Special Story by : Al Jazeera.

जामिया मिलिया इस्लामिया में हुए नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में प्रदर्शन के दौरान एक वीडियो में पुलिस की बर्बर पिटाई से अपने साथी को बचाने के लिए पुलिस से भिड़ जाने वाली लड़कियों आयशा रैना, लदीदा फरज़ाना और चंद्रा यादव की हिम्मत और बहादुरी की चर्चा न सिर्फ भारत वल्कि विदेशी मीडिया में भी हो रही है।

घर के अंदर से एक लड़के को खींचकर बुरी तरह लाठियों से पीटते हुए सोशल मीडिया पर वायरल और लाखों की संख्या में शेयर हुए एक वीडियो में नज़र आता है कि कुछ पुलिसकर्मी एक घर के अंदर घुसने की कोशिश कर रहे हैं, उस वीडियो में लाल टी-शर्ट और जीन्स पहनी एक व्यक्ति जो कि पुलिसकर्मी नज़र नहीं आता और जिसने अपने सिर पर पुलिस के हेलमेट और हरे रंग की जैकेट पहनी हुई थी, कहता सुनाई देता है कि “आ जा, आ जा। ओये बाहर ले लो, बाहर ले लो, उन्हें बाहर ले चलो।” एक लड़की उन्हें “Go Back Go Back” कहकर लौट जाने को कह रही है, तभी पुलिसकर्मी उस लड़के को पकड़ कर खींचकर सड़क पर ले आते हैं और उसपर बर्बरता से लाठियां बरसाने लगते हैं।

वो तीनों लड़कियां अपने साथी को बचाने के लिए लाठियां बरसाती पुलिस से भिड़ जाती हैं, इन लड़कियों के नाम हैं आयशा रैना, लदीदा फरज़ाना और चंदा यादव। 22 साल की आयशा रेना जामिया मिलिया इस्लामिया में इतिहास की छात्रा है और लदीदा फरज़ाना B. A. अरबी की छात्रा हैं, और चंदा यादव स्नातक छात्रा हैं।

आयशा रैना ने Al Jazeera को बताया कि ” शाम को लगभग 5.30 बजे के समय विरोध प्रदर्शन के बाद हम ग्रुप में सबसे पीछे थे। हमने देखा कि लोग पीछे की ओर भाग रहे हैं और पुलिस हमारी ओर बढ़ रही है। हम एक घर के गैराज के अंदर गए और वहीं रुक गए। हम में से नौ लड़कियाँ और एक लड़का था। गेट को बंद नहीं किया जा सकता था क्योंकि एक कार बीच में खडी थी।”

वो आगे बताती हैं “तभी कुछ पुलिसकर्मियों ने हमें बाहर से घेर लिया और एक पुलिस अधिकारी ने जिसने रूमाल से अपना चेहरा छुपाया हुआ था हमसे बाहर आने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वे हमें नहीं मारेंगे। हमने मना कर दिया लेकिन अचानक उनमें से एक ने हमारे साथी लड़के को बाहर खींच लिया और उस पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं।” लदीदा फरज़ाना ने भी रेना के आरोपों को दोहराया।

वीडियो में नज़र आता है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथी को उसकी जैकेट के कॉलर से पकड़ कर घसीट कर बाहर खींच लिया और फुटपाथ पर पटक कर उसपर बेरहमी से लाठियां बरसाने लगे, दोनों लड़कियां अपने साथी को बचाने के लिए दौड़ती हैं आयशा रैना अपने साथी को लाठियों से बचाने के लिए पुलिसकर्मियों के सामने ढाल बन कर खडी हो जाती हैं, और लदीदा फरज़ाना और चंदा यादव अपने साथी को संभालती हैं जो लहू लुहान हो चुका था।

लदीदा फरज़ाना ने अल जज़ीरा को बताया “उनके साथ कोई महिला पुलिस नहीं थी, इसलिए हमने सोचा कि पुलिस हमें नहीं मारेगी या हमें प्रताड़ित नहीं करेगी और हम अपने साथी को बचा सकते हैं।” “पुलिस ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया क्योंकि हम अपने दोस्त को बचा रहे थे। उन्होंने हमें भी लाठियां मारीं।” लेकिन पुलिसकर्मियों ने लदीदा फरज़ाना के विरोध के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथी के पांवों पर लाठियां मारनी जारी रखीं।

आयशा रैना कहती हैं कि “उस वक़्त मेरे दिमाग में एक ही बात थी पुलिस की बर्बर पिटाई से अपने साथी को बचाने की।”

अपने साथी को बचने वाली छात्राओं में उत्तर प्रदेश राज्य की स्नातक छात्रा चंदा यादव कहती हैं कि वो पुलिस से नहीं डरती। “भले ही पुलिस ने मुझे पीटा होता, मुझे कोई पछतावा नहीं होता,” चंदा यादव ने अल जज़ीरा को बताया।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की इन बहादुर लड़कियों के अपने साथी को बचाने के लिए पुलिस से भिड़ने की तारीफ सोशल मीडिया पर की जा रही है, टवीटर पर नताशा बधवार @natashabadhwar लिखती हैं “How to rescue a victim during a lynching incident. Real life demo by women students of Jamia,” ” एक लिंचिंग जैसी घटना के दौरान बचाव कैसे करें। जामिया की इन छात्राओं ने इसका लाइव डेमो दे दिया है।