जिस देश में मूर्तियों पर धार्मिक आयोजनों पर हज़ारों करोड़ों खर्च कर दिए जाते हों, जिस देश को विश्वगुरु बनाने के दावे किये जाते हों, उस देश के आमजन की हालत बताती ये तस्वीर शर्मिंदा करने वाली है, साथ ही आमजन को मिलने वाली स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पोल भी खोलती है।

औरंगाबाद के घाटी सरकारी अस्पताल की ये तस्वीर है, जहाँ अस्पताल में ड्रिप स्टैंड के अभाव के चलते एक बेटी अपने बीमार पिता को चढ़ाये जानी वाली सेलाइन की बोतल को पकड़ कर दो घंटे तक खड़ी रही, ये घटना मई की है मगर सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रही है, इसे hotstar पर  VIDEO के रूप में देखा जा सकता है।

औरंगाबाद के एकनाथ गवली ऑपरेशन के लिए इस अस्पताल में भर्ती हुए थे, ऑपरेशन होने के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया जहाँ ड्रिप स्टैंड नहीं होने की वजह से डॉक्टर ने उसकी 9 साल की बेटी ध्रुपद के हाथ में सेलाइन की बोतल पकड़ा दी, अपने पिता की ज़िन्दगी के लिए ध्रुपद दो घंटे तक उस बोतल को अपने हाथों में ऊंचा किये खड़ी रही।

घाटी का 1200 बेड का ये सरकारी अस्पताल मराठवाड़ा में सबसे बड़ा है, यहाँ आस पास के आठ ज़िलों के लोग इलाज के लिए आते हैं।

सोशल मीडिया में इस फोटो और मीडिया में इस वीडियो के वायरल होने के बाद घाटी अस्पताल का प्रबंधन सक्रीय हुआ और मामले की जांच की औपचारिकता की गयी, अस्पताल के डीन का कहना था कि ड्यूटी डॉक्टर स्टैंड लेने गया इसी बीच किसी NGO ने ये फोटो खींच लिया, जबकि वीडियो में मरीज़ एकनाथ गवली और खुद उसकी बेटी सच्चाई बता रही है।

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी पर 3000 करोड़ और कुम्भ मेले पर 4000 करोड़ खर्च करने वाले देश के सरकारी अस्पतालों की यही वो कड़वी सच्चाई है जिसे सरकार आडम्बरों के पीछे छुपाती आयी है, गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई बच्चों की मौतें कौन भूल सकता है, उसी योगी सरकार ने कुंभ मेले पर 4000 खर्च कर दिए हैं।

हाथ में बोतल पकडे ध्रुपद के ये फोटो देश के आमजन को दी जाने वाली मूलभूत सुविधाओं की जर्जर हालत का दर्पण है ऐसे सैंकड़ों सरकारी अस्पताल देश में इससे भी बदतर हालत में हैं, मगर सरकार को अपनी मार्केटिंग और आडम्बरों से फुर्सत नहीं है, उस पर नारा दिया जाता है विश्वगुरु बनाने का।

भारत को विश्वगुरु बनाने का नारा लगाने वाले एक बार भावी विश्वगुरु को मुंह चिढ़ाती ये तस्वीर देख लें फिर दोबारा नारा लगाएं।