इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) की रिपोर्ट के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अप्रत्यक्ष सरकारी नियंत्रण की तैयारियां कर ली गईं हैं, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती और डिजिटल मीडिया आचार संहिता के लिए दिशानिर्देश) नियम 2021 को 25 फरवरी 2021 को अधिसूचित किया गया था।

इसी सन्दर्भ में केन्द्र सरकार ने राज्यों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि नए सूचना प्रौद्योगिकी दिशा-निर्देशों के तहत डिजिटल मीडिया और ऑनलाइन प्रसारकों को नोटिस जारी करने व दंड देने का अधिकार केवल केन्द्र सरकार के पास है। राज्य सरकारों, जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस आयुक्तों के पास इस संबंध में कोई शक्ति नहीं है।

हालाँकि इसके पीछे OTT को ढाल बनाया गया है, नियमों के तहत डिजिटल समाचार और OTT सामग्री उपलब्ध कराने वालों को एक आचार संहिता का पालन करना होगा। दरअसल सोशल मीडिया अब एक सशक्त वैकल्पिक मीडिया बन कर उभरा है। विशेषकर शाहीन बाग आंदोलन को विश्व स्तर तक ख्याति दिलाने में इसी सोशल मीडिया ने अहम् रोल अदा किया था।

इसके बाद किसान आंदोलन को देखें तो मुख्यधारा की मीडिया के इतर सोशल मीडिया पर न्यूज़ पोर्टल्स, यू ट्यूब चैनल्स और साहसी पत्रकारों ने ज़मीनी स्तर पर ईमानदारी से इस आंदोलन का सच जनता के सामने रखा।

इसी के साथ डिजिटल मीडिया पर उक्त सभी वैकल्पिक सूचना तंत्रों की सक्रियता और ज़मीनी स्तर पर जाकर सही ख़बरें यूज़र्स तक पहुँचाने से सरकार समर्थित न्यूज़ चैनल्स को मुंह की खानी पड़ती है और सरकार की छवि को भी धक्का लगता है। सरकार अपनी इमेज बिल्डिंग के लिए चिंतित नज़र आने लगी।

सरकार इसी वैकल्पिक मीडिया के पर कतरने के लिए The Information Technology (Guidelines For Intermediaries And Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 लेकर आयी है। यह पहली बार है जब भारत में न्यूज़ पोर्टल्स, सोशल मीडिया और OTT सेवाओं के लिए दिशा निर्देश बनाए गए हैं।

इस नियम के तहत Netflix, Amazon Prime जैसी OTT सेवाओं को अपने कार्यक्रमों को उम्र के आधार पर पांच श्रेणियों में डालने के लिए, अपने यूज़र्स की उम्र मालूम करने के लिए और व्यस्क कार्यक्रमों को बच्चों की पहुंच से दूर करने के लिए कहा गया है।

मुख्य रूप से इस अधिनियम के तहत 10 तरह की सामग्री को सोशल मीडिया के लिए वर्जित बना दिया गया है। इसमें वो सामग्री शामिल है जिस से भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरा होता हो, जिससे मित्र देशों से भारत के संबंधों पर खतरा होता हो, जिस से सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा होता हो, जो किसी जुर्म को करने के लिए भड़काती हो या जो किसी अपराध की जांच में बाधा डालती हो।

इस तरह की सामग्री को भी वर्जित कर दिया गया है जिससे किसी की मानहानि होती हो, अश्लीलता हो, जिससे दूसरों की निजता का हनन होता हो, लिंग के आधार पर अपमान होता हो, जो नस्ल के आधार पर आपत्तिजनक हो और जिससे हवाला या जुए को प्रोत्साहन मिलता हो।

अब आगे सोशल मीडिया कंपनियों को आम लोगों से शिकायत मिलने पर 24 घंटों के भीतर उसे दर्ज करना होगा और 15 दिनों के अंदर उस पर कार्रवाई करनी होगी। इसके लिए सभी सोशल मीडिया कंपनियों को एक शिकायत निवारण अधिकारी और एक अनुपालन अधिकारी भारत में ही नियुक्त करना होगा। इसके साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को हर महीने एक रिपोर्ट भी प्रकाशित करनी होगी जिसमें उन्हें बताना होगा कि उन्हें कितनी और कौन सी शिकायतें मिलीं, उन पर क्या कार्रवाई की गई और कंपनी ने खुद भी किसी वर्जित सामग्री को हटाया या नहीं।

इस नियम के तहत सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा नियमों का पालन ना करने पर तीन साल से सात साल तक की जेल और दो लाख से 10 लाख रुपयों तक के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

इधर सरकार द्वारा घोषित सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती और डिजिटल मीडिया आचार संहिता के लिए दिशानिर्देश) नियम 2021 के खिलाफ एडिटर्स गिल्ड ने भी आवाज़ उठाई है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नए डिजिटल मीडिया नियमों को निरस्त करने की अपील की और इसे दमनकारी और प्रेस की आजादी के प्रतिकूल बताया है।

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