नार्वे में पुलिस ने 2014 में सिर्फ 2 गोलियां चलायी थीं जिसमें किसी की मौत नहीं हुई थी।

दुनिया में मची हिंसा और मारकाट के बीच शांति का सर्वोच्च सम्मान नोबेल पुरस्कार देने वाले देश नार्वे ने नई मिसाल कायम की है। Independent  में 8 जुलाई 2015 में प्रकाशित एक खबर के अनुसार एक रिपोर्ट में बताया गया है कि नार्वे की पुलिस ने साल 2014 में केवल दो गोलियां चलाई हैं। इसमें भी न तो किसी की मौत हुई है और न ही कोई घायल हुआ है।

‘पुलिस थ्रेट ऑर यूज ऑफ फायर आर्म्स 2002-2014’ रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 में नार्वे की पुलिस ने तीन बार फायरिंग की थी। इसमें दो लोग घायल हुए थे। इस रिपोर्ट के अनुसार नार्वे पुलिस ने 2014 में केवल 42 मौकों पर बंदूकों का प्रदर्शन किया। यह पिछले 12 सालों में पुलिस द्वारा बंदूकों के इस्तेमाल का सबसे कम आंकड़ा है।

इसके अलावा पिछले 12 सालों में पुलिस की गोली से केवल दो लोगों की मौत हुई है। ये मौतें 2005 और 2006 में हुईं थी। यहां तक कि साल 2011 में जब एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक ने 69 लोगों को गोली मारने से पहले बम विस्फोट कर आठ लोगों को मार दिया था, तब भी पुलिस ने केवल एक गोली चलाई थी।

नार्वे को पश्चिमी यूरोपीय देशों में सबसे कम अपराध दर के लिए जाना जाता है। इस देश की जनसंख्या 50 लाख के करीब है। इस देश में ज्यादातर अपराध सड़क चोरी से जुड़े होते हैं। यहां कोई संगठित अपराध नहीं होता है।

वहीँ अमरीका में पुलिस हमेशा सशस्त्र रहती है, 2015 के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष के पहले छह महीनों में ही 547 लोगों की मौत पुलिस की गोली से हुई जिसमें 503 लोग गन शॉट से मारे गए।

वहीं इंग्लैंड भी इस मामले में नार्वे के साथ ही खड़ा है, 2014 में इंग्लैंड में पुलिस फायरिंग में केवल एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। वहीँ अमरीका में साल 2015 के शुरूआती दिनों में 59 लोग पुलिस की गोली से मारे गए, ये तादाद इंग्लैंड में 24 सालों में पुलिस गोली से मारे गए लोगों के बराबर है।

वहीँ भारत में देखें तो ये आंकड़ें और भयावह हैं, टाइम्स ऑफ़ इंडिया   में प्रकाशित एक खबर के अनुसार नेशनल क्राइम डाटा के रिकॉर्ड में बताया गया है कि भारतीय पुलिस की फायरिंग में 6 सालों में 796 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था।

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