विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन 24 नवंबर से जारी है, 10 दिसंबर को इस आंदोलन ने 15 वें दिन में प्रवेश किया, यह सामने आया है कि इस आंदोलन में विभिन्न कारणों से कम से कम 15 किसानों की मौत हो चुकी है।

Tribune India की खबर के अनुसार हताहतों की सूची में नवीनतम एक 32 वर्षीय किसान, अजय मोर है जो मंगलवार सुबह दिल्ली-हरियाणा सीमा के पास मृत पाए गए, जहां प्रदर्शनकारी लगभग दो सप्ताह से डेरा डाले हुए हैं। सोनीपत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि हरियाणा के सोनीपत के मूल निवासी अजय की मौत हाइपोथर्मिया के कारण हुई।

विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सड़क दुर्घटना में चार किसानों की मौत हुई, जबकि 10 की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है और एक की मौत भीषण ठंड के कारण हुई है।

अलोरख गाँव की एक महिला किसान महिंदर कौर की भी एक तस्वीर तब वायरल हुई थी जब एक दुर्घटना में उसका पैर टूट गया था, लेकिन उसने दिल्ली में लड़ाई जीते बिना लौटने से इनकार कर दिया था।

महिला किसान महिंदर कौर.
घायल महिला किसान महिंदर कौर.

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पहला हादसा 24 नवंबर को हुआ था, जब किसानों का एक बड़ा समूह बरनाला जिले के मेहालकलान शहर में पनरोक शीट्स के साथ ट्रैक्टर-ट्रेलर को कवर कर रहा था। धनर गाँव के एक बीकेयू (दकौंडा) कार्यकर्ता कहन सिंह को एक कार ने टक्कर मार दी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बाद में भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने उन्हें “दिल्ली मोर्चे का पहला शहीद” घोषित किया।

किसान संगठनों ने दावा किया है कि अब तक दो महिला प्रदर्शनकारियों की भी हृदय गति रुकने से मौत हुई है। चंद पट्टी गाँव की गुरमेल कौर की दिल का दौरा पड़ने से संगरूर जिले में एक टोल बैरियर पर एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के दौरान मृत्यु हो गई। इसी तरह, गंगोहर गाँव की राजिंदर कौर की दिल का दौरा पड़ने से मेहल कलां टोल बैरियर में मृत्यु हो गई।

स बीच, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने कृषि कानूनों का विरोध करते हुए मरने वाले किसानों के परिवारों को 1 – 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मानसा और मोगा जिलों के दो ऐसे किसानों के परिवारों के लिए 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी।

आंदोलन के दौरान मारे गए 15 किसानों की सूची नीचे दी गई है :-

· 24 नवंबर को काहन सिंह (धनेर, बरनाला) का निधन।

· 27 नवंबर को धन्ना सिंह (चेहनली) का निधन।

· 28 नवंबर को गज्जन सिंह (भंगू खत्र) का निधन।

· 29 नवंबर को जनक राज (धनौला, बरनाला) का निधन।

· 30 नवंबर को गुरदेव सिंह (अत्तर सिंहवाला) का निधन।

· 2 दिसंबर को गुरजंट सिंह (बछौना, मनसा) का निधन।

· 3 दिसंबर को गुरबचन सिंह सिबिया (भिंदरखुर्द, मोगा), बलजिंदर सिंह (झामट, लुधियाना) का निधन।

· 4 दिसंबर को लखवीर सिंह (ललियाना, बठिंडा) का निधन।

· 7 दिसंबर को करनैल सिंह (शेरपुर, संगरूर), राजिंदर कौर (गंगोहर, बरनाला) का निधन।

· 8 दिसंबर को गुरमेल कौर (घरचोन, बठिंडा), मेवा सिंह (खोत, फरीदकोट), अजय कुमार (सोनीपत), और लखवीर सिंह (झारोन, संगरूर) का निधन।

धनेर कहते है कि ““इससे पता चलता है कि किसानों की मांगों के प्रति केंद्र सरकार कितनी असंवेदनशील है। कठोर ठंड में जारी इस आंदोलन और मौतों के बारे में प्रधानमंत्री ने एक शब्द भी नहीं कहा।”

वे अपने इस संघर्ष को इसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए दृढ़ हैं। कीर्ति किसान यूनियन के राजिंदर सिंह कहते हैं “इससे पहले, हमने अपने 10 साथियों को खो दिया था। हम और अधिक खो सकते हैं, लेकिन सरकार के झुकने तक नहीं लौटेंगे।” 20 नवंबर तक पंजाब के विभिन्न स्थलों पर विरोध प्रदर्शन करते हुए 15 किसानों की मौत हो गई थी।

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