भारत में फेसबुक बना मुस्लिम विरोध (इस्लामोफोबिया) और फेक न्यूज़ का अखाड़ा।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक कभी मित्रता,अभिव्यक्ति और एक दूसरे से जुड़ने के माध्यम के लिए जाना जाता था, लेकिन भारत में अब ये प्लेटफॉर्म धीरे धीरे नफरत का ज़हर फ़ैलाने का सहज उपलब्ध माध्यम बन गया है, भारत में फेसबुक मुस्लिम विरोधी दुष्प्रचार (इस्लामोफोबिया) का अड्डा बनता जा रहा है, इसके साथ ही इस मंच पर हेट स्पीच और फेक न्यूज़ का प्रतिशत चिंताजनक तौर पर बढ़ता जा रहा है।

Indian Express में प्रकाशित खबर के अनुसार दक्षिण एशियाई अमेरिकी मानवाधिकार और प्रौद्योगिकी अनुसंधान संगठन द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक इंडिया पर अभद्र भाषा और विघटन के विश्लेषण से पता चलता है कि फेसबुक इंडिया पर पोस्ट किए जा रहे कंटेंट में लगभग 37 फीसदी पोस्ट मुस्लिम विरोधी (इस्लामोफोबिया) से सम्बंधित हैं।

इस सर्वे के अनुसार भारत में फेसबुक पर पोस्ट की गयी खबरों में 16 प्रतिशत खबरें फेक न्यूज होती है, सर्वे के बाद मिले डाटा के मुताबिक 13 फीसदी पोस्ट हेट स्पीच से भरी होती हैं साथ ही फेसबुक पर कई ऐसी पोस्ट्स शेयर की जाती हैं जो कि मानवता के विरुद्ध भी होती हैं।

यूएस-आधारित इक्विटी लैब्स द्वारा ‘‘Facebook India: Towards The Tipping Point of Violence Caste and Religious Hate Speech’ शीर्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक पर होमोफोबिक सामग्री इतनी व्यापक रूप से प्रचलित है कि इसे अपनी श्रेणी के रूप में ट्रैक करना होगा, भारत में फेसबुक पर जाति और धर्म आधारित अत्यधिक हिंसक, धमकियाँ देने वाली,अत्यधिक उग्र तथा तथा अल्पसंख्यक विरोधी हेट स्पीच की भरमार है।

भारतीय में फेसबुक पर नफरत फैलाने वाली सामग्री तथा फेसबुक की प्रतिक्रिया का विश्लेषण करने वाली रिपोर्ट को ट्यूनिस में ‘डिजिटल युग में मानवाधिकार पर राइट्सकॉन’ समिट में बुधवार को जारी किया गया है।

South Asian American human rights and technology research organisation पिछले 4 महीने से 6 भारतीय भाषाओं की पोस्ट की निगरानी किये हुए था, इनमें हिंसा की बढ़ावा देने वाली पोस्ट, लोगों को धमकाने, अपमानजनक शब्दों और गालियों का प्रयोग किया गया है। जिस आधार पर ये रिपोर्ट तैयार की गई है उसके लिए फेसबुक की ओर से जारी गाइडलाइन को शामिल किया गया है, Indian Express के अनुसार हेट स्पीच और अपमानजनक करीब 93 फ़ीसदी कंटेंट फेसबुक से हटाए ही नहीं गए हैं, ऐसी पोस्ट अभी भी फेसबुक के टाइमलाइन पर दिखते हैं, इसके लिए फेसबुक की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।

इस मुद्दे पर फेसबुक के प्रवक्ता का कहना है कि “हम भारत और दुनिया भर में अल्पसंख्यकों और समुदायों के अधिकारों की रक्षा करते हैं, सम्मान करते हैं, जो अक्सर हाशिए पर हैं। हमारे पास अभद्र भाषा के खिलाफ स्पष्ट नियम हैं, जिन्हें हम जाति, राष्ट्रीयता, जातीयता, धर्म, यौन अभिविन्यास और लिंग पहचान सहित उनकी संरक्षित विशेषताओं के आधार पर लोगों के खिलाफ हमलों के रूप में परिभाषित करते हैं। हम इसे बहुत गंभीरता से लेते हैं और जैसे ही हमें इसके बारे में पता चलता है, इस सामग्री को हटा देते हैं। ऐसा करने के लिए हमने भारत में कर्मचारियों के साथ कंटेंट समीक्षकों सहित स्थानीय भाषा विशषज्ञों की मदद के लिए निवेश किया है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि “फेसबुक को अपनी सामग्री मॉडरेशन नीति को मजबूत करने की आवश्यकता है, रिपोर्ट में कहा गया है, “294 मिलियन से अधिक सक्रिय खातों वाले 1.3 बिलियन लोगों के देश भारत में फेसबुक यूज़र्स जल्द ही अमरीका की पूरी आबादी से अधिक होंगे। और अमेरिका के उलटभारत में फेसबुक यूज़र्स की संख्या में 400% से अधिक की अभूतपूर्व वृद्धि की संभावना है क्योंकि यूज़र्स की एक पूरी नई पीढ़ी को अभी भी ऑनलाइन आना बाकी है। भारत फेसबुक के भविष्य का बड़ा बाजार है।”

इक्वैलिटी लैब्स में कार्यकारी निदेशक थेनमोही सौंदराजन ने कहा, “भारत में कई सिविल सोसाइटीज की वकालत और मंच पर घृणा फैलाने वाले भाषण और अपमान के पैमाने को देखते हुए, फेसबुक को एक स्वतंत्र मानवाधिकार ऑडिट कराने के लिए सिविल सोसाइटीज के साथ काम करना होगा।

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