क्रूर फ़्रांसिसी उपनिवेशवाद का उदाहरण हैं अल्जीरियन स्वतंत्रता संग्राम के यौद्धाओं के ये नरमुंड।

क्रूर फ़्रांसिसी उपनिवेशवाद का उदाहरण हैं अल्जीरियन स्वतंत्रता संग्राम के यौद्धाओं के ये नरमुंड।
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फ्रांस ने 1830 मे अल्जीरिया पर हमला कर वहाँ क़ब्ज़ा कर लिया था और लगभग करीब 132 साल तक अल्जीरिया पर शासन किया। इन 132 सालों में फ़्रांस ने अल्जीरिया में क्रूरता और निरंकुशता का खुला खेल खेला।

अल्जीरिया के ‘आर्मी ऑफ़ नेशनल लिबरेशन’ नामक एक संगठन ने 1945 के बाद से ही स्वतंत्रता के लिए फ्रांस के ख़िलाफ़ संघर्ष करना शुरू कर दिया था। इसी के चलते 1954 से 1962 के बीच अल्जीरिया और फ्रांस के बीच जबर्दस्त संघर्ष चला। इस संघर्ष को ‘Algerian War of Independence’ के नाम से जाना जाता है। इस राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में क़रीब 1,500,000 लाख अल्जीरियाई लोग फ्रांसीसी सैनिकों द्वारा मारे गए थे।

अंत में साल 1962 में फ्रांस ने अल्जीरिया से हार मान ली जिसके बाद अल्जीरिया एक आज़ाद मुल्क बना। इस संघर्ष में ‘आर्मी ऑफ़ नेशनल लिबरेशन’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

मार्च 1962 में, चार्ल्स डी गॉल की सरकार ने आर्मी ऑफ़ नेशनल लिबरेशन’ के साथ बातचीत की जिसके कारण अल्जीरिया में युद्धविराम हुआ। अल्जीरिया की स्वतंत्रता और अल्जीरिया से फ्रांसीसी बलों की पूर्ण वापसी पर एक समझौता भी हुआ।

अप्रैल 1962 में अल्जीरियाई स्वतंत्रता के सवाल पर फ्रांस में एक जनमत संग्रह आयोजित किया गया था और फ्रांसीसी लोगों ने अल्जीरिया की स्वतंत्रता के पक्ष में भारी मतदान किया था। 1 जुलाई 1962 को आयोजित एक समान जनमत संग्रह में अल्जीरिया में 99 प्रतिशत लोगों ने पूर्ण स्वतंत्रता के पक्ष में मतदान किया। 3 जुलाई 1962 को अल्जीरिया की स्वतंत्रता को फ्रांस द्वारा मान्यता दी गई थी।

लौटते समय फ़्रांसिसी सेना अपने उपनिवेशवाद काल की उपलब्धियों की ट्रॉफी के तौर पर सैंकड़ों नरमुंड फ़्रांस ले आई और इन्हे पेरिस म्यूज़ियम में प्रदर्शन के लिए रख दिया गया। अक्टूबर 2017 की शुरुआत में, फ्रांस 24 ने एक रिपोर्ट प्रसारित की, जिसमें उसने पेरिस में “मानव” संग्रहालय में संरक्षित 18,000 खोपड़ी के अस्तित्व का खुलासा किया, जिनमें से केवल 500 की पहचान की गई, जिसमें अल्जीरियाई स्वतंत्रता संग्राम के 37 नेताओं के नर मुंड शामिल थे, जिनके सर फ़्रांसिसी सेना द्वारा मार दिए जाने के बाद काटे गए थे।

मई 2011 में अल्जीरिया ने फ़्रांस से आग्रह किया था कि उन्हें उनके स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के नरमुंड लौटाए जाएँ ताकि उन नायकों का विधिवत अंतिम संस्कार किया जा सके और फ़्रांस सरकार अपने क्रूर उपनिवेशवाद काल के लिए माफ़ी मांगे।

 

इसी कड़ी में जुलाई 2020 को फ़्रांस के राष्ट्रपति इमानुअल मेक्रों ने घोषणा की कि अल्जीरिया को उनके स्वतंत्रता संग्राम के 24 नायकों के नरमुंड लौटाए जाएंगे। आखिर में 5 जुलाई 2020 को अल्जीरिया के 24 नायकों की अस्थियों को लौटाया गया और 127 साल बाद इन्हे अल आलिया कब्रिस्तान में सम्मानपूर्वक विधिवत रूप से दफनाया गया।

ज्ञातव्य है कि 20 दिसंबर 2012 को फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलोंद ने अल्जीरियाई संसद में स्वीकार किया था कि फ़्रांस ने करीब 132 साल तक अल्जीरिया को पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और क्रूर व्यवस्था का शिकार बनाया गया।

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