लगभग 60 करोड़ आधार नंबर पहले ही NPR डेटा बेस से जोड़े ही जा चुके हैं।

स्पेशल रिपोर्ट : The Wire – उर्दू 

द वायर उर्दू की एक स्पेशल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गृह मंत्रालय भरोसा दिला रहा है कि जिनके पास आधार नंबर नहीं है उन्हें NPR अपडेट करने के दौरान इस तरह के दस्तावेज़ देने के लिए मजबूर नहीं किया जायेगा, हालाँकि द वायर द्वारा हासिल किये गए सरकारी दस्तावेज़ सरकार के इन दावों पर सवाल खड़े करते हैं।

देश में इस समय इस बात को लेकर भ्रांतियां हैं कि NPR को आधार से जोड़ा जायेगा या नहीं, कई मीडिया रिपोर्ट में ये बताया गया है कि NPR को आधार नंबर से जोड़ा जायेगा, लेकिन गृह मंत्रालय का ये कहना है कि NPR के लिए किसी भी नागरिक को कोई भी दस्तावेज़ देने के लिए मजबूर नहीं किया जायेगा।

हालाँकि सच्चाई ये है कि NPR – 2020 की प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही लगभग 60 करोड़ आधार नंबरों को NPR डेटा बेस से जोड़ा जा चुका है, ये संख्या जारी किये गए कुल आधार नम्बर्स का लगभग 50 फ़ीसदी है, द वायर को प्राप्त दस्तावेज़ों से ये खुलासा हुआ है।

इन 60 करोड़ आधार नंबरों को NPR से जोड़ने का काम इसी मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान किया गया था, Registrar General and Census Commissioner (महापंजीयक और जनगणना आयुक्त) के कार्यालय के 19 जुलाई 2019 की एक फाइल नोटिंग के अनुसार साल 2015 में आधार नंबर को अपडेट करने की प्रक्रिया के दौरान इन्हे NPR से जोड़ दिया गया था।

फाइल नोटिंग में आगे लिखा गया है कि इसके साथ नए घरों के सदस्यों की जनसँख्या का विवरण भी जमा किया गया था, लगभग 60 करोड़ आधार नंबरों को NPR डेटा बेस के साथ जोड़ा जा चुका है।

उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2017 में महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने NPR डेटा शेयर करने के राज्य सरकारों के अनुरोघ को ठुकरा दिया था। इसका कारण ये दिया गया था कि इससे निजता के उललंघन की आशंका है। हालाँकि केंद्र सरकार के पास इन सभी आंकड़ों तक पहुँच है।

राज्य सरकारों ने लाभार्थियों हेतु जनकल्याण योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए ये डाटा केंद्र सरकार से देने का अनुरोध किया था क्योंकि आधार डाटा के विपरीत NPR डाटा किसी भी परिवार और व्यवसाय के विवरण के लिए अधिक जानकारी प्रदान करता है।

द वायर को प्राप्त दस्तावेज़ से ये भी साफ़ होता है कि केंद्र सरकार ने आधार नंबर और पासपोर्ट की जानकारी भी एकत्रित करने की योजना बनाई है, शायद ये पहला मौक़ा है जब सरकारी फाइलों के आधार पर ये स्पष्ट होता है कि NPR में आधार और पासपोर्ट की जानकारी देना होगी।

19 जुलाई 2019 की एक फाइल नोटिंग के अनुसार साल 2015 में 60 करोड़ आधार नंबरों को अपडेट करने की प्रक्रिया के दौरान इन्हे NPR से जोड़ दिया गया था।

फाइल नोटिंग के अनुसार NPR में आधार और पासपोर्ट के अलावा माता-पिता की जन्मतिथि, जन्म स्थान और पिछले निवास स्थान का पता, मोबाइल नंबर, वोटर आईडी कार्ड नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर इकठ्ठे किये जाने हैं।

खास बात ये है कि जहाँ एक ओर गृह मंत्रालय ये दावा कर रहा है कि चाहे गए ये दस्तावेज़ ऐच्छिक हैं, यानी यदि ये किसी की पास उपरोक्त दस्तावेज़ नहीं हैं तो उसे नहीं देने होंगे, हालाँकि सरकारी दस्तावेज़ों में ये साफ़ नहीं किया गया है, उसमें केवल ये आदेश हैं कि ये सभी विवरण इकठ्ठे किये जाने हैं।

प्राप्त दस्तावेज़ के अनुसार ये भी पता चला है कि पैन नंबर भी NPR से जोड़ने की योजना बनाई थी, हालाँकि इकनोमिक टाइम्स की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि मंत्रियों के एक सर्वे के बाद ये निर्णय लिया गया कि पैन नंबर को NPR से नहीं जोड़ा जायेगा।

आधार के आंकड़ों को अनिवार्य रूप से इकठ्ठा करने के लिए ही नागरिकता संशोधन क़ानून की योजना :

आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और आधार और दूसरे क़ानून (संशोधन क़ानून) 2019 को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय के अधीन महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) को पत्र लिखकर NPR में आधार नंबर लेने की अनुमति मांगी थी।

इसको लेकर (MeitY) और आधार बनाने वाली एजेंसी UIDAI के CEO को 19 जुलाई 2019 को पत्र लिखा गया था, बाद में 6 अगस्त 2019 को इसको लेकर (MeitY) के संयुक्त सचिव एस गोपालकृष्णन की अध्यक्षता में मीटिंग हुई थी, इस मीटिंग में ये फैसला हुआ था कि महापंजीयक और जनगणना आयुक्त इस तरीके से NPR में आधार नंबर ले सकता है। जो आधार रेगुलेशन 2006 के कॉज़ नंबर 5 (जानकारी शेयर करना) के स्तर के अनुसार हो।

कॉज़ नंबर 5 के अनुसार यदि कोई एजेंसी आधार नंबर एकत्रित करती है तो उसे आधार मालिक को ये जानकारी इकठ्ठा करने का कारण और उसके आधार नंबर देना अनिवार्य है या नहीं, ये बताना ज़रूरी होती है, इसके अलावा इस विशेष कार्य के लिए व्यक्ति का आधार नंबर प्रयोग करने के लिए उसकी सहमति लेना ज़रूरी होता है।

इसके अलावा आधार इकठ्ठे करने वाली एजेंसी इस आधार नंबर को केवल उसकी कार्य के लिए प्रयोग कर सकती है जिसके लिए आधार धारक से अनुमति ली गई है, इस शर्तों के आधार पर ही NPR के लिए आधार को जोड़ने की अनुमति दी गई थी।

इसके उत्तर में 23 अगस्त 2019 जी फाइल नोटिंग पर एडिशनल रजिस्ट्रार जनरल संजय ने लिखा कि हम ऐच्छिक रूप से आधार नंबर्स को एकत्रित कर रहे हैं, और 2015 के दौरान एकत्रित किये गए आधार नंबर्स को UIDAI से वेरिफिकेशन किया जाए। हालाँकि लगभग दो महीने बाद रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय को ये अहसास हुआ कि आधार इकठ्ठा करने के लिए Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) के ज़रिये तय की गई शर्तों यानी कि आधार रेगुलेशन 2006 के कॉज़ नंबर 5 को पूरा नहीं करते हैं। यहाँ से सरकार ने ये तय किया कि NPR अपडेट करते हुए अनिवार्य रूप से आधार डाटा इकठ्ठा कर सकते हैं।

12 अक्टूबर 2019 को रजिस्ट्रार जनरल संजय के हस्ताक्षर युक्त फाइल नोटिंग के अनुसार, नागरिकता क़ानून, 1955 की धरा 14 A (5) के अनुसार भारत के नागरिकों की नागरिकता में अपनाई जाने वाली कार्रवाही ऐसी होगी जिसे पहले से ही तय किया जा सकता है, इसलिए नागरिकता ज़ाब्तों, 2003 के जाब्ता 3 (4) के अनुसार नागरिकता रजिस्टर बनाने के लिए NPR अपडेट के दौरान आधार अनिवार्य कर सकते हैं।

रजिस्ट्रार जनरल ने ये भी सलाह दी कि यदि वर्तमान नियमों और धाराओं के तहत ऐसा नहीं हो पाता है तो उसके लिए आधार एक्ट और नागरिकता नियम में संशोधन किया जाए। इस बारे में निर्णय लेने के लिए केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में 18 अक्टूबर 2019 को एक उच्च स्तरीय मीटिंग की गई थी, लेकिन अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि उसमें क्या निर्णय लिया गया।

इस मीटिंग में UIDAI के CEO, Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) के सचिव, क़ानून मंत्रालय के सचिव और रजिस्ट्रार जनरल के प्रतिनिधि मौजूद थे।

(फोटो : द वायर से साभार)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close