015 को तमिलनाडु के कुलीतलाई इलाक़े में रेत माफिया पर रिपोर्टिंग के कारण हमले हुए। इनके साथी एस चंद्रन और प्रशांत अलबर्ट पर भी हमला किया गया।

2. भैरवी सिंह पर भी 9.11.2015 को दिल्ली में एक हिंसक भीड़ ने हमला किया था।

3. मंजू कुट्टी कृष्णन पर 08.11.2016 को एर्नाकुलम में वकीलों ने हमला किया था।

4. रोहिणी स्वामी और कैमरा पर्सन मधु पर 13.09.2016 को बैंगलोर में अज्ञात लोगों ने हमला किया था।

5. रश्मि मन्न और उनकी टीम पर 30.05.2016 को दिल्ली में हमला किया गया।

6. मालिनी सुब्रमण्यम पर 22.02.2016 को बस्तर में पुलिस और माओवादियों ने हमला किया था।

7. रेवती लाल पर 22.01.2016 में अहमदाबाद में गुजरात दंगे के आरोपी के पैरोल पर बाहर आने पर इंटरव्यू लेने पर हमला किया गया।

8. दमयंती धर पर 07.01.2018 को अहमदाबाद में हमला किया गया।

9. एमी लॉबिइ पर 10 मार्च 2018 को असम-मिजोरम बॉर्डर पर हमला किया गया।

10. पैट्रिसिया मूखीम पर 17.04. 2018 को उम्पलिंग (मेघालय) में अज्ञात लोगों ने हमला किया।

11. संध्या रविशंकर पर 28.09. 2018 को चेन्नई में खनिज माफिया ने हमला किया।

12. नबीला जमालुद्दीन और उनके साथियों पर 08.12. 2018 को बैंगलोर में खनिज माफिया ने हमला किया।

13. सरिता बालन, पूजा प्रसन्ना, राधिका रामास्वामी, मौसमी सिंह, स्नेहा मैरी कोशी पर 17 अक्टूबर 2018 को सबरीमाला मंदिर में महिला श्रृद्धालुओं के प्रवेश की कवरेज करने पर हमला किया गया।

14-18. शजिला अली फ़ातिम पर 3 जनवरी 2019 को महिलाओं द्वारा 600 किमी लम्बी मानव श्रृंखला के विरोध में RSS-BJP समर्थकों के विरोध प्रदर्शन कवर करने के दौरान हमला किया गया।

19. रिफत मोइद्दीन पर 9 सितम्बर 2019 को अपना प्रेस परिचय पत्र दिखाने के बावजूद श्रीनगर में सुरक्षा बलों अपशब्द बोले गए तथा उनके साथ धक्का मुक्की की गई, उनकी कार पर लाठियां मारी गईं।

2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से प्रेस की स्वतंत्रता में लगातार गिरावट आई है और यही कारण है कि विश्व प्रेस सूचकांक में भारत की रेटिंग लगातार खिसक रही है। पेरिस स्थित Reporters without Borders द्वारा जारी वर्ष 2020 के विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल, भूटान और श्रीलंका से भी नीचे 142 वें स्थान पर खिसक आया है।

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