18 जुलाई को अमरीका में ट्रम्प प्रशासन द्वारा नाइजीरिया के उस इमाम को 2019 के ‘अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है जिसने केंद्रीय नाइजीरिया में एक उग्र भीड़ के हमले से 262 ईसाईयों को अपने घर और मस्जिद में छुपा कर बचाया था। उनका नाम है इमाम अबूबकर अब्दुल्लाही।

CNN के अनुसार इमाम अब्दुल्लाही ने 23 जून, 2018 को केंद्रीय नाइजीरिया के बर्किन लाडी क्षेत्र के 10 गांवों में ईसाई किसानों पर उग्र भीड़ ने सुनियोजित हमले शुरू किये थे, इन हमलों से सैकड़ों ईसाई डर कर भागे थे, जब वो लोग इमाम से मिले तो उन्होंने उन सैंकड़ों ईसाईयों को अपने घर और मस्जिद में शरण दे दी, और उसके बाद खुद हमलावरों का मुक़ाबला करने खड़े हो गए।

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता राजदूत सैम ब्राउनबैक ने बुधवार को वाशिंगटन में पुरस्कार समारोह में कहा कि जब हमलावरों ने उन ईसाईयों के ठिकाने के बारे में पूछा, तो इमाम ने इनकार कर दिया। हमलावरों ने उन्हें कई तरह की धमकियाँ दीं मगर वो उन सैंकड़ों लोगों की ज़िन्दगी बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गए, उन्होंने हमलावरों से कहा कि उन लोगों की जगह मेरी ज़िन्दगी ले सकते हो।

सैम ब्राउनबैक ने कहा कि “इमाम अब्दुल्लाही ने क़ाबिले तारीफ हौंसले, निस्वार्थता और सच्चे भाईचारे की मिसाल पेश की है ।” धार्मिक स्वतंत्रता के पैरोकारों को दिए जाने वाले पुरस्कार के आयोजकों ने कहा कि मुस्लिम धर्मगुरु ने दूसरे धार्मिक समुदाय के सदस्यों को बचाने के लिए खुद की जान जोखिम में डाल दी, जो उनके हस्तक्षेप के बिना मारे जाते।

अपने सम्मान पर उन्होंने एक दुभाषिये की मदद से बताया कि “अल्लाह ने मुझे इस काम के लिए चुना था जो मैंने पूरा किया, उन्होंने बताया कि दिन के चार बजे नमाज़ नमाज़ के बाद की ये घटना है, नमाज़ के बाद हमें फायरिंग की आवाज़ें सुनाई दीं, लोग भागे आ रहे थे, हमने लोगों को अंदर आने के लिए कहा, उनमें महिला पुरुष और बच्चे सभी थे, वो सभी अंदर आए तो हमने दरवाज़े बंद कर दिए ताकि हमलावर अंदर न आ सके, हमने तब सिर्फ एक दरवाज़ा खोला।”

“हमलावरों ने मस्जिद को घेर लिया था, वो दरवाजे को खोलने के लिए ज़ोर ज़बरदस्ती कर रहे थे, “जब हमने सुना कि हमलावर ईसाइयों को निशाना बना रहे हैं, हम खिड़की से बाहर आए और पूछा कि वे उन लोगों को क्यों नुकसान पहुंचाना चाहते हैं जो अल्लाह के घर में पनाह लिए हुए हैं ?”

लगभग चार घंटे तक तक चले इस हंगामे के दौरान इमाम अबूबकर ने हमलावरों से कहा कि ‘मेहमानों’ को नुकसान पहुंचाने से पहले उन्हें उनकी लाश पर से गुज़ारना होगा।’ इमाम ने उन सभी 262 ईसाईयों को पांच दिन तक अपने पास सुरक्षित रखा और उन्हें खाने पीने से लेकर ओढ़ने पहनने के सभी इन्तेज़ामात किये गए।

नाइजीरिया के केंद्रीय राज्यों में विदेशी किसानों को बेदखल करने के लिए बोको हरम और स्थानीय सशस्त्र गिरोहों ने आतंक बरपा रखा है।

इमाम अबूबकर अब्दुल्लाही अब दुनिया में शांतिदूत की तरह पहचाने जाने लगे हैं, अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बने हुए हैं।